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13 साल से जंजीरों में बंधा कारगिल का योद्धा… युद्ध में दुश्मन की गोली खाने के बाद खुद की ही सेना ने कर दिया कोर्ट मार्शल

नई दिल्ली। कारगिल युद्ध में घायल हुए झूंझुनूं जिले के बलोदा गांव के राजपूत राइफल जवान शंकर सिंह की दर्दनाक कहानी सामने आई है। युद्ध के दौरान दुश्मन की गोलियों से घायल होने के बाद शंकर सिंह मानसिक रूप से बीमार हो गए और 13 साल तक अपने ही परिवार द्वारा जंजीरों में बांधकर रखा गया। उन्हें इलाज और सेना से मदद के बजाय कोर्ट मार्शल का सामना करना पड़ा।

जानकारी के अनुसार, कारगिल युद्ध में घायल होने के बाद शंकर सिंह अपने साथियों से बिछड़ गए थे और गोलियों के छर्रों के कारण बेहोश होकर पहाड़ियों में एक सप्ताह तक पड़े रहे। इसके बाद उन्हें छुट्टी पर भेजा गया, लेकिन आठ दिन की छुट्टी के दौरान वह ठीक नहीं हो पाए। उनकी अनुपस्थिति में बिना स्थिति को समझे सेना ने उन्हें कोर्ट मार्शल कर दिया।

मानसिक रूप से विक्षिप्त होने के कारण शंकर सिंह को परिवार को मजबूरी में जंजीरों में बांधकर रखना पड़ा। परिवार ने इलाज में अपनी जमा पूंजी खर्च कर दी, लेकिन पर्याप्त मदद नहीं मिल सकी। उनकी पत्नी कमोद सिंह ने बार-बार प्रशासन और सेना से सहायता की गुहार लगाई।

स्थानीय लोग और सामाजिक संगठन पूर्व सैनिक को बेहतर चिकित्सा सुविधा, पेंशन और आर्थिक सहायता देने की मांग कर रहे हैं। ऑल इंडिया एक्ससर्विसमैन सोसायटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता धर्मपाल चौधरी ने कहा कि यह मामला अपवाद है और शंकर सिंह के परिवार में कोई पढ़ा-लिखा नहीं था, जबकि मानसिक रोग से पीड़ित शंकर सिंह अपना पक्ष नहीं रख पाए। उन्होंने आश्वासन दिया कि उनके समर्थन में न्यायालय से इंसाफ दिलाने का प्रयास किया जाएगा।

शंकर सिंह पिछले 27 वर्षों से मानसिक रूप से बीमार हैं। उनका परिवार लगातार आर्थिक और मानसिक संकट में जी रहा है। सेना और सरकारी अस्पतालों से कोई ठोस मदद न मिलने के कारण उनका जीवन अत्यंत कठिनाई में बीत रहा है। इस दर्दनाक स्थिति के बावजूद अभी तक उनकी हालत सुधारने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

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