पति 7 साल तक रहा कोमा में, पत्नी जगाने के लिए रोज काटती रही पैर की उंगलियां! आंख खुलते ही निकले तीन मैजिकल शब्द..
लेकिन साल 2019 में उन्होंने जो फैसला लिया, उसने उन्हें लोगों की नजर में हीरो तो बना दिया, लेकिन उनकी अपनी जिंदगी पूरी तरह बदल गई.
बताया जाता है कि एक तीन साल का बच्चा गोदाम की छत पर फंस गया था. बच्चे की जान खतरे में थी. ऐसे में झाओ बिना अपनी परवाह किए उसे बचाने के लिए छत पर चढ़ गए. उन्होंने बच्चे को सुरक्षित अपनी गोद में उठाया और नीचे लाने लगे.
बच्चा बच गया, लेकिन खुद जिंदगी और मौत के बीच पहुंच गए
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, बच्चे को नीचे लाते समय झाओ का संतुलन बिगड़ गया और वह करीब छह मीटर की ऊंचाई से नीचे गिर पड़े. गिरते समय उन्होंने पूरी कोशिश की कि बच्चे को कोई चोट न लगे. इसके लिए उन्होंने अपने शरीर को ढाल बना लिया. इस हादसे में बच्चा पूरी तरह सुरक्षित बच गया, लेकिन झाओ के सिर में गंभीर चोट आई. उनके शरीर की कई हड्डियां टूट गईं. अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन वह गहरे कोमा जैसी स्थिति में चले गए. डॉक्टरों ने परिवार को साफ बता दिया कि उनके दोबारा होश में आने की संभावना बेहद कम है.
पत्नी ने हार नहीं मानी, हर दिन करती रहीं सेवा
जहां कई लोग ऐसी स्थिति में उम्मीद छोड़ देते हैं, वहीं झाओ की पत्नी सॉन्ग मेई ने ऐसा नहीं किया. उन्होंने तय कर लिया कि जब तक सांस है, तब तक वह अपने पति को वापस सामान्य जिंदगी में लाने की कोशिश करती रहेंगी. करीब सात साल तक उनका पूरा जीवन सिर्फ पति की देखभाल के इर्द-गिर्द घूमता रहा. वह उन्हें समय पर खाना खिलातीं, शरीर की एक्सरसाइज करवातीं, हाथ-पैर हिलातीं और हर दिन उनसे बातें करतीं, जिससे उनका दिमाग सक्रिय बना रहे. परिवार वालों के मुताबिक, सॉन्ग को हमेशा विश्वास था कि एक दिन उनके पति जरूर जागेंगे.
पैर की उंगलियां काटकर जगाने की कोशिश करती थीं
झाओ की रिकवरी के लिए सॉन्ग ने कई अलग-अलग तरीके अपनाए. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, वह अक्सर उनके पैरों की उंगलियों को हल्के-हल्के दांतों से काटती थीं. उनका मानना था कि इससे नसों को उत्तेजना मिलेगी और शरीर धीरे-धीरे प्रतिक्रिया देना शुरू करेगा. साथ ही, वह लगातार उनसे बातें करती रहती थीं. कभी पुराने दिनों की याद दिलातीं, तो कभी परिवार की बातें सुनातीं. उनका मकसद सिर्फ इतना था कि किसी तरह उनके पति तक उनकी आवाज पहुंचती रहे. यह सिलसिला कुछ दिनों या महीनों का नहीं, बल्कि पूरे सात साल तक चलता रहा.
सात साल बाद खुलीं आंखें, पहला शब्द था 'आई लव यू'
लंबे इंतजार के बाद आखिर वह दिन भी आ गया, जिसका सॉन्ग को कई सालों से इंतजार था. धीरे-धीरे झाओ के शरीर में हलचल शुरू हुई. पहले उन्होंने छोटी-छोटी प्रतिक्रियाएं दीं और फिर एक दिन उन्होंने आंखें खोल दीं. इस कहानी का सबसे भावुक पल तब आया, जब उन्होंने अपनी पत्नी की तरफ देखा और धीमी आवाज में कहा, 'आई लव यू.' इन तीन शब्दों ने सात साल की तपस्या का मानो पूरा फल दे दिया. यह पल वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम कर गया.
पहले से ही दूसरों की मदद करने वाला परिवार था
इस कहानी ने लोगों को इसलिए भी प्रभावित किया क्योंकि यह परिवार पहले से ही दूसरों की मदद करने के लिए जाना जाता था. सॉन्ग पहले किंडरगार्टन में आर्ट टीचर थीं. वह आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को मुफ्त में पेंटिंग सिखाया करती थीं. वहीं, झाओ भी अपनी सीमित आमदनी के बावजूद एक दूरदराज गांव के छात्र की पढ़ाई का खर्च उठाते थे. यानी दूसरों की मदद करना इस परिवार की आदत थी. शायद यही वजह थी कि झाओ ने अपनी जान की परवाह किए बिना बच्चे को बचाने का फैसला किया.
सोशल मीडिया पर लोग बोले- यही है सच्चा प्यार
यह कहानी सामने आने के बाद चीन के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो गई. लाखों लोगों ने सॉन्ग की हिम्मत और समर्पण की जमकर तारीफ की. एक यूजर ने लिखा कि अगर सच्चे प्यार की कोई परिभाषा है, तो वह यही महिला है. दूसरे ने कहा कि पति ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक बच्चे को बचाया और पत्नी ने सात साल तक उनका साथ नहीं छोड़ा. ऐसे लोग इंसानियत पर भरोसा बढ़ाते हैं. कई लोगों ने लिखा कि आज के दौर में जहां रिश्ते छोटी-छोटी बातों पर टूट जाते हैं, वहां यह कहानी रिश्तों की असली ताकत दिखाती है.
उम्मीद और रिश्तों की ताकत सिखाती है यह कहानी
झाओ और सॉन्ग की कहानी सिर्फ एक चमत्कारी रिकवरी की कहानी नहीं है. यह भरोसे, धैर्य और रिश्तों की मजबूती का उदाहरण भी है. डॉक्टरों ने उम्मीद लगभग छोड़ दी थी, लेकिन पत्नी ने नहीं छोड़ी. सात साल तक बिना थके, बिना शिकायत और बिना हार माने उन्होंने अपने पति का साथ निभाया. आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और जिस व्यक्ति के दोबारा बोलने की उम्मीद बहुत कम थी, उसने सबसे पहले अपनी पत्नी से प्यार का इजहार किया. यही वजह है कि यह कहानी सिर्फ चीन ही नहीं, दुनिया भर के लोगों के दिल को छू रही है. यह कहानी याद दिलाती है कि कई बार इलाज के साथ-साथ किसी अपने का भरोसा भी सबसे बड़ी दवा बन जाता है.
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