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मरने से पहले ही बना दिया मृत…फर्जी डेथ सर्टिफिकेट से जमीन हड़पने का खेल, पंचायत सचिव समेत 6 पर केस

Mainpuri : किशनी थाना क्षेत्र के ग्राम बसैत निवासी सुनील किशोर ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए बताया कि उनकी खरीदी हुई जमीन को हड़पने के लिए सुनियोजित तरीके से फर्जीवाड़ा किया गया। पीड़ित ने कई लोगों पर जालसाजी, धोखाधड़ी और साजिश रचने का आरोप लगाते हुए ग्राम पंचायत सचिव सहित 6 लोगों के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। यह मुकदमा पुलिस अधीक्षक को दी गई शिकायत और उसके बाद की गई विशेष जांच के बाद दर्ज किया गया।

संपत्ति हड़पने की रची गई साजिश

पीड़ित सुनील किशोर ने बताया कि उन्होंने अपने सगे भाई नवल किशोर से वर्ष 2004, 2006 और 2009 में भोगांव तहसील में विधिवत बैनामा कराकर जमीन और मकान खरीदा था। लेकिन 22 नवंबर 2009 को नवल किशोर की मृत्यु के बाद, आरोप है कि उनके परिजनों और गांव के कुछ लोगों ने मिलकर संपत्ति हड़पने की साजिश रच डाली।

फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र से जमीन अपने नाम कराने का आरोप

पीड़ित का आरोप है कि नवल किशोर के पुत्र नितिन कुमार और शिवम कुमार, पत्नी किरन कुमारी के साथ गांव के उपेंद्र जाटव, कुँवरपाल और ग्राम पंचायत सचिव अर्जित यादव ने मिलकर वर्ष 2004 का फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र बनवा लिया, जबकि वास्तविक मृत्यु वर्ष 2009 में हुई थी। इसी फर्जी दस्तावेज के आधार पर तहसील किशनी के तहसीलदार न्यायालय में पेशी कर, पीड़ित के बैनामे को फर्जी साबित कर उनकी खरीदी हुई जमीन को अपने नाम दर्ज करा लिया गया और वाद की फाइल कमिश्नरी भेज दी गई।

मृत्यु के बाद कैसे लिया गया लोन?

सुनील किशोर ने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य भी प्रस्तुत किए। उनका कहना है कि नवल किशोर ने वर्ष 2006 में उत्तर प्रदेश सरकारी ग्राम्य विकास बैंक, किशनी से 20 हजार रुपये का ऋण लिया था, जो अब बढ़कर करीब 1.59 लाख रुपये हो चुका है। यह ऋण अब तक अदा नहीं किया गया है और बैंक लगातार नोटिस भेज रहा है।

मृतक 2007 में गया था जेल

पीड़ित ने बताया कि वर्ष 2007 में नवल किशोर के खिलाफ विद्युत कर्मचारी से मारपीट के मामले में किशनी थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था, जिसमें वे अदालत में पेश होकर 8 दिन जेल में रहे थे।

मृत्यु के बाद लेनदेन और वाहन खरीद

पीड़ित के अनुसार, नवल किशोर वर्ष 2000 से 2008 तक सहकारी समिति बसैत से खाद-बीज का लेनदेन करते रहे और वर्ष 2009 में टाटा कंपनी का ‘छोटा हाथी’ वाहन फाइनेंस पर खरीदा था। उनकी मृत्यु के बाद दो किस्तें जमा करने के बाद बीमा के तहत पूरा लोन माफ कर वाहन उनकी पत्नी के नाम कर दिया गया।

अधिकारियों ने नहीं सुनी फरियाद

पीड़ित ने आरोप लगाया कि जब उन्हें फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र की जानकारी हुई, तो उन्होंने विकास खंड अधिकारी, उपजिलाधिकारी और तहसीलदार किशनी को शिकायती पत्र दिया तथा आईजीआरएस के माध्यम से भी शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पुलिस ने दर्ज की एफआईआर

पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक को शिकायत दी, जिसके बाद मामले की जांच सीओ भोगांव को सौंपी गई। कई महीनों की जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

फर्जी दस्तावेज से पीड़ित परेशान

आरोप है कि फर्जी मृत्यु प्रमाणपत्र के आधार पर न केवल सरकारी अभिलेखों से छेड़छाड़ की गई, बल्कि न्यायालय को भी गुमराह कर जमीन पर कब्जा करने की कोशिश की गई। मामला अब आगरा कमिश्नरी तक पहुंच चुका है। पीड़ित ने निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

धरने पर उतरे पंचायत सचिव

पंचायत सचिव के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद सचिव संगठन और अन्य पंचायत सचिव उनके समर्थन में धरना-प्रदर्शन कर अधिकारियों को ज्ञापन सौंप रहे हैं।

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