ओंकारेश्वर कोठी हेलीपैड में भारी लोहे का गेट गिरने से 4 साल की बच्ची की मौत, 5 साल का मासूम गंभीर.
Khandwa News: खंडवा जिले में स्थित ओंकारेश्वर के पास शुक्रवार शाम एक दर्दनाक हादसा हो गया. ग्राम पंचायत कोठी के अंतर्गत कोठी हेलीपैड पुनर्वास क्षेत्र में शाम करीब 5 बजे लोहे का एक भारी गेट अचानक गिर गया.
इस हादसे में गेट के नीचे दबने से चार साल की बच्ची की मौत हो गई. वहीं, एक पांच साल का बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया है. इस घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है.
गेट पर लटककर खेल रहे थे बच्चे
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम को कोठी हेलीपैड के पीछे बने लोहे के गेट पर चार-पांच बच्चे लटककर खेल रहे थे. इसी दौरान लोहे का गेट अचानक उखड़कर गिर गया और बच्चे उसके नीचे दब गए. उस समय पास ही शुभम, गणेश, अविनाश, सतीश और विजय नाम के लड़के क्रिकेट खेल रहे थे.
लड़कों ने दौड़कर बच्चों को बाहर निकाला
हादसा होते ही क्रिकेट खेल रहे लड़कों ने तुरंत मौके पर पहुंचकर भारी गेट उठाया. उन्होंने नीचे दबे बच्चों को बाहर निकाला. इस हादसे में चार वर्षीय बच्ची दिव्या (पिता शंभू) के सिर में गंभीर चोट लगी और खून बहने लगा. लड़कों ने तुरंत परिजनों को इसकी सूचना दी. इसके बाद बिना समय गंवाए परिजन बच्ची को बाइक से ओंकारेश्वर के सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे.
सरकारी अस्पताल की व्यवस्था पर उठे सवाल
ओंकारेश्वर के सरकारी अस्पताल में चिकित्सक डॉ. रवि वर्मा ने इमरजेंसी सुविधा उपलब्ध न होने की बात कही. उन्होंने परिजनों को खुद एंबुलेंस बुलाकर बच्चों को सनावद ले जाने की सलाह दी. परिजनों के अनुसार, एंबुलेंस के लिए फोन करने के करीब 20 से 25 मिनट बाद वाहन पहुंचा. इसके बाद घायल बच्चों को सनावद के एक निजी अस्पताल ले जाया गया.
इलाज के दौरान बच्ची की मौत
सनावद के निजी अस्पताल में दिव्या को आईसीयू में भर्ती किया गया. वहां इलाज के दौरान दिव्या की मौत हो गई. वहीं गंभीर रूप से घायल पांच वर्षीय बच्चे यश (पिता रोहित) का इलाज फिलहाल जारी है।
सुरक्षा और रखरखाव में बड़ी लापरवाही
हादसे के बाद हेलीपैड परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. भारी गेट के रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी थी, यह जांच का विषय बन गया है. ग्रामीणों ने मांग की है कि परिसर के सभी गेटों की जांच कराई जाए और जर्जर गेट हटाए जाएं.
स्वास्थ्य विभाग से जवाबदेही तय करने की मांग
हादसे में घायल बच्ची को समय पर आपातकालीन इलाज न मिलने और एंबुलेंस के इंतजार पर ग्रामीणों ने नाराजगी जताई है. ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि सरकारी अस्पताल में आपातकालीन इलाज न मिलने पर मरीजों के रेफरल की तुरंत व्यवस्था कौन करेगा? ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से इस मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की है.
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