लड़की बनकर करते थे चैटिंग, फिर मिलने बुलाते थे... ब्लैकमेल करने वाले मेरठ के हनीट्रैप गैंग की कहानी
मेरठ: उत्तर प्रदेश के मेरठ में पुलिस ने एक ऐसे कथित हनीट्रैप गैंग का पर्दाफाश करने का दावा किया है, जो सोशल मीडिया पर फर्जी महिला प्रोफाइल बनाकर लोगों को अपने जाल में फंसाता था। पुलिस के अनुसार, गैंग पहले खुद को युवती बताकर चैटिंग करता, फिर मुलाकात के लिए बुलाता और बाद में ब्लैकमेल कर मोटी रकम वसूलने की कोशिश करता था।
ऐसे बिछाते थे जाल
प्रारंभिक जांच के अनुसार, गिरोह के सदस्य सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर फर्जी महिला प्रोफाइल बनाते थे। इसके बाद वे लोगों से दोस्ती कर लंबे समय तक बातचीत करते और विश्वास जीतने की कोशिश करते थे।
जब सामने वाला व्यक्ति उनके झांसे में आ जाता, तो उसे किसी होटल, फ्लैट या सुनसान जगह पर मिलने के लिए बुलाया जाता था।
मुलाकात के बाद शुरू होता था ब्लैकमेल
पुलिस के मुताबिक, मुलाकात के दौरान पीड़ित को धमकाकर उसके आपत्तिजनक फोटो या वीडियो बनाने की कोशिश की जाती थी। इसके बाद बदनामी का डर दिखाकर उससे बड़ी रकम की मांग की जाती थी। कई मामलों में पीड़ित डर के कारण शिकायत भी नहीं करते थे।
पुलिस की कार्रवाई
शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और तकनीकी साक्ष्यों व पूछताछ के आधार पर कथित गैंग के सदस्यों को हिरासत में लिया। उनके कब्जे से मोबाइल फोन, सिम कार्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को निशाना बनाया।
लोगों के लिए पुलिस की सलाह
पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि:
- सोशल मीडिया पर अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट या मैसेज पर तुरंत भरोसा न करें।
- किसी अनजान व्यक्ति से मिलने जाने से पहले उसकी पहचान की पुष्टि करें।
- ब्लैकमेलिंग का शिकार होने पर डरने के बजाय तुरंत पुलिस से संपर्क करें।
- किसी भी प्रकार की धमकी या जबरन पैसे की मांग की सूचना तुरंत संबंधित थाने या साइबर हेल्पलाइन पर दें।
निष्कर्ष
ऑनलाइन दोस्ती और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते समय सतर्क रहना बेहद जरूरी है। फर्जी पहचान बनाकर लोगों को जाल में फंसाने और ब्लैकमेल करने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे में थोड़ी सी सावधानी आपको आर्थिक नुकसान और मानसिक परेशानी से बचा सकती है।
नोट: यह खबर उपलब्ध पुलिस जानकारी और प्रारंभिक जांच पर आधारित है। मामले की जांच जारी है, इसलिए आगे की जांच में तथ्य बदल सकते हैं।

No comments