हिमाचल में भू-स्खलन से पहले अलर्ट होंगे लोग, एनआईटी के स्टूडेंट्स ने बनाया लैंड स्लाइड अलर्ट सिस्टम

हिमाचल समेत देश के अन्य पहाड़ी राज्यों में पिछले कुछ वर्षों से बरसात के मौसम में लैंडस्लाइड जैसी घटनाओं के कारण हो रहे भारी नुकसान को देखते हुए एनआईटी हमीरपुर के स्टूडेंट्स ने ऐसा प्रोजेक्ट तैयार किया है, जो ऐसी घटनाओं की जानकारी पहले ही दे देगा। यानि रिहायशी इलाकों की पहाडिय़ों में कहां और किस वजह से भू-स्खलन हो सकता है इसकी जानकारी पहले ही पता लगाई जा सकती है।
दरअसल एनआईटी हमीरपुर के इलेक्ट्रिकल इंजीनियर सेकेंड ईयर के छात्र-छात्राओं ने ‘लैंड स्लाइड अलर्ट सिस्टम’ का एक प्रोजेक्ट तैयार किया है जिसे पिछले दिनों संस्थान के निंबस कार्यक्रम में प्रदर्शित किया गया।
प्रोजेक्ट तैयार करने वाले स्टूडेंट्स के अनुसार बरसात के मौसम में पहाड़ी राज्यों में लैंड स्लाइड की घटनाएं अधिक होती है। कई बार पूरे के पूरे गांव इसकी चपेट में आ जाते हैं जिससे जानमाल का नुकसान होता है तो कई बार छोटी सडक़ों से लेकर बड़े हाई-वे और पुल ढहने से करोड़ों की संपदा पल में बह जाती है जिससे प्रदेश पर आर्थिक बोझ भी पड़ता है।
लैंड स्लाइड का कारण कई बार जमीन के अंदर पानी की काफी अधिकतता तो कई बार भूमि के अंदर ईयर गैप हो जाने से वहां की मिट्टी कमजोर पड़ जाती है जो लैंड स्लाइड की वजह बनती है। ‘लैंड स्लाइड अलर्ट सिस्टम’ ऐसा प्रोजेक्ट होगा जिसमें इलेक्ट्रोन के ग्रिड जमीन के अंदर ऐसे पहाड़ी क्षेत्रों में लगाए जाएंगे जहां भू-स्खलन की घटनाओं की ज्यादा संभावना रहती है या फिर बार-बार भू-स्खलन हो रहा हो। ये ग्रिड जमीन के अंदर होने वाली हर एक्टिविटी की रिपोर्ट देंगे जिससे पहले ही पता लग सकेगा कि यह क्षेत्र डेंजर जोन बनने वाला है। ऐसे में वहां पहले ही एहतियात बरती जा सकती है। ग्रिड जितना पुराना होगा उतनी ही उसकी एकुरेसी परफेक्ट होती जाएगी।
अभी सेटेलाइड से करते हैं मेजर
इलेक्ट्रिक इंजीनियर विंग के स्टूडेंट्स के अनुसार अभी मौजूदा समय में सेटेलाइट के माध्यम से ऐसी घटनाओं को मेजर करने का प्रयास किया जाता है जो कि न तो इफेक्टिव है न ही बहुत अधिक एकुरेट। वो प्रोपर रिकॉर्ड नहीं कर पाता जिससे अवेयरनेस नहीं हो पाती। लेकिन ‘लैंड स्लाइड अलर्ट सिस्टम’ पूरी परफेक्शन के साथ काम करेगा।
पांच जिले अधिक संवेदनशील
कुल्लू-मंडी, कांगड़ा, चंबा और शिमला ऐसे जिले हैं, जो लैंडस्लाइड के लिहाज से काफी संवेदनशील हैं। हर साल बरसात में यहां लैंड स्लाइड की घटनाएं होती हैं, जिससे आर्थिक नुकसान के साथ जानी नुकसान भी होता है। घर, गोशालाएं ध्वस्त होते हैं।
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