कहानी रिंकू सिंह राही की... 16 बार दिया पेपर तब बने थे IAS, अब इस्तीफा देकर फिर से बनना चाहते हैं PCS
उत्तर प्रदेश कैडर के 2023 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही ने शासन को अपना 7 पन्नों का तकनीकी त्यागपत्र सौंप दिया है. रिंकू राही का यह कदम प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि उन्होंने यह इस्तीफा किसी निजी लाभ या राजनीति में जाने के लिए नहीं, बल्कि काम न मिलने और नैतिकता के आधार पर दिया है.
'काम नहीं तो वेतन नहीं'
रिंकू सिंह राही वर्तमान में राजस्व परिषद में तैनात हैं. उनका आरोप है कि पिछले कुछ महीनों से सरकार उनसे कोई काम नहीं ले रही है. उन्होंने अपने त्यागपत्र में स्पष्ट किया है कि जब वह एक पब्लिक सर्वेंट होकर जनता की सेवा ही नहीं कर पा रहे हैं तो उन्हें जनता के टैक्स से मिलने वाली सैलरी लेने का कोई अधिकार नहीं है. इससे पहले उन्होंने नो वर्क नो पे के सिद्धांत पर वेतन लेने से भी मना कर दिया था जिससे राजस्व परिषद के अधिकारियों में हड़कंप मच गया था.
16 प्रयासों के बाद बने थे IAS, शरीर पर झेल चुके हैं 7 गोलियां
रिंकू सिंह राही का संघर्ष किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. 2009 में वह मुजफ्फरनगर में जिला समाज कल्याण अधिकारी (PCS रैंक) के पद पर तैनात थे. वहां जॉइन करने के मात्र 4 महीने के भीतर उन्होंने 100 करोड़ से ज्यादा का घोटाला पकड़ा था. इसी ईमानदारी की कीमत उन्हें चुकानी पड़ी. घोटालेबाजों ने उन पर उस समय हमला किया जब वह बैडमिंटन खेल रहे थे. उन्हें 7 गोलियां मारी गई थीं, जिससे उनकी एक आंख खराब हो गई और वह स्थायी रूप से दिव्यांग हो गए. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और 16 बार परीक्षा देने के बाद 2023 में आईएएस बनने का सपना पूरा किया.
क्या है तकनीकी त्यागपत्र और आगे की राह?
रिंकू राही ने तकनीकी त्यागपत्र इसलिए दिया है क्योंकि नियम के तौर पर अगर कोई अधिकारी नई सेवा (IAS) में 3 साल पूरे होने से पहले इस्तीफा देता है, तो वह अपने मूल कैडर (PCS) में वापस जाने की मांग कर सकता है. उन्होंने अक्टूबर 2025 में ही पत्र लिखकर वापस पीसीएस बनाए जाने का अनुरोध किया था. उनका कहना है कि आईएएस के तौर पर वह अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को उस तरह पूरा नहीं कर पा रहे हैं जैसा उन्हें करना चाहिए. इसलिए वह वापस पीसीएस बनकर ही जनसेवा करना चाहते हैं.
क्या वो राजनीति में आएंगे?
अक्सर देखा जाता है कि इस्तीफा देने वाले अधिकारी राजनीति का रुख करते हैं, लेकिन रिंकू राही ने स्पष्ट किया है कि वह नौकरी में ही रहना चाहते हैं. उनका मकसद राजनीति करना नहीं बल्कि उस वेतन को न्यायोचित ठहराना है जो उन्हें मिलता है. वह चाहते हैं कि उन्हें ऐसा काम दिया जाए जिससे वह संविधान की शपथ और जनसेवा के संकल्प को पूरा कर सकें.
अब आगे क्या होगा?
चूंकि वह एक आईएएस अधिकारी हैं, इसलिए उनका इस्तीफा अब उत्तर प्रदेश सरकार के माध्यम से भारत सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को भेजा जाएगा. गृह मंत्रालय के अधीन आने वाला यह विभाग इस्तीफे की तकनीकी बारीकियों की जांच करेगा. इसके बाद ही तय होगा कि उनका त्यागपत्र स्वीकार किया जाता है या उन्हें वापस पीसीएस कैडर में भेजा जाता है. फिलहाल वह उत्तर प्रदेश की नौकरशाही का हिस्सा बने हुए हैं.
No comments