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अब निकाह में ‘खामोशी’ ही मानी जाएगी ‘हां’…, तालिबान में कुंवारी लड़कियों को ‘ना’ कहने का हक खत्म, अफगानिस्तान में नए कानून ने दुनिया को चौंकाया

  • अफगानिस्तान में नया फरमान: कुंवारी लड़कियों की अब खामोशी भी सहमति मानी जाएगी।
  • तालिबान का नया कानून या महिला अधिकारों पर सबसे बड़ा हमला?

काबुल/नई दिल्ली। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार द्वारा लागू किए गए नए पारिवारिक कानून को लेकर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। इस कानून में शादी, तलाक और पारिवारिक अलगाव से जुड़े 31 प्रावधान शामिल हैं, जिनमें सबसे ज्यादा विवाद उस नियम पर हो रहा है जिसमें कुंवारी लड़की की चुप्पी को ही उसकी शादी की सहमति माना जाएगा।

मानवाधिकार संगठनों और महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने इस प्रावधान को महिलाओं की स्वतंत्र इच्छा और अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की है।

चुप्पी को सहमति मानने वाला नियम बना विवाद की जड़

नए कानून के अनुसार, यदि कोई बालिग कुंवारी लड़की शादी के प्रस्ताव पर कोई स्पष्ट आपत्ति नहीं जताती है, तो उसकी चुप्पी को ही निकाह की स्वीकृति माना जा सकता है। आलोचकों का कहना है कि यह नियम डर, दबाव या सामाजिक सीमाओं में फंसी महिलाओं की स्थिति का दुरुपयोग कर सकता है।

हालांकि, पुरुषों और पहले से शादीशुदा महिलाओं पर यह नियम समान रूप से लागू नहीं होने को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसे भेदभावपूर्ण और एकतरफा कानून बताया जा रहा है।

‘खियार अल-बुलूग’ सिद्धांत का उल्लेख

कानून में इस्लामी कानूनी सिद्धांत “खियार अल-बुलूग” का भी उल्लेख किया गया है, जिसके तहत बाल विवाह के बाद वयस्क होने पर उसे रद्द करने का अधिकार दिया जाता है। लेकिन नए प्रावधानों में शर्तें जोड़ दी गई हैं, जिनके अनुसार यदि विवाह अभिभावकों द्वारा और सामाजिक रूप से उपयुक्त माने गए रिश्ते में हुआ है, तो उसे वैध माना जा सकता है।

इसके अलावा, ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय तालिबान की शरिया अदालतों के पास रहेगा, जिससे पीड़ित पक्ष की स्वतंत्रता सीमित हो जाती है।

परिवारों में पुरुष अभिभावकों की भूमिका और बढ़े अधिकार

नए कानून में पिता और दादा जैसे पुरुष अभिभावकों को नाबालिग बच्चों की शादी तय करने में व्यापक अधिकार दिए गए हैं। हालांकि, कानून में यह प्रावधान भी जोड़ा गया है कि केवल “अत्याचारी” या “अनैतिक” स्थिति में ही विवाह को अवैध घोषित किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रावधान व्यवहार में बाल विवाह को और अधिक वैधता दे सकता है।

वैश्विक मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया

अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने इस कानून को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह प्रावधान महिलाओं को उनकी सहमति और स्वतंत्रता के अधिकार से वंचित कर सकता है और बाल विवाह जैसी प्रथाओं को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा दे सकता है।

महिला अधिकार कार्यकर्ताओं ने इसे “संस्थागत नियंत्रण और दमन का उदाहरण” बताया है, जबकि कई देशों और संगठनों ने अफगानिस्तान में महिलाओं की स्थिति को और बिगड़ता हुआ करार दिया है।

पहले से लागू प्रतिबंधों के बीच नया कानून

2021 में सत्ता में वापसी के बाद से तालिबान सरकार द्वारा महिलाओं के शिक्षा, रोजगार, सार्वजनिक जीवन और सामाजिक गतिविधियों पर कई प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। नए पारिवारिक कानून को उसी नीति की एक और कड़ी माना जा रहा है, जिससे अफगान महिलाओं की स्थिति और अधिक सीमित होने की आशंका जताई जा रही है।

तालिबान का यह नया पारिवारिक कानून न केवल अफगान समाज में, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी गहरी बहस और चिंता का विषय बन गया है। जहां एक ओर इसे धार्मिक और सामाजिक व्यवस्था के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसे महिलाओं के मौलिक अधिकारों पर गंभीर प्रहार माना जा रहा है।

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