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Himachal News : बढ़ते कर्ज के जाल में फंसी हिमाचली अर्थव्यवस्था में दम घुटने की नौबत

 


94992 करोड़ लोन, अगले पांच साल में मूलधन-ब्याज चुकाने को चाहिए 70718 करोड़


हिमाचल में बढ़ते कर्ज के जाल से राज्य की अर्थव्यवस्था में अब दम घुटने की नौबत है। 16वें वित्तायोग के सामने राज्य सरकार ने ऋणों के मामले में अगले पांच साल की स्थिति को रखा है। इसके आंकड़े बताते हैं कि अगले पांच साल में लोन का मूलधन और ब्याज चुकाने के लिए 70,718 करोड़ भरने होंगे। इसमें 44,617 करोड़ सिर्फ ब्याज के ही हैं। कर्ज के भुगतान के लिए इस शेड्यूल को बनाए रखना राज्य सरकार के लिए चुनौती होगा, इसलिए वित्त आयोग से मदद मांगी गई है। इसकी वजह यह है कि भारत सरकार राज्यों की लोन लिमिट को नहीं बढ़ा रही। हिमाचल को औसतन नौ से 10 हजार करोड़ की सालाना लोन लिमिट मिल रही है। आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान वित्त वर्ष में हिमाचल पर कुल लोन 94,992 करोड़ हो गया है। फायनांस कमीशन को दिया मेमोरेंडम कहता है कि नए वेतन आयोग और ओल्ड पेंशन के बाद सैलरी और पेंशन का बिल 59 फीसदी बढ़ा है। राज्य सरकार के ऋणों की निर्भरता भी अब ओपन मार्केट के लोन पर है। वित्त वर्ष 2018-19 में 44 फीसदी लोन मार्केट से था, जबकि 2022-23 में ओपन मार्केट लोन 53 फीसदी हो गया। इस वित्त वर्ष में दिसंबर 2024 तक लोन लिमिट करीब 6200 करोड़ है।

दिसंबर के बाद आखिरी तिमाही के लिए केंद्र सरकार अलग से लिमिट सेंक्शन करेगी। दिसंबर तक की लिमिट में से भी आधी धनराशि हिमाचल सरकार पहले दो महीनों में ले चुकी है। ऐसे में दिसंबर तक भी गुजारा होना मुश्किल है। यानी राज्य की लोन पर निर्भरता खत्म नहीं होने वाली। इस साल राज्य का कुल बजट 58,444 करोड़ है, लेकिन इसमें से सैलरी, पेंशन, लोन इत्यादि के प्रतिबद्ध खर्चे 42,079 करोड़ के हैं। हिमाचल सरकार ने अपने संसाधन बढ़ाने के लिए कुछ कदम उठाए थे, लेकिन वाटर सेस कानूनी पचड़े में फंस गया। अन्य कोई बड़ा सोर्स आमदनी का दिख नहीं रहा और मुफ्त की रेवडिय़ां हालत और खराब कर रही हैं। गौरतलब है कि ऋण का भुगतान (डैट सर्विसिंग) और अपनी जरूरत पूरी करने को हिमाचल सरकार के 16वें वित्तायोग के सामने नया फार्मूला रखा है। वित्त आयोग को कहा गया है कि राज्य में मानव विकास के अच्छे इंडिकेटर्स को देखते हुए लोन के लिए शर्तें कम की जाएं।

एनएसएसएफ लोन अभी महंगे हैं। इन्हें सस्ता किया जाए या फिर स्वैप की ऑप्शन दी जाए या फिर इनके बदले मार्केट लोन लेने दिया जाए। भारत सरकार के पुराने लोन को ब्याज मुक्त किया जाए या ये लोन माफ कर दिए जाएं। कोविड के बाद कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू किए गए 50 साल तक के ब्याज मुक्त लोन की योजना को आगे भी जारी रखा जाए।

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