पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी का विवादित बयान: कहा-“हम 4% हिंदुओं को बर्दाश्त कर रहे हैं”

Islamabad : पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने अपने देश की अल्पसंख्यक हिंदू आबादी को लेकर एक बेहद विवादित और आपत्तिजनक टिप्पणी कर नया राजनीतिक बवंडर खड़ा कर दिया है. ‘मिस्टर 10 परसेंट’ के नाम से कुख्यात जरदारी ने जहरीले बोल बोलते हुए दावा किया है कि पाकिस्तान में 4 प्रतिशत हिंदू आबादी को ‘बर्दाश्त’ किया जा रहा है. उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की दयनीय स्थिति और वहां के नेतृत्व की संकीर्ण मानसिकता पर सवाल खड़े हो गए हैं.
“हम मुसलमान हैं, दूसरों को बर्दाश्त करते हैं”
इस्लामाबाद के यादगार-ए-फतह में आयोजित एक सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति जरदारी ने भारत और पाकिस्तान की विचारधाराओं की तुलना करने की कोशिश की. उन्होंने कहा, “भारतीयों का नजरिया अलग है, उनके मन में अपना एक एजेंडा है. भारतीय ‘अखंड भारत’ में विश्वास रखते हैं, लेकिन हम मुसलमान हैं, वे नहीं हैं. फिर भी हम ऐसी सोच वाले मुसलमान हैं जो दूसरों को बर्दाश्त करते हैं.”
जरदारी ने आगे दावा करते हुए कहा कि पाकिस्तान में 4 प्रतिशत हिंदू आबादी रहती है और वे उतने ही आजाद हैं जितने कहीं और हो सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि वे भारत जाने के बजाय पाकिस्तान में ही रहना ज्यादा पसंद करेंगे.
जरदारी का 4 प्रतिशत हिंदू आबादी का दावा पूरी तरह गलत
राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी द्वारा पाकिस्तान में हिंदू आबादी 4 प्रतिशत होने का किया गया दावा देश की आधिकारिक और हालिया जनगणना के आंकड़ों से पूरी तरह मेल नहीं खाता है. पाकिस्तान की 2023 की अधिकृत जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, देश में कुल हिंदू आबादी लगभग 52 लाख है, जो कुल आबादी का मात्र 2.17 प्रतिशत है. जरदारी का यह बयान जमीनी हकीकत और उनके अपने देश के सरकारी आंकड़ों से कोसों दूर है, जो उनकी बयानबाजी की पोल खोलता है.
पाकिस्तान में बढ़ता सैन्य दखल और राजनीतिक उठापटक
विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रपति जरदारी का यह भड़काऊ बयान ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान में राजनीतिक अनिश्चितता अपने चरम पर है और देश की सत्ता पर सेना प्रमुख आसिम मुनीर का दखल और नियंत्रण तेजी से बढ़ता जा रहा है. खबरों के मुताबिक, पाकिस्तान की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में बड़े बदलाव की योजनाएं चल रही हैं.
दिलचस्प बात यह है कि जिस सभा में जरदारी ने यह विवादित बयान दिया, उसका आयोजन भारत के साथ 2025 के एक काल्पनिक या छोटे संघर्ष (जिसे उन्होंने ‘मरका-ए-हक’ नाम दिया है) में अपनी तथाकथित जीत की याद में किया गया था, जिसकी सच्चाई जगजाहिर है.
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