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Census 2027: लिव-इन में रहने वालों की कैसे होगी जनगणना, उनसे क्या-क्या पूछे जाएंगे सवाल?

New Delhi : भारत में डिजिटल क्रांति के बीच अब देश की तस्वीर और तकदीर बदलने वाली ‘जनगणना 2027’ का आगाज होने जा रहा है। केंद्र सरकार ने इस महा-अभियान को दो चरणों में पूरा करने का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है, जिसका पहला चरण शुरू हो गया  है। 30 सितंबर 2026 तक चलने वाले इस पहले चरण में कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे, लेकिन इस बार सबसे ज्यादा चर्चा उस नियम की हो रही है जो ‘लिव-इन रिलेशनशिप’ में रहने वाले जोड़ों के भविष्य से जुड़ा है।

सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर कोई कपल बिना फेरे या निकाह के एक ही छत के नीचे रह रहा है, तो जनगणना के आंकड़ों में उनकी स्थिति क्या होगी। जनगणना से जुड़ी आधिकारिक वेबसाइट के ‘अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न’ (FAQ) सेक्शन में एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने सोशल मीडिया से लेकर गलियारों तक बहस छेड़ दी है। पोर्टल पर साफ तौर पर पूछा गया कि क्या लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को विवाहित माना जाएगा? इसके जवाब में सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई कपल अपने रिश्ते को एक ‘स्थिर बंधन’ (Stable Relationship) मानता है, तो उन्हें शादीशुदा की श्रेणी में ही गिना जाएगा। सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसके लिए किसी मैरिज सर्टिफिकेट या सबूत की जरूरत नहीं होगी, बल्कि कपल द्वारा दिया गया खुद का बयान ही अंतिम आधार माना जाएगा।

अधिकारियों ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी और सरल बनाने के लिए साफ निर्देश दिए हैं। चाहे आप खुद ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज कर रहे हों या जनगणना कर्मी (Enumerator) आपके घर आकर डेटा ले रहे हों, दोनों ही स्थितियों में जोड़े की ‘सेल्फ-डिक्लेरेशन’ को ही सर्वोपरि माना जाएगा। यदि कोई युगल यह दावा करता है कि वे एक स्थिर रिश्ते में हैं, तो उन्हें जनगणना के रिकॉर्ड में ‘विवाहित’ श्रेणी के कॉलम में ही जगह दी जाएगी। हालांकि, जानकारों का कहना है कि यह परंपरा पिछली जनगणनाओं में भी अनौपचारिक रूप से मौजूद थी, लेकिन यह पहली बार है जब सरकार ने सार्वजनिक रूप से इस पर स्पष्ट गाइडलाइन जारी कर भ्रम की स्थिति खत्म की है. 

जनगणना 2027 कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाली है। पहली बार आम जनता को यह सुविधा दी गई है कि वे खुद सरकार के ‘सेल्फ-एन्युमरेशन’ पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी डिजिटल रूप से दर्ज कर सकें। 1 अप्रैल से शुरू हो रहा पहला चरण मुख्य रूप से ‘हाउस लिस्टिंग और हाउसिंग जनगणना’ पर केंद्रित होगा।

इस दौरान पूछे जाने वाले 33 सवालों के जरिए देश में घरों की स्थिति, बुनियादी सुविधाओं और संसाधनों का सटीक डेटा जुटाया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन आंकड़ों के आधार पर ही भविष्य की जनकल्याणकारी योजनाओं का ढांचा तैयार किया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में जनसंख्या की सघनता और अन्य व्यक्तिगत विवरणों पर काम शुरू होगा।

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