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चिंतपूर्णी मंदिर में CCTV की नजर में खुलता है दानपात्र, हर रोज होती है चढ़ावे की गिनती

अयोध्या राम मंदिर में दान की कथित चोरी का मामला देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। ऐसे में हिमाचल के प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां चिंतपूर्णी मंदिर में भी श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल उठ रहा है कि उनके द्वारा चढ़ाया गया दान किस तरह सुरक्षित रखा जाता है, उसकी गणना कैसे होती है और पूरी प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है। 

इसे लेकर ‘दिव्य हिमाचल’ ने जब पड़ताल की तो पाया कि चिंतपूर्णी मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया पारदर्शी और व्यवस्थित रूप में संचालित की जाती है। मंदिर प्रशासन ने ऐसी व्यवस्था बनाई है, जिससे श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे और चढ़ावे की प्रत्येक राशि का सही लेखा-जोखा सुनिश्चित हो। मंदिर में आने वाले चढ़ावे की रोजाना गिनती की जाती है।

दान पात्र को सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में खोला जाता है। प्रत्येक दिन प्राप्त चढ़ावे को सुरक्षित तरीके से सीलबंद किया जाता है और अगले दिन मंदिर ट्रस्ट के आठ से दस अधिकृत सदस्यों की उपस्थिति में सीसीटीवी कैमरों के सामने दानपात्र खोला जाता है। रोजाना पुजारियों में से जिसकी बारी होती है केवल वही बारीदार अंदर जा सकता है। 

गिनती स्थल को पूरी तरह शीशे से पारदर्शी बनाया गया है। चढ़ावे की गिनती की लाइव फुटेज मंदिर परिसर में लगी डिस्प्ले स्क्रीन पर भी प्रसारित की जाती है। गिनती पूरी होने के बाद बैंक के कर्मचारी प्रतिदिन मंदिर पहुंचकर राशि प्राप्त करते हैं और उसी दिन उसे बैंक में जमा कर दिया जाता है।

सोना-चांदी के लिए स्ट्रांग रूम

माता को अर्पित किए जाने वाले सोने-चांदी और अन्य बहुमूल्य आभूषणों के सुरक्षित रख-रखाव के लिए मंदिर प्रशासन ने सील्ड स्ट्रांग रूम की व्यवस्था की है। इन बहुमूल्य चढ़ावों को सुरक्षा मानकों के तहत स्ट्रांग रूम में रखा जाता है।

छह महीने में 18 करोड़ रुपए चढ़ावा

मंदिर न्यास द्वारा हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 के पहले छह महीनों (जनवरी से जून) में दानपात्र से 18.29 करोड़ रुपए नकद प्राप्त हुए हैं।

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