'मेरा भाई कहां है?' 30 घंटे बाद भी नहीं मिला पवन, अस्पताल दर अस्पताल भटक रही बहन

नई दिल्ली. दिल्ली के सत्य निकेतन में हुआ भीषण इमारत हादसा केवल कंक्रीट और ईंटों का मलबा भर नहीं है, बल्कि यह उन दर्जनों परिवारों के लिए अंतहीन आंसुओं और खौफनाक इंतजार की वजह बन गया है, जिनके बच्चे इस हादसे का शिकार हुए हैं.
लेकिन हादसे के 30 घंटे बीत जाने के बाद भी एक बदहवास बहन अपने लापता भाई की तलाश में दिल्ली की सड़कों, अस्पतालों और प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काट रही है, लेकिन उसकी आंसुओं भरी पुकार का जवाब देने वाला कोई नहीं है. इस हादसे के बाद से एक लापता छात्र पवन की बहन प्रियांशी ने रुंधे गले और भीगी आंखों से अपनी आपबीती सुनाई. सुनिए इस लड़की ने अपने भाई और सिस्टम को लेकर क्या कहा?
प्रियांशी कहती है उसे इस भयानक हादसे की खबर किसी अधिकारी या पुलिस से नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के जरिए मिली. प्रियांशी कहती हैं, 'मुझे सोशल मीडिया से पता चला कि साउथ कैंपस के सत्य निकेतन में एक इमारत गिर गई है और मेरा भाई उसी के अंदर था. मैं बदहवास हालत में तुरंत यहां पहुंची, लेकिन मुझे कोई जानकारी नहीं दी जा रही है. न प्रशासन का कोई व्यक्ति मुझसे बात कर रहा है, न ही यह बता रहा है कि उसे रेस्क्यू किया गया है या नहीं, या वह किस अस्पताल में है.'
औरैया का पवन को खोज रही बहन
प्रियांशी ने बताया कि उसका भाई पवन महज एक महीना पहले ही इस पीजी में शिफ्ट हुआ था. दोनों भाई-बहनों के बीच हादसे की ठीक पहली रात ही बात हुई थी. कौन जानता था कि खिलखिलाकर बात करने वाला भाई अगली सुबह मलबे और खामोशी के ऐसे अंधेरे में गुम हो जाएगा.
अस्पताल के चक्कर और हर दरवाजे पर निराशा
हादसे की खबर मिलते ही प्रियांशी सबसे पहले एम्स ट्रॉमा सेंटर पहुंची. वहां भर्ती हर एक घायल छात्र के चेहरे से पट्टी हटाकर उसने अपने भाई को तलाशा. लेकिन अस्पताल के वार्डों से लेकर इमरजेंसी तक, उसे पवन का कोई सुराग नहीं मिला. 30 घंटे से अधिक का समय बीत चुका है. मलबे के ढेर के सामने खड़ी प्रियांशी की आंखें अब पथरा चुकी हैं. प्रशासन का कोई भी नुमाइंदा यह बताने की स्थिति में नहीं है कि पवन मलबे के नीचे दबा हुआ है या उसे किसी दूसरे अस्पताल ले जाया गया है. एक बहन के लिए यह इंतजार किसी जीते-जी मौत की सजा से कम नहीं है.

रातों-रात लोगों की किस्मत पलट गई.
भगवान करे पवन सलामत हो'
लापता पवन की तलाश में अब छात्र संगठन भी मदद के लिए आगे आए हैं. एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने बताया कि पवन की तस्वीर को तमाम छात्र समूहों और वाट्सऐप ग्रुप्स में शेयर किया गया है ताकि अगर वह कहीं भी किसी अस्पताल में भर्ती हो, तो उसकी पहचान की जा सके. विनोद जाखड़ ने कहा, 'हम लगातार प्रशासन के संपर्क में हैं और ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं कि पवन सुरक्षित हो.'
बयानबाजी और जांच कमेटियों का दौर जारी है, वहीं प्रियांशी का सिर्फ एक ही सवाल है, 'मेरा भाई पवन कहां है?' एक तरफ प्रशासनिक अमला अपनी पीठ थपथपाने में जुटा है, तो दूसरी तरफ एक बेबस बहन अस्पतालों के गलियारों में अपने भाई का नाम पुकारते हुए भटक रही है. सत्य निकेतन हादसे ने साफ कर दिया है कि जब लापरवाही का पहाड़ गिरता है, तो उसके मलबे में सिर्फ इमारतें नहीं, बल्कि मासूमों की सांसें और उनके अपनों की खुशियां भी दफन हो जाती हैं.
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