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हेलो... हेलो युवराज!, फोन पर चीखता रहा दोस्त और छा गया सन्नाटा, सुनें दुर्ग के होनहार छात्र की मां की करुण पुकार

हेलो... हेलो युवराज!, फोन पर चीखता रहा दोस्त और छा गया सन्नाटा, सुनें दुर्ग के होनहार छात्र की मां की करुण पुकार


ई दिल्ली. दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को हुए दर्दनाक पीजी हादसे ने कई घरों के चिराग बुझा दिए. इस भयानक त्रासदी का सबसे दर्दनाक और आंखें नम कर देने वाला पहलू छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से सामने आया है.

दिल्ली विश्वविद्यालय के मोतीलाल नेहरू कॉलेज में बीकॉम द्वितीय वर्ष का होनहार छात्र युवराज सोनी भी इस मलबे के नीचे दबकर अपनी जान गंवा बैठा. जो बेटा महज तीन दिन पहले अपनी मां के हाथों से बने खाने का स्वाद लेकर और छुट्टियों की खुशियां समेटकर दिल्ली लौटा था, उसकी मौत की खबर ने परिवार को पूरी तरह तोड़कर रख दिया है.

रविवार को दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे का वो एक-एक पल किसी खौफनाक सपने जैसा था. जिस वक्त पांच मंजिला इमारत ताश के पत्तों की तरह ढही, उस वक्त युवराज अपने जिगरी दोस्त आर्यन से फोन पर बात कर रहा था. हंसते-बोलते अचानक फोन के दूसरी तरफ से एक जोर का धमाका हुआ, धूल और चीखों का शोर गूंजा और फिर सब कुछ एकदम शांत हो गया.

आर्यन फोन पर लगातार चीखता रहा- हेलो… हेलो युवराज!

क्या हुआ भाई, बोल न!" लेकिन दूसरी ओर से कोई जवाब नहीं आया. घबराए आर्यन ने बार-बार फोन मिलाया, लेकिन कॉल कनेक्ट नहीं हुई. कुछ ही देर में जब सत्य निकेतन में बहुमंजिला इमारत गिरने की खबर फैली, तो आर्यन के पैर तले जमीन खिसक गई. वह बदहवास हालत में अपने दोस्त को ढूंढने सत्य निकेतन पहुंचा. घंटों तक मलबे और अस्पतालों के चक्कर काटने के बाद आखिरकार उसे एम्स ट्रॉमा सेंटर से युवराज की मौत की खौफनाक खबर मिली. अपने जिगरी यार को खोने का गम आर्यन के सिर पर पहाड़ बनकर टूटा है.

मां की करुण पुकार…'बेटा बोला था, जल्दी वापस आऊंगा…'

दुर्ग में युवराज के घर जैसे ही उसकी मौत की खबर पहुंची, पूरे इलाके में मातम पसर गया. युवराज अपने माता-पिता का इकलौता सहारा था और सीए बनने का सपना लेकर दिल्ली गया था. युवराज की मां का रो-रोकर बुरा हाल है. वे बार-बार बेसुध होकर गिर पड़ती हैं और उनकी करुण पुकार हर किसी का कलेजा चीर रही है. बहन के बेसुध पड़ी है और परिजन उसका डेड बॉडी लेकर दुर्ग के रास्ते में हैं.

'अगली बार दुर्गा पूजा में आऊंगा'

मां का रो-रोकर बुरा हाल है. अपने चिराग को खोने का गम उसे बदहवास कर कर दिया है. वह सिसक-सिसक कर बोलती है, 'अभी तो तीन दिन पहले ही मेरा बच्चा हंसते हुए दिल्ली गया था… बोला था मां ध्यान रखना, छुट्टियां खत्म हो गई हैं, अब अगली बार दुर्गा पूजा में आऊंगा तो कुछ खाने के लिए बनाकर रखना… हे भगवान! मेरे बच्चे का क्या कसूर था? मुझे भी अपने बेटे के पास बुला ले…'

दिल्ली पीजी हादसा और एक मां की सिसकियां, तमाम लोगों के गालों पर तमाचा

दिल्ली में पीजी हादसा एक मां की सिसकियां उन तमाम लोगों के गालों पर तमाचा है, जिनकी लापरवाही और पैसों की हवस के कारण जर्जर इमारतों को मौत का कुआं बना दिया जाता है. युवराज सोनी दिल्ली विश्वविद्यालय का एक बेहद मेधावी और मिलनसार छात्र था. परिजनों ने बताया कि वह छुट्टियों में दुर्ग आया हुआ था और तीन दिन पहले ही दिल्ली लौटा था. किसी को क्या पता था कि जिस पीजी में वह अपने बेहतर भविष्य की उम्मीदें बुन रहा था, वही उसकी कब्रगाह बन जाएगा.

सत्य निकेतन हादसे ने एक बार फिर दिल्ली में चल रहे अवैध पीजी माफियाओं और जर्जर इमारतों पर आंखें मूंदे बैठे सिस्टम की पोल खोल दी है. एक तरफ जहां दोस्त आर्यन की आंखों से आंसू थम नहीं रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दुर्ग में एक मां अपने बुझ चुके चिराग के शव का इंतजार कर रही है.

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