Recent Posts

Breaking News

HP News: हिमाचल में बनी 71 दवाएं जांच में फेल, 16 कफकोल्ड सिरप के सैंपल भी जांच में फेल


केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की पड़ताल में हिमाचल प्रदेश के दवा उद्योगों में निर्मित 71 दवाएं गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतर पाई हैं। जनवरी 2026 के मासिक ड्रग अलर्ट के अनुसार देशभर में जांचे गए 215 दवा नमूने फेल पाए गए, जिनमें 71 दवाएं हिमाचल प्रदेश में स्थित दवा उद्योगों में बनाई गई थीं। यानी देश में गुणवत्ता परीक्षण में असफल घोषित लगभग हर तीसरी दवा हिमाचल की इकाइयों से संबंधित है। 

बता दें कि केंद्रीय लैबों में जांचे गए 68 नमूनों में 20 दवाएं हिमाचल में बनी पाई गईं, जबकि राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं की जांच में 147 दवाओं में से हिमाचल में निर्मित 51 दवाएं सबस्टैंडर्ड निकली हैं। इन दवाओं का निर्माण मुख्य रूप से बद्दी, बरोटीवाला, नालागढ़ (बीबीएन), झाड़माजरी, सोलन, संसारपुर टैरेस, सिरमौर के कालाअंब, पांवटा साहिब, परवाण, ऊना और कांगड़ा स्थित उद्योगों में हुआ है। जनवरी माह के ड्रग अलर्ट के विश्लेषण में सबसे अधिक मामले बीबीएन फार्मा हब से जुड़े पाए गए, जहां से करीब 38 उत्पाद सामने आए हैं।

इसके अलावा कालाअंब,पांवटा साहिब से लगभग आठ, ऊना से तीन तथा कांगड़ा से दो उत्पाद सूची में शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार दवा सेंपल के फेल होने के कारणों में दवा में सक्रिय तत्व की मात्रा का मानक से कम या अधिक होना, गोली का सही प्रकार से न घुलना, भौतिक गुणवत्ता में कमी, पीएच मान में गड़बड़ी तथा इंजेक्शन में स्टरलिटी फेल शामिल हैं। 

कुछ इंजेक्शनों में पार्टिकुलेट मैटर और क्लैरिटी से संबंधित खामियां भी दर्ज की गई हैं, जिन्हें मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना जा रहा है। फेल पाए गए नमूनों में हाई ब्लड प्रेशर, हृदय व कोलेस्ट्रॉल, एलर्जी, अस्थमा, एंटीबायोटिक, दर्द, बुखार, गैस्ट्रिक, न्यूरोलॉजी, कृमि रोग, कैल्शियम की कमी और बच्चों की खांसी-जुकाम में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। टैबलेट, कैप्सूल, सिरप, सस्पेंशन, ड्रॉप्स, क्रीम, लोशन, इंजेक्शन और आईवी फ्लूड जैसी आम उपयोग की दवाओं में खामियां मिलने के बाद प्रदेश के फार्मा उद्योग पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं।

तीन दवाइयां नकली निकलीं

ड्रग अलर्ट में तीन दवाओं को स्प्यूरियस (नकली) श्रेणी में रखा गया है। ओफ्लॉक्सासिन-ऑर्निडाज़ोल टैबलेट, एजिथ्रोमाइसिन तथा ट्रिप्सिन-काइमोट्रिप्सिन टैबलेट के नमूने जांच में संदिग्ध पाए गए। जिन कंपनियों के नाम दवाओं के लेबल पर दर्ज थे, उन्होंने संबंधित
बैच बनाने या सप्लाई करने से इनकार कर दिया, जिससे बाजार में नकली दवाएं पहुंचने की आशंका जताई गई है।

नोटिस और रिकॉल के आदेश

राज्य दवा नियंत्रक मनीष कपूर ने बताया कि जिन दवाओं के सैंपल गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं, उनसे संबंधित निर्माताओं को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिए गए हैं। फेल पाए गए बैचों को बाजार से तत्काल प्रभाव से रिकॉल करने के निर्देश दिए गए हैं और सभी मामलों की विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है। मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि है, जिससे समझौता नहीं किया जाएगा।

No comments