Himachal News : हिमाचली हितों के लिए साम-दाम दंड, भेद सबका करेंगे इस्तेमाल

रेवेन्यू डेफेसिट ग्रांट (आरडीजी) से संबंधित सर्वदलीय बैठक में भाजपा के बहिष्कार के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मीडिया से बातचीत में कहा कि हमें तो यह लड़ाई लडऩी है। हमारे लिए यह चुनौती है और हम हर चुनौती को लड़ाई समझकर नहीं, युद्ध समझकर लड़ते हैं। साम, दाम, दंड, भेद के साथ इस लड़ाई को भी लड़ेंगे।
प्रदेश के हित की इस लड़ाई में सरकार का साथ माकपा और आम आदमी पार्टी भी देगी। जब प्रदेश के हित की बात आती है, तो कांग्रेस सबसे पहले लड़ती है। सीएम सुक्खू ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार को अपने कार्यकाल के दौरान राजस्व घाटा अनुदान के तौर पर 54,000 करोड़ रुपए और जीएसटी मुआवजे के तौर पर 16,000 करोड़ रुपए मिले थे, जबकि मौजूदा राज्य सरकार को अब तक राजस्व घाटा अनुदान के तौर पर सिर्फ 17,000 करोड़ रुपए मिले हैं।
उन्होंने कहा कि पूरी सावधानी और वित्तीय प्रबंधन के साथ प्रदेश सरकार राज्य को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। सीएम ने सर्वदलीय बैठक में माकपा, आप, बसपा का धन्यवाद किया और कहा कि नेता प्रतिपक्ष राजीव बिंदल और भारतीय जनता पार्टी की टीम भी पूरे लाव-लश्कर के साथ आई।
बैठक में भाजपा को सबसे पहले बात रखने के लिए कहा गया, तो जयराम ठाकुर और राजीव बिंदल ने कहा कि सबसे पहले बाकी पार्टियां अपने विचार रखें। सीएम ने कहा कि हम तो चाहते थे कि बैठक के दौरान मीडिया भी मौजूद रहे, लेकिन भाजपा के अनुरोध पर मीडिया को बाहर रहने के लिए कहा गया। माकपा ने भी सकारात्मक रूप से कहा कि यह सरकार का सवाल नहीं है, यह अधिकार की बात है।
सेक्रेटरी फायनांस ने अपना वक्तव्य दिया। भाजपा ने बैठक में कहा कि पीएमजीएसवाई दिया, एनएच और फोरलेन दिए, लेकिन आरडीजी को लेकर भाजपा ने कुछ नहीं कहा। बहाना बनाकर बैठक से चली गई, यह कहते हुए कि हम विधानसभा में बोलेंगे।
सीएम ने पूछा कि आरडीजी में भाजपा सरकार के साथ है या नहीं? सीएम ने कहा कि भाजपा इस मुद्दे को लेकर दुविधा में फंसी हुई पार्टी लग रही है। अगर बैठक में आना था, तो इस मामले में अपना स्टैंड क्लीयर करते कि सरकार के साथ हैं या नहीं?
भाजपा नेताओं के लिए प्रदेश हित से बड़ी कुर्सी
मुख्यमंत्री ने कहा कि आरडीजी पर दुविधा में फंसी भाजपा इस स्थिति से बाहर निकलने के लिए बहाने बना रहीी है। सीएम ने पूछा कि भाजपा के लिए प्रदेश हित बड़ा है या कुर्सी हित? आज मामला प्रदेश हित का है, जबकि भाजपा यह सोचकर चल रही है कि कुर्सी हित बड़ा है। यह हिमाचल की जनता के साथ कुठाराघात है। अगर भाजपा उनकी बात सुनती तो पूछते कि आरडीजी के मामले को लेकर भाजपा सरकार के साथ है या नहीं?
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