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स्मार्ट मीटर से बिजली खरीद में मिलेगी मदद, खपत का सटीक आंकड़ा मिलने से तय होगी डिमांड, खर्च भी होगा कम

हिमाचल प्रदेश में स्मार्ट मीटर व्यवस्था पूरी तरह से लागू होने के बाद बोर्ड को बिजली खरीद में बड़ी मदद मिलेगी। स्मार्ट मीटर से राज्य बिजली बोर्ड को उपभोक्ताओं की बिजली खपत का सटीक और रियल टाइम डेटा मिलेगा। इसी आधार पर भविष्य में बिजली खरीद की डिमांड तय की जाएगी। इससे न केवल बिजली प्रबंधन बेहतर होगा, बल्कि बोर्ड का अनावश्यक खर्च भी कम होने की उम्मीद है। 

हिमाचल में राज्य बिजली बोर्ड हर वर्ष बिजली खरीदता है। खासकर गर्मियों और सर्दियों में खपत बढऩे पर अतिरिक्त बिजली लेनी पड़ती है। पहले मांग का आकलन अनुमान के आधार पर किया जाता था, लेकिन स्मार्ट मीटर से अब हर क्षेत्र की वास्तविक खपत का आंकड़ा सीधे बोर्ड के पास उपलब्ध रहेगा। स्मार्ट मीटर से बिलिंग में पारदर्शिता आएगी और लाइन लॉस व बिजली चोरी पर भी नियंत्रण लगेगा। इससे बोर्ड को होने वाला आर्थिक नुकसान घटेगा।

अधिकारियों का भी मानना है कि जब बोर्ड का कुल खर्च नियंत्रित रहेगा, तो भविष्य में उपभोक्ताओं को सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध करवाने की संभावना भी मजबूत होगी। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में अब 8 लाख 28 हजार, 765 के करीब स्मार्ट मीटर लगा दिए है। 

अगस्त माह तक राज्य में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया पूरी करने का टारगेट रखा गया है। उधर, राज्य बिजली बोर्ड लिमिटेड के प्रबंध निदेशक आदित्य नेगी का भी कहना है कि स्मार्ट मीटर से बोर्ड को भविष्य में बिजली खरीद को लेकर भी मदद मिलेगी। इनके जरिए बिजली खपत का स्टीक आंकड़ा बोर्ड को मिलेगा। साथ ही स्मार्ट मीटर से बिजली बोर्ड के खर्चे भी कम होंगे।

उपभोक्ताओं को फायदा

स्मार्ट मीटर से उपभोक्ता अपनी खपत पर नजर रख सकेंगे और जरूरत के अनुसार बिजली का उपयोग कर पाएंगे। प्रदेश में स्मार्ट मीटर परियोजना को बिजली व्यवस्था में सुधार, पारदर्शिता और वित्तीय संतुलन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

और मजबूत होगा प्रबंधन

स्मार्ट मीटर के जरिए दैनिक, साप्ताहिक और मासिक खपत की पूरी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी। किसी भी क्षेत्र में अचानक लोड बढऩे की स्थिति में बोर्ड तुरंत निर्णय ले सकेगा। ओवरलोड, अनियोजित कटौती और तकनीकी नुकसान में भी कमी आएगी।

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