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महाभारत जैसा विवाह युद्ध : तलाक के केस में 90 FIR… सुप्रीम कोर्ट ने तोड़ी 16 साल पुरानी शादी, पत्नी को मिलें दोनों बच्चे

Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को 10 साल पुराने एक तलाक के केस का फैसला सुनाते हुए विवाह को समाप्त कर दिया है। इस फैसले में कोर्ट ने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल किया है। यह मामला बेहद जटिल और विवादास्पद था, जिसे कई लोग ‘महाभारत जैसे युद्ध’ के रूप में भी देख रहे हैं।

इस मुकदमे में दावा किया गया था कि दंपति की शादी 2010 में हुई थी, और उनके दो बेटे हैं। दोनों के बीच विवाद 2016 से शुरू हुआ जब दोनों अलग रहने लगे। महिला का आरोप था कि पति ने सभी जिम्मेदारियां छोड़ दी हैं और वह अपने वित्तीय उत्तरदायित्व से बचने के लिए तरह-तरह के कदम उठा रहा है। महिला का कहना था कि पति कई कंपनियों में डायरेक्टर था, लेकिन बाद में उसने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया, ताकि वह अपनी जिम्मेदारियों से बच सके।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पति के वर्ताव की कड़ी आलोचना की। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि पति ने अपनी कानूनी विशेषज्ञता का दुरुपयोग कर मुकदमे में जानबूझकर देरी कराई। कोर्ट ने पाया कि पति ने अपनी वकील पत्नी को परेशान करने के लिए अलग-अलग जगहों पर 9 मुकदमे दर्ज कराए। साथ ही, पत्नी की ओर से पेश वकीलों को डराने-धमकाने का प्रयास किया।

कोर्ट ने कहा कि पति का यह व्यवहार न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने वाला है। इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी माना कि पति ने अपनी वित्तीय असमर्थता का दावा कर नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी से भागने का प्रयास किया है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस केस का अंत करने के लिए आर्टिकल 142 का इस्तेमाल किया और विवाह को ‘अपरिवर्तनीय तौर पर टूट जाने’ का आधार मानते हुए समाप्त कर दिया। कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि:

  • दोनों बेटों की कस्टडी उनकी मां के पास रहेगी।
  • पिता के पास दोनों बेटों से मिलने का अधिकार रहेगा।
  • पति को एक साल के अंदर 5 करोड़ रुपये की रकम एकमुश्त पत्नी को देना होगा।
  • पत्नी यह अंडरटेकिंग देगी कि 5 करोड़ रुपये मिलते ही ससुर का 3BHK फ्लैट (मुंबई के लोखंडवाला में) दो हफ्ते के भीतर शांति से खाली कर देगी।
  • पति को यह अंडरटेकिंग देना होगा कि वह पत्नी, उनके रिश्तेदारों और वकीलों के खिलाफ अब कोई मुकदमा कहीं भी नहीं करेगा।

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