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अब यूपी की सियासत में ‘जयंती जिंदाबाद’: भाजपा और सपा के बीच महापुरुषों को साधने की मची होड़, जानिए समीकरण

Lucknow : उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक नया और दिलचस्प दौर शुरू हो गया है। सूबे में चुनावी हलचल भले ही अभी दूर हो, लेकिन जातिगत वोटों की बिसात बिछाने के लिए राजनीतिक दलों में महापुरुषों की साधना की होड़ मच गई है। उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख सियासी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) अपने-अपने वोट बैंक को मजबूती से रिझाने के लिए संतों और महापुरुषों की स्मृतियों व जयंतियों का सहारा ले रहे हैं। हालात यह हैं कि इस सियासत को धार देने के लिए दोनों दलों ने महीनों पहले से बड़े कार्यक्रमों का एजेंडा तैयार कर लिया है।

संत रविदास जयंती पर भाजपा का सात महीने का मेगा प्लान

उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी पकड़ को और मजबूत करने के लिए भाजपा ने बड़ा सियासी दांव चला है। पार्टी ने संत रविदास महाराज की जयंती के उपलक्ष्य में करीब सात महीने का लंबा एजेंडा तैयार किया है। प्रदेश नेतृत्व की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक, भाजपा 29 जुलाई (गुरु पूर्णिमा) से लेकर 20 फरवरी 2027 (संत रविदास महाराज जयंती) तक भव्य ‘समरसता संकल्प अभियान’ चलाएगी।

इस पूरे अभियान के दौरान पार्टी विभिन्न धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक आयोजनों और जनसंपर्क गतिविधियों के जरिए संत रविदास महाराज के जीवन दर्शन, समता, भक्ति सेवा, सामाजिक न्याय और मानवता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाएगी। इसी कड़ी में बुधवार को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर भाजपा महानगर की ओर से सभी दस पार्टी मंडलों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिसके तहत शहर के सौ मंदिरों के पुजारियों को सम्मानित करने की जिम्मेदारी पार्टी पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को सौंपी गई है।

सपा का पीडीए फॉर्मूला और महापुरुषों की साधना

दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी अपने ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्‍यत) फॉर्मूले के तहत हर वर्ग के महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि को भुनाने में जुटी है। सपा का मकसद इन आयोजनों के जरिए सीधे तौर पर संबंधित समाज के मतदाताओं को अपने पाले में लाना है। इसी रणनीति के तहत सपा ने बुधवार को गुरु पूर्णिमा के मौके पर महाराजा दक्ष प्रजापति की जयंती पूरे प्रदेश में जिला और महानगर कार्यालयों पर मनाने का निर्देश जारी किया है। इसके बाद आगामी पांच अगस्त को पार्टी की ओर से पारंपरिक रूप से जनेश्वर मिश्र की जयंती पर बड़ा आयोजन किया जाएगा।

पिछले कुछ महीनों में दलों द्वारा आयोजित प्रमुख कार्यक्रम

सपा और भाजपा दोनों ही राजनीतिक दलों ने पिछले कुछ महीनों में कई महापुरुषों की याद में कार्यक्रमों की झड़ी लगा रखी है:

  • सपा के पिछले पांच महीनों के प्रमुख कार्यक्रम: पार्टी ने मार्च से जुलाई के बीच कांशीराम जयंती, सम्राट अशोक जयंती, महर्षि कश्यप और महाराजा निषाद राज गुहा जयंती, महात्मा ज्योतिराव फुले जयंती, आंबेडकर जयंती, अहिल्याबाई होल्कर जयंती, महारानी दुर्गावती बलिदान दिवस, छत्रपति साहू जी महाराज जयंती, बाबा लक्खी शाह बंजारा जयंती और फूलनदेवी की पुण्यतिथि जैसे 11 से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए हैं।
  • भाजपा के प्रमुख कार्यक्रम: वहीं दूसरी ओर, भाजपा ने भी नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती, आंबेडकर जयंती पर दीपोत्सव, आंबेडकर प्रतिमा सफाई अभियान, डॉ. आंबेडकर सम्मान अभियान, अहिल्याबाई होल्कर जयंती और श्यामा प्रसाद मुखर्जी जयंती जैसे आयोजनों के जरिए सियासी जमीन मजबूत की है।

कार्यकर्ताओं के जन्मदिन और मेल-मिलाप से सियासत को धार

पार्टी कार्यालयों के आयोजनों के अलावा मैदानी स्तर पर भी नेताओं की कार्यशैली में बदलाव देखने को मिल रहा है। इन दिनों जिलों के माननीय जनप्रतिनिधि आम कार्यकर्ताओं के जन्मदिन को बेहद खास बना रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कार्यकर्ताओं के जन्मदिन की तस्वीरों और शुभकामनाओं की बाढ़ सी आई रहती है। इसके अलावा, नेताओं का कार्यकर्ताओं की शादी की सालगिरह में शामिल होना और धार्मिक कार्यक्रमों में पूरी शिद्दत के साथ भाग लेना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है, जो सीधे तौर पर चुनावी समीकरणों को साधने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा है।

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