‘ससुर ने मेरा बलात्कार किया… पुलिस कह रही सबूत लाकर दो’, महिला दारोगा ने लगाया पुलिस पर FIR नहीं लिखने का आरोप, बोली- 4 दिन से आ रही हूं.

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक महिला दारोगा द्वारा अपने ससुर पर दुष्कर्म का आरोप लगाए जाने का मामला चर्चा का विषय बन गया है। पीड़िता का आरोप है कि घटना के बाद न्याय की उम्मीद लेकर थाने पहुंची, लेकिन शिकायत दर्ज कराने के लिए उसे चार दिनों तक पुलिस थाने और चौकी के चक्कर लगाने पड़े। इतना ही नहीं, उसने कुछ पुलिसकर्मियों पर धमकाने और मामले को दबाने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया है।
महिला दरोगा के अनुसार, उसके साथ हुई घटना के बाद वह कार्रवाई की मांग को लेकर पारा थाने और हंसखेड़ा चौकी पहुंची थी। हालांकि, उसकी शिकायत पर तत्काल एफआईआर दर्ज नहीं की गई। पीड़िता का कहना है कि पुलिस लगातार सबूतों की मांग करती रही और मामला दर्ज करने से बचती रही। इस दौरान उसका मेडिकल परीक्षण भी नहीं कराया गया।
चौकी प्रभारी पर धमकी देने का आरोप
पीड़िता ने आरोप लगाया कि जब उसने हंसखेड़ा चौकी प्रभारी को अपनी आपबीती बताई तो मदद मिलने के बजाय उसे धमकियों का सामना करना पड़ा। महिला दरोगा का दावा है कि चौकी प्रभारी ने उसे कमरे में बंद कर दिया और कहा कि “तुम्हारी नौकरी खा जाएंगे।”
इस व्यवहार से आहत महिला अधिकारी ने सवाल उठाया कि जब पुलिस विभाग में कार्यरत एक महिला अधिकारी को ही न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, तो आम महिलाओं की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
ससुराल पक्ष से मिलीभगत का आरोप
महिला दरोगा ने आरोप लगाया कि संबंधित पुलिसकर्मी उसके ससुराल पक्ष से मिले हुए हैं और इसी वजह से कार्रवाई में देरी की गई। उसने कहा कि लगातार उसे डराया और दबाव बनाने की कोशिश की गई ताकि वह शिकायत वापस ले ले।
पीड़िता के मुताबिक, कई दिनों तक थाने के चक्कर लगाने के बावजूद उसकी सुनवाई नहीं हुई, जिससे उसे न्याय मिलने की उम्मीद कम होती जा रही थी।
सोशल मीडिया पर मामला आने के बाद हरकत में आई पुलिस
मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आने और लोगों की प्रतिक्रिया बढ़ने के बाद पुलिस प्रशासन सक्रिय हुआ। लखनऊ पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि पीड़िता की तहरीर के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस व्यवस्था पर उठे सवाल
यह मामला पुलिस व्यवस्था और महिला सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। एक ओर जहां सरकार और पुलिस महिलाओं की सुरक्षा और त्वरित न्याय के दावे करती है, वहीं दूसरी ओर पुलिस विभाग की ही एक महिला अधिकारी को अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए कई दिनों तक संघर्ष करना पड़ा।
फिलहाल पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इस मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली और संवेदनशील मामलों में उसकी जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
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