एक गोली से दो मौतें! कैंसर से पीड़ित थी पत्नी… आर्थिक तंगी से परेशान पति ने बीवी को पीठ से सटाकर चलाई राइफल, 15 पन्ने की डायरी ने बयां किया दर्द
शाहबाद, रामपुर। आर्थिक तंगी, बीमारी और मानसिक तनाव से जूझ रहे बर्तन व्यापारी सुनील रस्तोगी ने गुरुवार सुबह ऐसा खौफनाक कदम उठाया, जिसने पूरे कस्बे को झकझोर कर रख दिया। मुख्य बाजार निवासी व्यापारी सुनील रस्तोगी ने अपनी कैंसर पीड़ित पत्नी नेहा रस्तोगी को पीठ से लगाकर लाइसेंसी राइफल से खुद को गोली मार ली। एक ही गोली से दोनों की मौत हो गई। पुलिस को मौके से 15 पेज की डायरी मिली है, जिसमें व्यापारी ने अपने दर्द, अवसाद और पारिवारिक परेशानियों का जिक्र किया है।
जानकारी के मुताबिक, सुनील रस्तोगी बर्तन का कारोबार कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। परिवार में पत्नी नेहा, बेटा पीयूष और बेटी कृषि हैं। पत्नी लंबे समय से ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित थीं, जबकि खुद सुनील गठिया की बीमारी से परेशान थे। इलाज और आर्थिक बोझ के चलते वह लगातार तनाव और अवसाद में चल रहे थे।
गुरुवार सुबह करीब साढ़े सात बजे उनके घर की पहली मंजिल से गोली चलने की तेज आवाज सुनाई दी। आवाज सुनकर नीचे मौजूद बेटा पीयूष, बेटी कृषि और आसपास के लोग ऊपर पहुंचे तो कमरे का दृश्य देखकर सभी सन्न रह गए। कमरे में सुनील और उनकी पत्नी के रक्तरंजित शव पड़े थे। पास में 315 बोर की लाइसेंसी राइफल और एक स्टील का पाइप भी पड़ा मिला।
सूचना मिलने पर पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। Anurag Singh ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार व्यापारी ने राइफल सीने से सटाकर चलाई थी और एक ही गोली से दोनों की मौत हुई। पत्नी के शरीर में गोली के टुकड़े मिले हैं। मौके से बरामद लोहे की रॉड के आधार पर आशंका है कि उसी की मदद से राइफल का ट्रिगर दबाया गया होगा।
Somendra Meena ने बताया कि मृतक की लिखी डायरी में मानसिक तनाव और पारिवारिक परेशानियों का विस्तार से जिक्र है। डायरी से आत्महत्या की पुष्टि होती है। पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
डायरी में छलका दर्द, बेटे को बताया “श्रवण कुमार”
व्यापारी द्वारा लिखी गई 15 पेज की डायरी में उन्होंने अपने जीवन के संघर्ष, बीमारी और मानसिक तनाव का उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा कि जुलाई 2024 में कूल्हे में दर्द शुरू होने के बाद वह डिप्रेशन में चले गए थे। बाद में पत्नी की तबीयत बिगड़ गई और कैंसर के इलाज में आर्थिक हालात खराब होते चले गए।
डायरी में उन्होंने अपने बेटे पीयूष को “श्रवण कुमार” बताते हुए लिखा कि वह पिछले 18 महीनों से माता-पिता की सेवा कर रहा था। उन्होंने लिखा, “अब मैं परिवार पर बोझ नहीं बन सकता, इसलिए पत्नी को भी साथ ले जा रहा हूं। मुझे माफ कर देना।”
व्यापारी ने अपनी डायरी में बेटी की शादी, कारोबार और जमीन-जायदाद से जुड़े कई जिक्र भी किए हैं। साथ ही रिश्तेदारों और ससुराल पक्ष का उल्लेख करते हुए परिवार का ख्याल रखने की अपील की है।
स्टील पाइप बना चर्चा का विषय
घटनास्थल पर शव के पास मिले स्टील पाइप को लेकर इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। कुछ लोगों ने शुरुआत में मारपीट या साजिश की आशंका भी जताई, लेकिन पुलिस की प्राथमिक जांच और डायरी के आधार पर मामला आत्महत्या का माना जा रहा है।
घटना के बाद पूरे कस्बे में शोक का माहौल है। परिवार और परिचितों का रो-रोकर बुरा हाल है।

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