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'अब कभी कानपुर नहीं जाऊंगी, बस अपने बेटे.', विनीत मिनोचा हत्याकांड में 21 दिन बाद जेल से रिहा होकर क्या बोली बहू शालू?

'अब कभी कानपुर नहीं जाऊंगी, बस अपने बेटे.', विनीत मिनोचा हत्याकांड में 21 दिन बाद जेल से रिहा होकर क्या बोली बहू शालू?


Kanpur Crime News: उत्तर प्रदेश के कानपुर के चर्चित दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में बड़ा मोड़ आ गया है. रतन ऑर्बिट अपार्टमेंट में हुए इस कत्ल के आरोप में 21 दिनों तक जेल में बंद रहने के बाद बहू शालू मिनोचा सोमवार शाम जेल से बाहर आ गईं.


जेल से रिहा होने के बाद शालू ने बेहद भावुक और स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘मैं शुरू से ही कह रही थी कि मैंने कुछ नहीं किया, मैं पूरी तरह निर्दोष हूं. आज कोर्ट के फैसले से वही साबित हुआ.’

जब शालू से पूछा गया कि पति सुब्रत ने उन्हें इस झूठे केस में क्यों फंसाया, तो उन्होंने कहा- मैं अभी इस पर कुछ नहीं कहना चाहती, क्योंकि मुझे सिर्फ एक ही पक्ष मालूम है. सुब्रत ने पुलिस से क्या कहा, मुझे नहीं पता क्योंकि मैं जेल में बंद थी.

“अब कानपुर नहीं जाऊंगी, परिवार में नोकझोंक आम बात है”

यह पूछे जाने पर कि क्या वो भविष्य में ससुर का बड़ा कारोबार संभालने कानपुर लौटेंगी? शालू ने दो टूक शब्दों में कहा कि वो अब कभी कानपुर वापस नहीं जाएंगी. वो सीधे लखनऊ के ठाकुरगंज स्थित अपने मायके (मम्मी-पापा के घर) जाएंगी और वहीं अपने बेटे के साथ रहेंगी.

पति और ससुर के रिश्तों पर शालू ने कहा, “थोड़ी-बहुत नोकझोंक और कहासुनी तो हर परिवार में होती है, हमारे यहां भी वही था. लेकिन यह बात कत्ल तक पहुंच जाएगी, ऐसा मैंने सपने में भी नहीं सोचा था. पति-पत्नी के बीच जो सामान्य विवाद होता है, वही हमारे बीच भी था.”

पति सुब्रत ने ससुर के चरित्र पर उठाए थे सवाल

जेल जाते वक्त पति सुब्रत मिनोचा ने अपने पिता विनीत मिनोचा के चरित्र और बहू के प्रति ‘बैड टच’ (गलत नीयत) को लेकर जो सवाल उठाए थे, उस पर शालू ने संक्षेप में कहा, “हां, सुब्रत ने जो (चरित्र के बारे में) कहा, वह गलत नहीं कहा है.” हालांकि, अपने खुद के संदर्भ में बैड टच की बात पर शालू ने कोई टिप्पणी नहीं की. जेल के दिनों को याद करते हुए शालू ने कहा, “मैंने जेल में हर पल सिर्फ अपने 4 साल के मासूम बेटे को याद किया. पुलिस कस्टडी के दौरान भी मैंने पुलिसकर्मियों से बेटे से बात कराने की गुहार लगाई थी, लेकिन बेटा ठीक से बात नहीं कर पाया. मैं बस उसका चेहरा देखना चाहती हूं.”

कोर्ट ने 50 हजार के बॉन्ड पर दी रिहाई

कानपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र में हुए इस हाई-प्रोफाइल मर्डर केस में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) प्रदीप कुमार शुक्ला की अदालत ने शालू मिनोचा के खिलाफ कोई स्वतंत्र और विश्वसनीय साक्ष्य न मिलने पर उनकी न्यायिक अभिरक्षा की रिमांड निरस्त कर दी. कोर्ट ने 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बॉन्ड पर उन्हें तत्काल रिहा करने का आदेश दिया.

विवेचक और निरीक्षक केशव कुमार तिवारी द्वारा अदालत में प्रस्तुत केस डायरी के अनुसार, विनीत मिनोचा की हत्या की पूरी साजिश उनके अपने बेटे सुब्रत मिनोचा ने रची थी और उसी ने सुपारी देकर कत्ल करवाया था. जांच में बहू शालू की इस साजिश में कोई संलिप्तता नहीं पाई गई, जिसके बाद पुलिस ने उनके खिलाफ विवेचना समाप्त कर दी. हालांकि, कोर्ट ने शर्त रखी है कि भविष्य में जब भी जांच या सुनवाई के लिए जरूरत होगी, शालू को कोर्ट या पुलिस के सामने पेश होना पड़ेगा.

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