गलती एक क्लिक की और हजारों रुपये गायब... सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मामला!
सोशल मीडिया पर आकर्षक डिस्काउंट और सस्ते ऑफर देखकर ऑनलाइन खरीदारी करना आज आम बात हो गई है। लेकिन कई बार यही लालच लोगों को साइबर ठगी का शिकार बना देता है। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले से सामने आया एक मामला इसी खतरे की ओर इशारा करता है। यहां एक महिला ने फेसबुक पर डिजाइनर लहंगे का आकर्षक विज्ञापन देखकर ऑर्डर दिया, लेकिन इसके बाद जो घटनाक्रम सामने आया, उसने उसे हजारों रुपये का नुकसान पहुंचा दिया।
मामले के अनुसार, महिला ने लगभग ₹1,400 का डिजाइनर लहंगा खरीदने के लिए ऑर्डर किया था। आरोप है कि ऑर्डर देने के कुछ समय बाद उसे अलग-अलग नंबरों से फोन आने लगे। कॉल करने वालों ने पहले छोटे-छोटे भुगतान के नाम पर पैसे मांगे और बाद में खुद को पुलिस अधिकारी बताकर कथित रूप से डराया-धमकाया। महिला का आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम में उससे करीब ₹13,000 की रकम अलग-अलग किस्तों में ले ली गई।
फेसबुक पर दिखा आकर्षक ऑफर
जानकारी के अनुसार, बाराबंकी निवासी गीता (नाम मीडिया रिपोर्टों के अनुसार) फेसबुक चला रही थीं। इसी दौरान उन्हें एक डिजाइनर लहंगे का विज्ञापन दिखाई दिया, जिसमें भारी छूट का दावा किया गया था। कम कीमत और आकर्षक तस्वीरों को देखकर उन्होंने विज्ञापन पर क्लिक किया और लहंगा ऑर्डर कर दिया।
ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते चलन के बीच ऐसे विज्ञापन अक्सर लोगों का ध्यान खींच लेते हैं। कई बार ये विज्ञापन वास्तविक कंपनियों के होते हैं, लेकिन कुछ मामलों में साइबर ठग नकली वेबसाइट या फर्जी पेज बनाकर लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं।
ऑर्डर के बाद शुरू हुए फोन
महिला का आरोप है कि ऑर्डर देने के बाद उसे एक कॉल आया, जिसमें कथित तौर पर प्रोसेसिंग या अन्य शुल्क के नाम पर ₹250 जमा कराने को कहा गया। शुरुआत में रकम कम होने के कारण उन्हें कोई संदेह नहीं हुआ और उन्होंने भुगतान कर दिया।
इसके बाद लगातार अलग-अलग कारण बताकर फिर पैसे मांगे जाने लगे। कभी ऑर्डर कन्फर्म करने का बहाना बनाया गया तो कभी डिलीवरी या रिफंड प्रक्रिया का हवाला दिया गया। महिला के अनुसार, हर बार उन्हें भरोसा दिलाया गया कि भुगतान के बाद लहंगा भेज दिया जाएगा या पहले की राशि वापस कर दी जाएगी।
खुद को पुलिस बताकर कथित धमकी
आरोप है कि जब महिला ने आगे भुगतान करने में हिचक दिखाई, तब एक व्यक्ति ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए फोन किया। कथित तौर पर उसे डराया गया कि यदि निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
ऐसी परिस्थितियों में कई लोग घबरा जाते हैं और बिना सत्यापन किए पैसे भेज देते हैं। महिला का कहना है कि लगातार फोन और दबाव के कारण उसने अलग-अलग माध्यमों से कुल मिलाकर करीब ₹13,000 का भुगतान कर दिया।
हालांकि, भुगतान के बावजूद न तो लहंगा मिला और न ही कथित रूप से मांगी गई राशि वापस की गई।
साइबर ठगी का बढ़ता खतरा
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर नकली विज्ञापन, फर्जी ई-कॉमर्स पेज और आकर्षक डिस्काउंट के जरिए लोगों को ठगने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।
ठग आमतौर पर इन तरीकों का इस्तेमाल करते हैं—
भारी छूट का लालच देना।
सीमित समय के ऑफर का दावा करना।
एडवांस पेमेंट मांगना।
फर्जी कस्टमर केयर नंबर देना।
खुद को बैंक, पुलिस या सरकारी अधिकारी बताकर डराना।
रिफंड या वेरिफिकेशन के नाम पर अतिरिक्त भुगतान कराना।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी वैध ऑनलाइन शॉपिंग प्रक्रिया में पुलिस अधिकारी बनकर पैसे मांगना सामान्य बात नहीं है। ऐसी स्थिति में तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए।
कैसे करें पहचान?
यदि किसी सोशल मीडिया विज्ञापन में बहुत अधिक छूट दिखाई जा रही हो, तो खरीदारी से पहले कुछ बातों की जांच जरूर करें—
वेबसाइट का URL और उसकी विश्वसनीयता देखें।
कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर ऑफर की पुष्टि करें।
ग्राहक समीक्षाएं (Reviews) पढ़ें।
केवल सुरक्षित पेमेंट गेटवे का उपयोग करें।
अज्ञात UPI आईडी या व्यक्तिगत बैंक खाते में भुगतान करने से बचें।
किसी भी व्यक्ति द्वारा पुलिस, बैंक या सरकारी अधिकारी बनकर पैसे मांगने पर उसकी पहचान की पुष्टि करें।
ठगी होने पर क्या करें?
यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की ऑनलाइन ठगी का शिकार हो जाए तो विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि—
तुरंत अपने बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को सूचना दें।
सभी लेन-देन के स्क्रीनशॉट और चैट सुरक्षित रखें।
साइबर अपराध की शिकायत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर करें।
राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
निकटतम पुलिस स्टेशन या साइबर थाने में भी सूचना दें।
समय पर शिकायत करने से कई मामलों में रकम रोकने या वापस पाने की संभावना बढ़ सकती है।
सोशल मीडिया पर सतर्कता जरूरी
फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिदिन हजारों विज्ञापन दिखाई देते हैं। इनमें से अधिकांश वैध होते हैं, लेकिन कुछ विज्ञापन साइबर अपराधियों द्वारा लोगों को फंसाने के उद्देश्य से भी चलाए जाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसी उत्पाद की कीमत बाजार मूल्य से असामान्य रूप से कम दिखाई दे रही है, तो खरीदारी करने से पहले अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। केवल डिस्काउंट देखकर जल्दबाजी में निर्णय लेना आर्थिक नुकसान का कारण बन सकता है।
बाराबंकी की इस घटना ने एक बार फिर ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान सतर्क रहने की आवश्यकता को रेखांकित किया है। महिला का आरोप है कि ₹1,400 के लहंगे के लालच में वह कथित साइबर ठगी का शिकार हो गई और उससे लगभग ₹13,000 वसूल लिए गए। इस मामले की वास्तविक परिस्थितियों और कानूनी कार्रवाई का निर्धारण संबंधित जांच एजेंसियां करेंगी, लेकिन यह घटना सभी इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश देती है

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