फिर फंसे अरविंद केजरीवाल, अब ‘जय भीम’ कोचिंग योजना में 38 करोड़ का घोटाला, ACB ने 9 संचालकों को किया गिरफ्तार..

दिल्ली। दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार के कार्यकाल में गरीब और मेधावी छात्रों को मुफ्त कोचिंग उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना में बड़े पैमाने पर घोटाले का खुलासा हुआ है। ‘जय भीम’ कोचिंग योजना में करीब 38 करोड़ रुपये के इस कथित फर्जीवाड़े में भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने 9 कोचिंग संचालकों को गिरफ्तार किया है।
एसीबी की कार्रवाई, कोर्ट ने भेजा तिहाड़
गिरफ्तार सभी आरोपियों को गुरुवार को राऊज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें तिहाड़ जेल भेज दिया गया। इस मामले में जांच पिछले साल अगस्त में तत्कालीन उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के निर्देश पर शुरू हुई थी। करीब आठ महीने की जांच के बाद यह बड़ी कार्रवाई सामने आई है।
बड़े कोचिंग संस्थानों पर शिकंजा
गिरफ्तार आरोपियों में दिल्ली के प्रमुख कोचिंग संचालक शामिल हैं, जिनमें मुखर्जी नगर के रवींद्र इंस्टीट्यूट के निदेशक रवींद्र कुमार, रोहिणी के तक्षशिला इंस्टीट्यूट के नरेंद्र कुमार गुप्ता, किरण इंस्टीट्यूट के शंभू शरण और परिणाम इंस्टीट्यूट के दिग्विजय कुमार प्रमुख हैं। इन संस्थानों की राजधानी में कई शाखाएं संचालित हैं।
फर्जी दाखिले और अवैध आउटसोर्सिंग
जांच में सामने आया है कि कुछ संस्थानों ने योजना के तहत कोचिंग देने का काम अवैध रूप से छोटे ट्यूशन सेंटरों को सौंप दिया। करावल नगर, यमुना विहार और कर्दमपुरी स्थित ऐसे तीन ट्यूशन सेंटरों के संचालकों को भी गिरफ्तार किया गया है।
इसके अलावा, रोहिणी सेक्टर-20 स्थित ‘पहल’ नामक एनजीओ, जिसे योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी दी गई थी, उस पर भी अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। एसीबी ने एनजीओ के निदेशक जितेंद्र कुमार को भी हिरासत में लिया है।
38 करोड़ का फर्जी बिल
जांच एजेंसियों के अनुसार, इस योजना के तहत दिल्ली के 46 कोचिंग संस्थानों के साथ करार किया गया था, लेकिन कई संस्थानों ने फर्जी तरीके से छात्रों के नाम पर बिल बनाकर सरकार से करोड़ों रुपये हासिल कर लिए।
आरोप है कि आय प्रमाण पत्रों को फर्जी तरीके से तैयार कर उन पर एसडीएम की मुहर लगाई गई और ऐसे छात्रों के नाम पर भुगतान लिया गया, जो वास्तव में कोचिंग में पढ़ ही नहीं रहे थे। कई मामलों में एक ही छात्र के नाम पर अलग-अलग संस्थानों ने दावा पेश किया।
और भी गिरफ्तारी संभव
सूत्रों के मुताबिक, जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, और भी कोचिंग संचालकों व संबंधित अधिकारियों पर शिकंजा कस सकता है। एसीबी ने संकेत दिए हैं कि यह घोटाला और बड़ा हो सकता है।
क्या है ‘जय भीम’ योजना
अरविंद केजरीवाल सरकार ने इस योजना की शुरुआत दिसंबर 2017 में की थी। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को यूपीएससी, जेईई, नीट, बैंकिंग और रेलवे जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त कोचिंग उपलब्ध कराना था।
- साल 2018-19 में करीब 5,000 छात्रों ने नामांकन कराया
- 2022 में यह संख्या लगभग 13,000 तक पहुंची
- इनमें से 1,300 से अधिक छात्रों का चयन प्रतिष्ठित संस्थानों में होने का दावा किया गया
योजना के तहत छात्रों को कोचिंग फीस के साथ-साथ 2,500 रुपये प्रतिमाह वजीफा भी दिया जाता था।
इस घोटाले के सामने आने के बाद योजना की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि अक्टूबर 2024 में फंड के दुरुपयोग के चलते इसे अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था।
फिलहाल, जांच जारी है और प्रशासन का कहना है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोका जा सके।
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