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रातोंरात गायब हुई IT कंपनी! 700 कर्मचारियों को बिना वेतन और नौकरी के छोड़ बंद हुआ ऑफिस, पुणे में मचा हड़कंप

पुणे। महाराष्ट्र के पुणे स्थित देश के प्रमुख आईटी हब हिंजवाड़ी से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां संचालित एक आईटी स्टार्टअप कंपनी थिंक टेक इंडिया (Think Tech India) पर आरोप है कि उसने अचानक अपना कार्यालय बंद कर दिया और 700 से अधिक कर्मचारियों को बिना वेतन, बिना नोटिस और बिना किसी आधिकारिक सूचना के बेरोजगार छोड़ दिया। इस घटना के बाद कर्मचारियों में भारी आक्रोश है और वे अपने बकाया वेतन तथा न्याय की मांग को लेकर पुलिस और श्रम विभाग के दरवाजे खटखटा रहे हैं।

एक झटके में बेरोजगार हुए सैकड़ों कर्मचारी

कर्मचारियों के अनुसार, हिंजवाड़ी फेज-2 में स्थित कंपनी ने पिछले वर्ष बड़े पैमाने पर भर्ती अभियान चलाया था। सैकड़ों सॉफ्टवेयर इंजीनियरों, फ्रेशर्स और इंटर्न को आकर्षक करियर अवसरों और बेहतर भविष्य का भरोसा देकर नियुक्त किया गया था। शुरुआत में कंपनी का संचालन सामान्य तरीके से चलता रहा और कर्मचारियों को समय पर वेतन तथा इंटर्न को नियमित स्टाइपेंड भी मिलता रहा।

लेकिन कुछ ही महीनों बाद हालात बदलने लगे। कर्मचारियों का आरोप है कि कंपनी वित्तीय संकट से जूझ रही थी, जिसके संकेत इस साल की शुरुआत से ही मिलने लगे थे।

फरवरी से अटकने लगी सैलरी

पीड़ित कर्मचारियों का कहना है कि फरवरी 2026 से वेतन भुगतान में लगातार देरी शुरू हो गई थी। कई कर्मचारियों को महीनों तक वेतन नहीं मिला, जबकि कुछ को आंशिक भुगतान कर मामले को टाल दिया गया।

जब कर्मचारियों ने प्रबंधन से सवाल किए तो उन्हें आश्वासन दिया गया कि कंपनी के वित्तीय और प्रशासनिक मुद्दे जल्द सुलझ जाएंगे और सभी बकाया वेतन का भुगतान कर दिया जाएगा। लेकिन कर्मचारियों का दावा है कि ये आश्वासन केवल समय निकालने के लिए दिए गए थे।

ऑफिस पहुंचे तो लगा मिला ताला

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब कर्मचारी रोज की तरह काम पर पहुंचे और पाया कि कंपनी का कार्यालय बंद है। कई कर्मचारियों ने बताया कि कार्यालय परिसर पर ताला लगा हुआ था और अंदर कोई अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं था।

सबसे हैरानी की बात यह रही कि कंपनी की ओर से न तो कोई आधिकारिक ई-मेल जारी किया गया और न ही कर्मचारियों को बंद होने की कोई सूचना दी गई। इसके बाद कर्मचारियों ने वरिष्ठ अधिकारियों और प्रबंधन से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनके फोन बंद मिले या किसी ने जवाब नहीं दिया।

700 से अधिक कर्मचारियों पर संकट

कर्मचारियों का दावा है कि कंपनी के अचानक बंद होने से 700 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे युवा भी शामिल हैं जिन्होंने हाल ही में नौकरी शुरू की थी और अपने करियर की शुरुआत कर रहे थे।

कई कर्मचारियों ने बताया कि वे किराये के मकानों में रह रहे हैं और वेतन न मिलने के कारण अब उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कुछ कर्मचारियों ने कहा कि वे बैंक ऋण और अन्य वित्तीय दायित्वों का भुगतान करने में भी असमर्थ हो गए हैं।

पुलिस और श्रम विभाग से लगाई गुहार

कंपनी के अचानक गायब होने के बाद प्रभावित कर्मचारियों ने पुलिस और श्रम विभाग में शिकायत दर्ज कराई है। कर्मचारियों ने मांग की है कि कंपनी प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जाए और उनका बकाया वेतन दिलाया जाए।

श्रम अधिकारियों से भी मामले में हस्तक्षेप कर कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करने की मांग की गई है। कई कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने जानबूझकर भर्ती की, कर्मचारियों से काम कराया और बाद में बिना भुगतान किए कार्यालय बंद कर दिया।

सोशल मीडिया पर भी फूटा गुस्सा

घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी कर्मचारियों का गुस्सा देखने को मिला। कई लोगों ने पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि “आईटी सेक्टर में इस तरह की घटनाएं युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं।” कुछ कर्मचारियों ने इसे कॉर्पोरेट जगत की जवाबदेही पर बड़ा सवाल बताया।

जांच और कार्रवाई की मांग

फिलहाल मामले को लेकर स्थानीय प्रशासन और श्रम विभाग से कार्रवाई की मांग की जा रही है। कर्मचारी चाहते हैं कि कंपनी के निदेशकों और जिम्मेदार अधिकारियों का पता लगाकर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए तथा बकाया वेतन का भुगतान सुनिश्चित कराया जाए।

पुणे के आईटी उद्योग में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। यदि कर्मचारियों के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह हाल के वर्षों में आईटी सेक्टर में कर्मचारियों के साथ हुए सबसे बड़े विवादों में से एक माना जा सकता है।

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