प्रशांत किशोर ने छोड़ा आलीशन घर… अगले बिहार चुनाव तक आश्रम में रहेंगे, महिलाओं से बोले- ‘10 हजार में वोट मत बेचिए’.

दरभंगा, बिहार। प्रशांत किशोर ने बिहार की राजनीति में बड़ा संदेश देते हुए अपना पटना वाला आवास छोड़ दिया है। जन सुराज प्रमुख ने घोषणा की है कि अब वह अगले पांच वर्षों तक आश्रम में रहेंगे और वहीं से पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों का संचालन करेंगे।
बिहार विधानसभा चुनाव 2026 में मिली हार के बाद प्रशांत किशोर ने यह बड़ा फैसला लिया है। उन्होंने बताया कि वह अब बिहार नवनिर्माण आश्रम में रहेंगे, जो IIT-पटना के पास स्थित है।
‘अब आश्रम ही मेरा घर’
दरभंगा में मीडिया से बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्होंने 19 मई की रात को ही पटना स्थित अपना आवास खाली कर दिया। उन्होंने कहा, “अब अगले पांच साल तक बिहार नवनिर्माण आश्रम ही मेरा घर होगा। यहीं रहकर जन सुराज के संगठन को मजबूत करेंगे और बिहार के लिए काम करेंगे।”
उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले विधानसभा चुनाव तक जन सुराज बिहार की राजनीति में मजबूत और सकारात्मक विकल्प के रूप में उभरेगी।
शेखपुरा हाउस से चल रही थीं गतिविधियां
अब तक प्रशांत किशोर पटना एयरपोर्ट के पास स्थित ‘शेखपुरा हाउस’ से पार्टी की गतिविधियां संचालित कर रहे थे। यह आवास जन सुराज के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व सांसद उदय सिंह का बताया जाता है।
फिर नीतीश कुमार पर साधा निशाना
प्रशांत किशोर ने इस दौरान बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिन्हें जनता ने मुख्यमंत्री बनाया, वे भी बिहार से पलायन की समस्या खत्म नहीं कर सके। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार के विकास की जगह नेताओं ने सिर्फ अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने का काम किया।
जनता से की खास अपील
जन सुराज प्रमुख ने बिहार की जनता, खासकर महिलाओं से अपील करते हुए कहा कि वोट जाति, धर्म या पैसों के आधार पर नहीं बल्कि अपने और अपने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखकर देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जनता को किसी नेता के प्रभाव या पैसों के लालच में आकर वोट नहीं देना चाहिए। प्रशांत किशोर की यह टिप्पणी राज्य सरकार की महिला सहायता योजनाओं को लेकर भी अहम मानी जा रही है।
2031 चुनाव की तैयारी में जुटे प्रशांत किशोर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आश्रम में रहने का फैसला केवल निजी बदलाव नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश भी है। प्रशांत किशोर खुद को जमीन से जुड़ा नेता दिखाने और लंबी राजनीतिक लड़ाई के लिए संगठनात्मक तैयारी में जुटे दिखाई दे रहे हैं।
अब देखना होगा कि जन सुराज आने वाले वर्षों में बिहार की राजनीति में कितना प्रभाव छोड़ पाती है।
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