सुक्खू सरकार के सेस से भरने लगा खजाना, सीएम की पहल से आया साढ़े तीन करोड़ का राजस्व

हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने की सुक्खू सरकार की मुहिम के तहत बैंकिंग, बीमा और व्यावसायिक संस्थानों पर लगाया सेस से सरकारी खजाना भरने लगा है। प्रति यूनिट दो रुपए पर्यावरण सेस और व्यवसायिक संस्थानों से एक रुपए प्रति यूनिट खपत पर लगाए सेस से राज्य को साढ़े तीन करोड़ से अधिक की राशि मिलने का आकलन है।
बिजली बोर्ड ने बैंकिंग, बीमा व वित्तीय संस्थानों पर जनवरी और दस अलग-अलग श्रेणियों के व्यवसायिक संस्थानों पर जून माह से प्रति यूनिट सेस लगाने शुरू किया है। इस श्रेणी में बैंक, बीमा कंपनियां, अन्य वित्तीय संस्थान शामिल किए गए। इनसे प्रति यूनिट बिजली खपत पर दो रुपए पर्यावरण सेस बिजली बिल में लिया जा रहा है। बिजली बोर्ड के आंकड़ों के तहत छह माह में बैंकिंग, बीमा और वित्तीय क्षेत्र के 15,180 बिल उपभोक्ताओं से कुल एक करोड़ 72 लाख 93 हजार 289 रुपए का उपकर आंका गया है।
जनवरी में 2,437 उपभोक्ताओं से 2.08 लाख रुपए, फरवरी में 2,453 उपभोक्ताओं से 33.32 लाख रुपए, मार्च में 2,584 उपभोक्ताओं से 33.21 लाख रुपए, अप्रैल में 2,531 उपभोक्ताओं से 31.13 लाख रुपए, मई में 2,563 उपभोक्ताओं से 31.35 लाख रुपए तथा जून में 2,612 उपभोक्ताओं से सबसे अधिक 41.81 लाख रुपए का उपकर आंका गया। वहीं, सरकार ने व्यावसायिक श्रेणी के बिजली उपभोक्ताओं पर भी प्रति यूनिट एक रुपए उपकर लगाने का निर्णय लिया।
यह व्यवस्था जून 2026 से लागू की गई। विभिन्न श्रेणियों के व्यावसायिक बिजली उपभोक्ता शामिल किए गए। जून में पहली बार 15,535 व्यावसायिक उपभोक्ताओं से एक करोड़ 85 लाख 11 हजार 163 रुपए का उपकर आंका गया। बिजली बोर्ड के अनुसार दोनों श्रेणियों के आंकड़ों को मिलाकर जनवरी से जून, 2026 के दौरान कुल तीन करोड़ 58 लाख 4452 रुपए से अधिक का उपकर आंका गया है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि व्यावसायिक उपभोक्ताओं को उपकर के दायरे में शामिल किए जाने के बाद राजस्व में और वृद्धि होने की संभावना है।
आत्मनिर्भर बनेगा हिमाचल
प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सुक्खू सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं। इसके तहत बैंकिंग, बीमा व अन्य वित्तीय व व्यवसायिक संस्थानों पर दो और एक रुपए सेस लगाने का निर्णय लिया गया था। इस व्यवस्था को प्रदेश में लागू कर दिया है।
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