UP: 7 साल पहले मां, फिर पिता की मौत. अब अनाथ मासूम को जिंदा चबा गया मगरमच्छ, जिस चादर में थी लाश, उससे लिपटकर रोईं बहनें
बहराइच (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। घाघरा नदी के किनारे स्थित टिकुरी गांव में 12 वर्षीय एक बालक पर मगरमच्छ ने हमला कर दिया। परिवार के अनुसार, बच्चे को बचाने के लिए उसके चाचा ने अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में छलांग लगाई और कई मिनट तक संघर्ष किया, लेकिन वह अपने भतीजे को नहीं बचा सके। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है, जबकि सोशल मीडिया पर इस हादसे से जुड़े वीडियो भी तेजी से साझा किए जा रहे हैं।
खेत से लौटते समय हुआ हादसा
परिजनों के मुताबिक, गुरुवार शाम 12 वर्षीय सुनील अपने चाचा विजय राज सिंह और उदय राज सिंह के साथ खेत में धान की रोपाई का काम करने के बाद घर लौट रहा था। रास्ते में सभी लोग घाघरा नदी के किनारे रुके, जहां सुनील हाथ-पैर धोने के लिए पानी के पास गया।
इसी दौरान नदी में मौजूद मगरमच्छ ने अचानक उस पर हमला कर दिया। घटना इतनी तेजी से हुई कि किसी को संभलने का मौका नहीं मिला। बच्चे की चीख सुनते ही आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई।
चाचा ने दिखाई बहादुरी
परिवार के अनुसार, सुनील की आवाज सुनते ही उसके चाचा विजय राज सिंह बिना देर किए नदी में कूद पड़े। उन्होंने मगरमच्छ से बच्चे को छुड़ाने की पूरी कोशिश की।
बताया जा रहा है कि उन्होंने कई मिनट तक लगातार संघर्ष किया, लेकिन नदी का तेज बहाव और मगरमच्छ की ताकत के कारण वे बच्चे को सुरक्षित बाहर नहीं निकाल सके।
ग्रामीणों का कहना है कि यह घटना इतनी भयावह थी कि वहां मौजूद लोग भी कुछ देर तक समझ नहीं पाए कि क्या करें। बाद में कई ग्रामीण सहायता के लिए मौके पर पहुंचे।
गांव में मची अफरा-तफरी
घटना की खबर फैलते ही टिकुरी गांव और आसपास के क्षेत्रों के लोग बड़ी संख्या में नदी किनारे पहुंच गए। ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन, पुलिस और वन विभाग को सूचना दी।
कुछ लोगों ने बांस और अन्य उपलब्ध साधनों की मदद से नदी में तलाश शुरू की। बाद में प्रशासन की टीमें भी मौके पर पहुंच गईं और संयुक्त रूप से खोज अभियान चलाया गया।
तीन घंटे तक चला खोज अभियान
स्थानीय लोगों और प्रशासनिक टीमों की मदद से नदी में कई घंटे तक तलाश की गई। काफी प्रयासों के बाद घटनास्थल से कुछ दूरी पर बच्चे का शव बरामद किया गया।
पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमॉर्टम के बाद शुक्रवार को परिजनों को शव सौंपा गया, जिसके बाद गांव में अंतिम संस्कार किया गया।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
इस हादसे ने पहले से ही कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे एक परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।
परिजनों के अनुसार, सुनील के पिता का निधन लगभग पांच वर्ष पहले बीमारी के कारण हो गया था, जबकि उसकी मां का भी कुछ वर्ष पहले देहांत हो चुका था। इसके बाद से बच्चे की देखभाल उसके चाचा और अन्य परिजन कर रहे थे।
चार भाई-बहनों में सुनील दूसरे नंबर पर था। परिवार के सदस्य बताते हैं कि वह पढ़ाई के साथ-साथ घर के छोटे-मोटे कामों में भी हाथ बंटाता था।
बहनों का रो-रोकर बुरा हाल
जब पोस्टमॉर्टम के बाद बच्चे का शव घर पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। उसकी बहनों और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था।
गांव के लोगों ने बताया कि पूरे क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए और परिवार को सांत्वना दी।
वन्यजीव और मानव संघर्ष बना चिंता का विषय
घाघरा नदी के आसपास के इलाकों में समय-समय पर मगरमच्छ देखे जाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ मगरमच्छों की गतिविधियां भी बढ़ जाती हैं, जिससे नदी किनारे रहने वाले लोगों के सामने खतरा बढ़ जाता है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि नदी किनारे रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बच्चों को अकेले पानी के पास नहीं जाने देना चाहिए और जहां मगरमच्छों की मौजूदगी की आशंका हो, वहां अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है।
प्रशासन और वन विभाग की भूमिका
घटना के बाद पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और आवश्यक जानकारी जुटाई।
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि नदी किनारे अनावश्यक रूप से न जाएं और यदि किसी क्षेत्र में मगरमच्छ दिखाई दे तो तत्काल वन विभाग को सूचना दें।
साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और लोगों को जागरूक करने की भी बात कही गई है।
बरसात के मौसम में बढ़ जाता है खतरा
विशेषज्ञ बताते हैं कि मानसून के दौरान नदियों का जलस्तर बढ़ने से मगरमच्छ अपने सामान्य आवास से बाहर भी दिखाई दे सकते हैं। ऐसे समय में खेतों, नदी किनारों और जलभराव वाले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
ग्रामीण इलाकों में जहां लोग रोजमर्रा के कार्यों के लिए नदी का उपयोग करते हैं, वहां सुरक्षा संबंधी जागरूकता अभियान भी महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
ग्रामीणों की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि नदी किनारे मगरमच्छों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं। साथ ही नियमित निगरानी और बचाव व्यवस्था मजबूत की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
ग्रामीणों का कहना है कि नदी किनारे बसे गांवों में रहने वाले लोगों के लिए सुरक्षा उपाय बढ़ाना समय की जरूरत है।
बहराइच के टिकुरी गांव में हुआ यह हादसा पूरे क्षेत्र के लिए गहरा सदमा लेकर आया है। एक मासूम बच्चे की जान चली गई और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घटना ने एक बार फिर नदी किनारे रहने वाले लोगों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष के मुद्दे को सामने ला दिया है।
प्रशासन और वन विभाग मामले की जांच के साथ-साथ सुरक्षा उपायों पर भी काम कर रहे हैं। वहीं ग्रामीणों को सलाह दी जा रही है कि वे नदी किनारे अत्यधिक सतर्क रहें और बच्चों को अकेले पानी के पास न जाने दें। इस दुखद घटना ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है और सभी की संवेदनाएं पीड़ित परिवार के साथ हैं।

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