एक्सीडेंट के चलते 20 की उम्र में छोड़ना पड़ा DSP का पद, कड़ी मेहनत से अब संभाली डिप्टी कलेक्टर की कुर्सी
करियर डेस्क, नई दिल्ली। जीवन में आने वाली रुकावटें और कठिनाइयां कई बार हमारे सपनों को तोड़ देती हैं, लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो इन परिस्थितियों को अच्छे से हैंडल करके अपना नाम रोशन करते हैं।
ऐसी ही कहानी है मध्य प्रदेश के प्रशांत उइके की है, जिन्होंने शारीरिक तकलीफों और सामाजिक तानों का मुकाबला करते हुए अपना व अपने परिवार का नाम रोशन किया।
20 की उम्र में बने DSP, लेकिन छोड़नी पड़ी नौकरी
प्रशांत की कहानी किसी फिल्मी कहानी जैसी लगती है। वर्ष 2016 में उन्होंने MPPSC की तैयारी शुरू की। कड़ी मेहनत और लगन के दम पर उन्होंने इस परीक्षा को केवल 20 की उम्र में पास कर लिया और DSP का पद हासिल किया। लेकिन, पद ग्रहण से पहले ही उनका एक्सीडेंट हो गया जिसमें उनकी जिंदगी बदल के रख दी। उनको इस एक्सीडेंट में गंभीर चोट लगी। पैर में चोट और गैंग्रीन के चलते उन्हें कई सर्जरियों से गुजरना पड़ा। फील्ड पर नौकरी करने में असमर्थ होने के चलते उनको इस पद को छोड़ना पड़ा।
सही होकर दोबारा शुरू कर दी तैयारी और बन गए डिप्टी कलेक्टर
DSP का पद जाने के बाद उनको लोगों ने ताने देने शुरू कर दिए। लोग कहने लगे कि उन्हें जबरदस्ती नौकरी से निकाला गया है। हालांकि, उन्होंने इन तानों को अपने ऊपर न लेकर दोबारा से तैयारी स्टार्ट कर दी। 9 जून 2023 को जब रिजल्ट आया तो इस बार उनका चयन डिप्टी कलेक्टर के पद पर हो गया। प्रशांत उइके की यह सफलता उन हजारों युवाओं के लिए मिसाल है जो जीवन में एक-दो असफलताओं या कठिनाइयों से निराश हो जाते हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन हों, अगर आपके अंदर संकल्प और धैर्य है तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।
कौन हैं प्रशांत
प्रशांत उइके मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल जिले बैतूल के रहने वाले हैं। उनकी शुरुआती पढ़ाई स्थानीय एक्सीलेंस स्कूल से पूरी हुई। इसके बाद जेएच कॉलेज से उच्च शिक्षा (स्नातक) पास किया। ग्रेजुएशन के तुरंत बाद ही उन्होंने प्रशासनिक सेवा में जाने का मन बना लिया और सही मार्गदर्शन के लिए दिल्ली जाकर कोचिंग जॉइन की।
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