‘मैं गंदा काम नहीं करूंगी…’, कौन हैं अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर बंगाल की राजनीति में तहलका मचाने वाली देबोलीना बिस्वास.?

कोलकाता नगर निगम (KMC) में उस समय बड़ा सियासी हड़कंप मच गया जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) की कद्दावर नेता और 9वें बरो की अध्यक्ष देबोलीना बिस्वास ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया। उनका यह कदम ऐसे समय में आया है जब एक दिन पहले ही अभिषेक बनर्जी से जुड़ी 17 संपत्तियों को लेकर निगम की ओर से नोटिस जारी किया गया था। इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए विवाद और आरोप-प्रत्यारोप की आग भड़का दी है।
“दबाव में नियम नहीं तोड़ सकती” – इस्तीफे से मचा सियासी तूफान
देबोलीना बिस्वास ने इस्तीफे के बाद कहा कि उन पर पार्टी के भीतर से लगातार दबाव बनाया जा रहा था कि वे नीतियों और नियमों के खिलाफ जाकर कुछ फैसले लें। उन्होंने स्पष्ट कहा, “मैं गंदा काम नहीं करूंगी, अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं कर सकती।”
उनके इस बयान ने टीएमसी के अंदरूनी हालात और गुटबाजी को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अभिषेक बनर्जी नोटिस विवाद से जुड़ रहा पूरा मामला
सूत्रों के अनुसार, कोलकाता नगर निगम द्वारा टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की कंपनी ‘लिप्स एंड बाउंड्स’ और उनके परिवार से जुड़ी 17 संपत्तियों पर कानूनी नोटिस जारी किए जाने के बाद पार्टी के भीतर तनाव बढ़ गया।
इसी घटनाक्रम के अगले दिन देबोलीना बिस्वास के इस्तीफे को लेकर राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि यह सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि अंदरूनी सियासी दबाव का परिणाम है।
कौन हैं देबोलीना बिस्वास?
देबोलीना बिस्वास टीएमसी की जमीनी स्तर पर मजबूत पकड़ रखने वाली नेता मानी जाती हैं। वह कोलकाता नगर निगम के वार्ड नंबर 74 की पार्षद हैं और अपनी साफ-सुथरी और बेबाक छवि के लिए जानी जाती हैं।
पार्टी ने उनकी कार्यशैली को देखते हुए उन्हें कोलकाता नगर निगम के 9वें बरो (Borough IX) का अध्यक्ष बनाया था, जो निगम के सबसे महत्वपूर्ण पदों में से एक माना जाता है।
“सच बोलने की सजा मिली” – देबोलीना का बड़ा आरोप
देबोलीना ने दावा किया कि उन्हें ऐसे फैसलों के लिए दबाव बनाया गया जो उनकी नीतियों और ईमानदारी के खिलाफ थे। उन्होंने कहा कि वह किसी भी परिस्थिति में गलत काम का हिस्सा नहीं बन सकतीं।
हालांकि उन्होंने टीएमसी छोड़ने से इनकार करते हुए कहा कि वह वार्ड 74 की पार्षद के रूप में जनता की सेवा जारी रखेंगी।
TMC के भीतर बढ़ता संकट
इस इस्तीफे ने टीएमसी के भीतर चल रहे असंतोष और आंतरिक संघर्ष को एक बार फिर उजागर कर दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटना पार्टी के लिए आने वाले समय में बड़ी चुनौती बन सकती है।
विपक्षी दलों ने इस पूरे मामले को टीएमसी के भीतर “भ्रष्टाचार और दबाव की राजनीति” का उदाहरण बताते हुए सरकार पर हमला बोला है।
आगे क्या?
देबोलीना बिस्वास का इस्तीफा अभी स्वीकार हुआ है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है। लेकिन उनके बयान और आरोपों ने बंगाल की राजनीति में नई बहस और नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
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