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क्या होता है ‘एनर्जी लॉकडाउन’? जिसकी दहशत से कांप रही है पूरी दुनिया

मिडिल ईस्ट (Middle East) में बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया को एक नए और खतरनाक संकट के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। इसे ‘एनर्जी लॉकडाउन’ (Energy Lockdown) कहा जा रहा है। हालात इतने गंभीर हैं कि दक्षिण-पूर्व एशियाई देश फिलीपींस ने तो अपने यहाँ ‘राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल’ की घोषणा भी कर दी है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, 2020 के कोविड संकट के बाद यह देश में पहली बार लगा राष्ट्रव्यापी आपातकाल है। फिलीपींस अपनी तेल जरूरतों के लिए पूरी तरह मिडिल ईस्ट पर निर्भर है, इसलिए वहां हड़कंप मचा है। लेकिन सवाल यह है कि क्या भारत पर भी इसका असर होगा?

आखिर क्या होता है यह ‘Energy Lockdown’?

आसान भाषा में समझें तो ‘ऊर्जा आपातकाल’ या ‘एनर्जी लॉकडाउन’ तब लगाया जाता है जब किसी देश की ईंधन सप्लाई (जैसे तेल, गैस और बिजली) पर अचानक कोई बड़ा संकट आ जाए। जब युद्ध या किसी बड़े विवाद के कारण पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई चेन पूरी तरह टूट जाती है, तो देश के पास अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त ईंधन नहीं बचता। ऐसी स्थिति को ही एनर्जी लॉकडाउन कहा जाता है।

कब पैदा होते हैं ऐसे हालात?

एनर्जी लॉकडाउन मुख्य रूप से दो देशों के बीच युद्ध या अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण लगता है। जब सप्लाई रुकती है, तो बाजार में मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ जाता है। इसका सबसे पहला असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ता है, जो आसमान छूने लगती हैं। इसके बाद बिजली उत्पादन ठप होने लगता है, फैक्ट्रियां बंद हो जाती हैं और महंगाई बेकाबू हो जाती है। चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में आयात पर निर्भर है, इसलिए ऐसी स्थिति देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ सकती है।

क्या भारत के लिए भी खतरे की घंटी बज चुकी है?

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (Hormuz Strait) को लेकर है। दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है। अगर युद्ध के कारण यह रास्ता बंद होता है, तो तेल की कीमतें रॉकेट की तरह बढ़ेंगी। भारत अपनी जरूरत का करीब 90% तेल विदेशों से मंगवाता है, जो हमारे लिए बड़ी चुनौती है।

हैरान करने वाली बात यह है कि भारत के पास फिलहाल केवल 9.5 दिनों की जरूरत के बराबर ही रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserve) मौजूद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी हाल ही में लोकसभा में पश्चिम एशिया के युद्ध को एक बड़ी चुनौती बताया है। उन्होंने देशवासियों को आगाह करते हुए कहा है कि हमें कोरोना जैसी किसी भी बड़ी चुनौती से निपटने के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना होगा।

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