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यमराज से पति के प्राण छीन लाई थी सावित्री, जानें कब है वट सावित्री व्रत, शुभ मुहूर्त और अखंड सौभाग्य वाली पूजा विधि

भारतीय संस्कृति में प्रेम और समर्पण की मिसाल पेश करने वाला ‘वट सावित्री व्रत’ विवाहित महिलाओं के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है। यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि उस अदम्य साहस और अटूट विश्वास का प्रतीक है, जिसके आगे स्वयं मृत्यु के देवता यमराज को भी झुकना पड़ा था। हिंदू धर्म में मान्यता है कि माता सावित्री ने अपने दृढ़ निश्चय और बुद्धिमत्ता से अपने पति सत्यवान को पुनर्जीवन दिलाया था। आज भी सुहागिनें अपने पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना के लिए यह व्रत पूरी श्रद्धा के साथ रखती हैं।

रिश्तों में अटूट विश्वास का संदेश है वट सावित्री

वट सावित्री व्रत महिलाओं को धैर्य, निष्ठा और समर्पण की प्रेरणा देता है। यह पर्व सिखाता है कि यदि प्रेम सच्चा हो और संकल्प अडिग, तो जीवन की बड़ी से बड़ी बाधा को भी पार किया जा सकता है। इस दिन बरगद (वट) के वृक्ष की पूजा का विशेष विधान है। बरगद को अमरत्व और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है, जिसकी जड़ों में ब्रह्मा, तने में विष्णु और शाखाओं में भगवान शिव का वास माना गया है।

Vat Savitri Vrat 2026: कब है व्रत और क्या है शुभ मुहूर्त?

पंचांग गणना के अनुसार, साल 2026 में वट सावित्री व्रत 16 मई 2026, शनिवार को मनाया जाएगा। उत्तर भारत में यह ज्येष्ठ अमावस्या को मनाया जाता है।

अमावस्या तिथि प्रारंभ: 16 मई 2026, सुबह 05:11 बजे से

अमावस्या तिथि समाप्त: 17 मई 2026, रात 01:30 बजे तक

विशेष योग: इस दिन सुबह 10:26 बजे तक ‘सौभाग्य योग’ रहेगा, जिसके बाद ‘शोभन योग’ शुरू होगा। ज्योतिष शास्त्र में ये दोनों ही योग सौभाग्य वृद्धि के लिए अत्यंत मंगलकारी माने गए हैं।

सावित्री और सत्यवान की अमर कथा: जब यमराज भी हार गए

पौराणिक कथा के अनुसार, राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री ने सत्यवान को अपना पति चुना था, जबकि ऋषि नारद ने बताया था कि सत्यवान अल्पायु हैं। सावित्री अपने निर्णय पर अडिग रहीं। विवाह के एक वर्ष बाद जब यमराज सत्यवान के प्राण लेने आए, तो सावित्री उनके पीछे-पीछे चल दीं। उनकी बुद्धिमत्ता और पतिव्रता धर्म से प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें तीन वरदान दिए। चतुर सावित्री ने तीसरे वरदान में ‘सौ पुत्रों की माता’ होने का आशीर्वाद मांग लिया। वचनबद्ध यमराज को सत्यवान के प्राण वापस करने पड़े। तभी से यह व्रत सौभाग्य का पर्याय बन गया।

कैसे करें पूजा? जानें सही विधि और सामग्री

वट सावित्री की पूजा के लिए महिलाओं को सुबह स्नान के बाद सोलह श्रृंगार कर लाल या पीले वस्त्र धारण करने चाहिए। पूजा की थाली में रोली, अक्षत, धूप, दीप, कच्चा सूत और फल-मिठाई रखें। वट वृक्ष के पास जाकर जल अर्पित करें और वृक्ष के चारों ओर कच्चा सूत लपेटते हुए 7, 11, 21 या 108 बार परिक्रमा करें। अंत में सावित्री-सत्यवान की कथा सुनें और अपने सास-ससुर व बड़ों का आशीर्वाद लेकर दान-पुण्य करें।

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