5 बहनों का आखिरी रक्षाबंधन! सागर की जहरीली शराब ने इकलौते भाई को छीना, शिरडी से राखी बंधवाने आया था

Sagar News: बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है. हर नई मौत के साथ किसी न किसी परिवार की खुशियां मातम में बदल रही हैं. इसी बीच दमोह सांसद राहुल सिंह लोधी और बंडा विधायक वीरेंद्र सिंह लंबरदार की टीम ग्राम छापरी पहुंची.
वहां का मंजर देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं. ग्राम छापरी के एक परिवार में अपाहिज पिता और पांच बहनें हैं. इस परिवार में वह इकलौता भाई था और वही पूरे घर का सहारा था. वह अपनी बहनों से राखी बंधवाने के लिए शिरडी से घर आया था. बहनों ने बड़े प्यार से अपने भाई की कलाई पर राखी बांधी थी और उसकी लंबी उम्र की दुआ मांगी थी.
अधूरी रह गईं खुशियां
लेकिन, किसी को नहीं पता था कि यह पांचों बहनों का अपने भाई के साथ आखिरी रक्षाबंधन होगा. कल ही जहरीली शराब ने उस भाई की जिंदगी छीन ली. जिस कलाई पर कल तक राखी सजी थी, आज वहां सिर्फ भाई की यादें बाकी हैं. पांचों बहनों की आंखों में सिर्फ आंसू हैं और दिल में एक ही सवाल है कि भैया उन्हें छोड़कर क्यों चले गए. वहीं, जिस अपाहिज पिता का सहारा उसका बेटा था, आज वह पिता अपने बेटे को पुकार भी नहीं सकता. घर के भीतर भाई की चहकती आवाज बंद हो चुकी है और चारों तरफ उसकी यादें फैली हैं.
ग्राम बमूरा में मां का इंतज़ार
वहीं ग्राम बमूरा में एक मां आज भी अपने घर की चौखट की ओर देख रही है. मां का दिल यह मानने को तैयार नहीं है कि उसका बेटा अब कभी लौटकर घर नहीं आएगा.
उजड़ते परिवार और प्रशासन पर सवाल
जहरीली शराब के कारण कहीं बेटियों ने अपने पिता और दादा को एक साथ खो दिया है. कहीं बूढ़े मां-बाप ने अपना जवान बेटा खो दिया है. कहीं परिवार में अकेला कमाने वाला व्यक्ति हमेशा के लिए चला गया है. ये सिर्फ मौतों के आंकड़े नहीं हैं, ये पूरी तरह उजड़ते हुए परिवार हैं. किसी मां की गोद सूनी हुई है, किसी बहन की कलाई से भाई का साथ छिना है और किसी मासूम बच्चे के सिर से पिता का साया उठ गया है.
श्मशान घाट से उठ रहा धुआं
श्मशान घाट में उठता धुआं सिर्फ चिता का धुआं नहीं है, वह परिवारों के टूटे हुए सपनों का धुआं है. मौतों का सिलसिला लगातार जारी है. सवाल सिर्फ पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई का नहीं है, सवाल उन परिवारों के दर्द का भी है, जिनकी जिंदगी अब कभी पहले जैसी नहीं होगी. जो चले गए, वे वापस नहीं आएंगे, लेकिन अब कम से कम किसी दूसरी बहन की राखी अधूरी न रहे और किसी मां को अपने बेटे की अर्थी न देखनी पड़े- यही सबसे बड़ी जिम्मेदारी है.
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