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“मैं भी हूं आनरेरी कॉकरोच!” युवाओं के अनोखे आंदोलन के समर्थन में उतरे सोनम वांगचुक, सरकार को दी बड़ी चेतावनी

नई दिल्ली/लेह : देश के युवाओं में बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर पनपा गुस्सा अब एक बेहद अनोखे और डिजिटल आंदोलन का रूप ले चुका है। सोशल मीडिया पर इन दिनों “कॉकरोच आंदोलन” और इसे चलाने वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) जबरदस्त तरीके से सुर्खियां बटोर रही है। अब इस डिजिटल मुहिम को देश के जाने-माने पर्यावरणविद् और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक का भी खुला समर्थन मिल गया है। वांगचुक ने खुद को इस आंदोलन का ‘आनरेरी कॉकरोच’ (मानद कॉकरोच) घोषित करते हुए केंद्र सरकार को नसीहत दी है कि वह युवाओं की रचनात्मक आवाज को दबाने के बजाय उनकी तकलीफों को समझे।

मैसेंजर को मत मारो, संदेश को समझो- व्यंग्य पर वांगचुक की दोटूक

सोनम वांगचुक ने इस आंदोलन की तारीफ करते हुए सरकार को एक साफ और कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने युवाओं के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर की जा रही कार्रवाई और उन्हें बंद किए जाने पर गहरी चिंता जताई।

कार्टूनिस्टों का उदाहरण देते हुए वांगचुक ने कहा:

सरकार को इस आंदोलन से संदेश (फीडबैक) लेना चाहिए, न कि मैसेंजर (आवाज उठाने वाले) को दबाना चाहिए। अगर हम मैसेंजर को खत्म करेंगे तो मैसेज खत्म नहीं होगा। लोकतंत्र में जैसे किसी कार्टूनिस्ट को इसलिए सजा नहीं दी जाती कि उसने प्रधानमंत्री, गृहमंत्री या रक्षा मंत्री का कैरिकेचर (व्यंग्य चित्र) बनाया है, ठीक उसी तरह युवाओं की यह मुहिम भी एक राजनैतिक व्यंग्य है। इसे सकारात्मक फीडबैक की तरह देखा जाना चाहिए।”

मेंबर बनने की योग्यता पर हंसते हुए बोले- मैं आलसी या बेरोजगार नहीं हूं

जब सोनम वांगचुक से पूछा गया कि क्या वह आधिकारिक तौर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) की सदस्यता लेंगे? तो उन्होंने हंसते हुए बेहद दिलचस्प जवाब दिया। उन्होंने कहा, “मैं इस आंदोलन का रेगुलर मेंबर बनने के लायक नहीं हूं, क्योंकि इसके लिए जो शर्तें हैं- जैसे बेरोजगार होना या आलसी होना, मैं उनमें फिट नहीं बैठता। इसलिए दुर्भाग्य से मैं इसका परमानेंट मेंबर तो नहीं बन सकता, लेकिन इस मुहिम की भावना का सम्मान करते हुए मैं खुद को इसका ‘आनरेरी कॉकरोच’ जरूर मानता हूं।”

अकाउंट बंद किए तो भड़क सकती है हिंसा, नेपाल का दिया उदाहरण

सोनम वांगचुक ने सरकार को आगाह करते हुए पड़ोसी देश नेपाल का एक बड़ा उदाहरण सामने रखा। उन्होंने कहा कि जब नेपाल में इंटरनेट को प्रतिबंधित किया गया और युवाओं के क्रिएटिव एक्सप्रेशन (रचनात्मक अभिव्यक्ति) को जबरन रोका गया, तो उसका नतीजा बेहद खतरनाक रहा। युवा इंटरनेट छोड़कर सड़कों पर उतर आए और वहां बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क गई। वांगचुक ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर भारत में भी युवाओं के ऑनलाइन अकाउंट्स को इसी तरह ब्लॉक और बंद किया जाता रहा, तो युवाओं का यह अंदरूनी गुस्सा कभी भी और किसी भी रूप में बाहर फूट सकता है।

पत्थर उठाने के बजाय डिजिटल क्रिएटिविटी चुनने पर युवाओं को सराहा

सोनम वांगचुक ने भारतीय युवाओं की समझदारी की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की बेहद खुशी है कि देश के युवाओं ने अपनी नाराजगी और सिस्टम के प्रति गुस्से को जाहिर करने के लिए हिंसा या सड़कों पर पत्थरबाजी का रास्ता नहीं चुना। इसके बजाय उन्होंने बेहद अनूठे और डिजिटल क्रिएटिव तरीके से अपनी बात को सरकार के सामने रखा है। उन्होंने कहा कि युवाओं की यही समझदारी और रचनात्मकता ही वास्तव में भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाती है, जिससे किसी को डरने की जरूरत नहीं है।

पेपर लीक और मंत्रियों के इस्तीफे पर उठाए बड़े सवाल

इंटरव्यू के दौरान वांगचुक ने देश में लगातार हो रहे पेपर लीक के मामलों को बेहद गंभीर और संवेदनशील बताया। उन्होंने कहा कि युवाओं द्वारा इस मुद्दे को उठाना सौ फीसदी सही है, क्योंकि यह उनके भविष्य का सवाल है। वांगचुक ने कहा, “दुनिया के किसी भी अन्य लोकतांत्रिक देश में अगर इस तरह बड़े पैमाने पर पेपर लीक जैसी घटनाएं होती हैं, तो वहां के जिम्मेदार मंत्री तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देते हैं। हमारी सरकार को भी इन गंभीर मुद्दों को दबाने या नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए।”

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