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‘कुछ स्वार्थी लोगों ने हमें भी छोड़ा’, AAP से 7 सांसदों के बगावत पर अखिलेश यादव बोले- ‘दुख की बात है..’

लखनऊ: आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस पूरे घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव की प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक राजनीति के लिए “दुखद” बताया और साथ ही केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप भी लगाए।

अखिलेश यादव ने कहा- नेताओं का पार्टी छोड़ना बेहद दुखद

अखिलेश यादव ने कहा कि किसी भी राजनीतिक पार्टी का टूटना और नेताओं का पार्टी छोड़ना बेहद दुखद होता है। उन्होंने कहा कि पार्टियां कार्यकर्ताओं और नेताओं की मेहनत से बनती हैं और जनता के समर्थन से सत्ता तक पहुंचती हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि पहले भी उनकी पार्टी से कुछ नेताओं ने स्वार्थ और लालच के चलते अलग रास्ता चुना था। अखिलेश यादव ने कहा, “कुछ स्वार्थी लोगों ने लालच की वजह से हमें भी छोड़ा था।”

BJP पर एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप

सपा प्रमुख ने भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार ईडी, सीबीआई और इनकम टैक्स जैसी एजेंसियों का गलत इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव और जांच एजेंसियों के डर से कई नेता पार्टी छोड़ने को मजबूर होते हैं।

अखिलेश यादव ने कहा कि आज की राजनीति में “स्वार्थ, पैसा और कारोबार” प्रमुख हो गया है, लेकिन इसके खिलाफ लड़ाई केवल गरीब और आम जनता ही लड़ सकती है।

हाल ही में आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसदों ने पार्टी छोड़कर BJP का दामन थाम लिया। इनमें राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत सिंह साहनी और स्वाति मालीवाल के नाम शामिल हैं।

इन नेताओं के पार्टी छोड़ने से AAP के भीतर बड़ा राजनीतिक संकट खड़ा हो गया है। बताया जा रहा है कि 10 में से 7 राज्यसभा सांसद अब बीजेपी के साथ हैं, जिससे पार्टी की राज्यसभा में स्थिति कमजोर हो गई है।

राघव चड्ढा को हाल ही में AAP ने राज्यसभा में उप नेता के पद से हटा दिया था, जिसके बाद उन्होंने पार्टी छोड़ने का ऐलान किया। उनके साथ कई अन्य सांसदों ने भी पार्टी छोड़ दी, जिससे यह घटनाक्रम और गंभीर हो गया।

इस पूरे मामले को लेकर विपक्ष लगातार सरकार और सत्ताधारी दल पर निशाना साध रहा है। वहीं, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम आने वाले समय में देश की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत हो सकता है।

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