खाते में आया सिर्फ 1 रुपया और घर पहुंच गया इनकम टैक्स का नोटिस! भूलकर भी न करें ये 7 ट्रांजैक्शन, वरना फंस जाएंगे बुरी तरह..
इसके तहत अगर कोई भी खाताधारक अपने सेविंग अकाउंट में एक तय सीमा से ज्यादा का लेन-देन करता है, तो बैंक बिना देर किए इसकी जानकारी खुद टैक्स डिपार्टमेंट को भेज देता है। कई बार लोगों को लगता है कि ऑनलाइन या कैश में थोड़ा-बहुत ज्यादा पैसा घुमाने से क्या ही फर्क पड़ेगा, लेकिन टैक्स नियमों की यह अनदेखी आपको बहुत बड़ी मुसीबत में डाल सकती है। आइए जानते हैं उन 7 बड़े ट्रांजैक्शंस के बारे में, जिन पर आपको भूलकर भी लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए।
सेविंग अकाउंट में भारी कैश जमा करने की गलती
आयकर नियमों को लेकर अक्सर लोग बेफिक्र रहते हैं, लेकिन यह गलती भारी पड़ सकती है। यदि आप एक वित्तीय वर्ष के भीतर अपने किसी एक या एक से अधिक सेविंग अकाउंट में कुल मिलाकर ₹10 लाख या उससे अधिक की नकदी जमा करते हैं, तो बैंक इसकी रिपोर्ट तुरंत टैक्स विभाग को सौंप देता है। भले ही वह पैसा आपकी अपनी मेहनत की लीगल कमाई का हो, लेकिन लिमिट पार होते ही आपको उस पैसे का सोर्स साबित करने के लिए विभाग का नोटिस आ सकता है।
बड़ी मात्रा में कैश विड्रॉल यानी निकासी पर भी नजर
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि अपने ही खाते से पैसा निकालने पर कोई पाबंदी नहीं है, लेकिन सिर्फ कैश जमा करना ही नहीं, बल्कि खाते से भारी मात्रा में कैश निकालना भी टैक्स विभाग को चौकन्ना कर देता है। एक साल में अपने सेविंग अकाउंट से ₹10 लाख से ज्यादा की नकदी निकालने पर बैंक को इसकी सूचना विभाग को देनी पड़ती है। इसके अलावा, एक तय सीमा से ज्यादा कैश निकालने पर टीडीएस कटने का भी कड़ा नियम है।
क्रेडिट कार्ड बिल का भारी कैश पेमेंट पड़ेगा महंगा
अगर आप धड़ल्ले से क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं और उसका बिल चुकाने के लिए कैश का रास्ता चुनते हैं, तो अब सावधान हो जाएं। यदि आप साल भर में अपने क्रेडिट कार्ड के बिल का भुगतान करने के लिए ₹1 लाख या उससे अधिक का कैश जमा करते हैं, तो यह ट्रांजैक्शन सीधे रडार पर आ जाता है। वहीं, अगर आप ऑनलाइन या चेक के जरिए भी साल में ₹10 लाख से ज्यादा का क्रेडिट कार्ड बिल भरते हैं, तो टैक्स विभाग आपकी कमाई और खर्च का मिलान करने के लिए आपसे जवाब मांग सकता है।
फिक्स्ड डिपॉजिट में मोटा कैश इन्वेस्टमेंट करने से बचें
फिक्स्ड डिपॉजिट यानी एफडी कराना आज भी सुरक्षित निवेश का सबसे पसंदीदा तरीका है। लेकिन अगर आप एक साल में ₹10 लाख या उससे ज्यादा की एफडी कैश जमा करके खुलवाते हैं, तो यह सीधे इनकम टैक्स की नजर में आ जाता है। ऐसे में टैक्स विभाग आपसे यह तीखा सवाल कर सकता है कि इस मोटी एफडी को कराने के लिए आपके पास इतना सारा कैश आखिर कहाँ से आया।
शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या डिबेंचर्स में बड़ा निवेश
म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार या बॉन्ड्स में पैसा लगाना आज के युवाओं में काफी पॉपुलर है। लेकिन निवेश के इस उत्साह में नियम मत भूलिए। अगर आप एक साल के अंदर इन जगहों पर निवेश करने के लिए ₹10 लाख या उससे अधिक का ट्रांजैक्शन करते हैं, तो इसकी जानकारी सीधे SFT के जरिए टैक्स अधिकारियों तक पहुंच जाती है। ऐसे मामलों में विभाग यह देखता है कि क्या आपकी घोषित सालाना आय इस बड़े निवेश से मेल खाती है या नहीं।
अचल संपत्ति यानी प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त पर सख्त नजर
जब भी आप कोई प्लॉट, फ्लैट या मकान खरीदते या बेचते हैं और उसकी रजिस्ट्री की कीमत ₹30 लाख या उससे अधिक होती है, तो सब-रजिस्ट्रार इसकी जानकारी तुरंत आयकर विभाग को फॉरवर्ड कर देता है। यदि आपने कोई बड़ी प्रॉपर्टी खरीदने के लिए अपने सेविंग अकाउंट से भारी-भरकम अमाउंट ट्रांसफर किया है, लेकिन आपके इनकम टैक्स रिटर्न में उतनी कमाई नहीं दिखाई देती, तो आपके घर नोटिस आना बिल्कुल तय है।
विदेशी मुद्रा की खरीद भी ला सकती है आफत
अगर आप विदेश यात्रा पर घूमने जा रहे हैं या किसी अन्य काम की वजह से एक साल के भीतर ₹10 लाख या उससे अधिक मूल्य की विदेशी मुद्रा यानी फॉरेन करेंसी खरीदते हैं, या फिर अपने ट्रेवल कार्ड और फॉरेक्स कार्ड में इतना पैसा लोड करवाते हैं, तो इस पर भी सरकार की नजर रहती है। इस तरह के बड़े ट्रांजैक्शन की रिपोर्ट भी बैंक सीधे टैक्स डिपार्टमेंट को सौंप देता है, जिससे आपकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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