सीधी में सड़क नहीं, डोली-खटोली और कंधों का सहारा, गांव की लाडली बहन ने वीडियो बनाकर प्रशासन को आईना दिखाया.
सीधी जिले में विकास के दावों के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो गांवों तक मूलभूत सुविधाओं की पहुंच पर सवाल खड़े करती है. करीब एक हजार से ज्यादा आबादी वाले छुहिया गांव में सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीण आज भी मरीजों को डोली-खटोली के सहारे अस्पताल पहुंचाने को मजबूर हैं.
गांव के एक बुजुर्ग की तबीयत बिगड़ी तो एंबुलेंस घर तक नहीं पहुंच सकी. इसके बाद ग्रामीणों ने कीचड़ भरे रास्ते में करीब दो किलोमीटर तक डोली-खटोली के सहारे बुजुर्ग को अस्पताल पहुंचाया. गांव की एक लाडली बहन ने बघेली भाषा में वीडियो बनाकर इस पूरी समस्या को सामने रखा है. वीडियो में ग्रामीणों की परेशानी के साथ गर्भवती महिला की पीड़ा भी दिखाई गई है. मामले में प्रभारी मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा है कि गांव में सड़क निर्माण के लिए जनप्रतिनिधि और प्रशासन प्रयासरत हैं.
सीधी जिले के छुहिया गांव में सड़क के अभाव में ग्रामीणों की जिंदगी मानो डोली और खटोली तक सिमट गई है. बारिश के दिनों में गांव तक पहुंचने वाला रास्ता कीचड़ से भर जाता है. ऐसे में गांव के लोगों के लिए अस्पताल, बाजार और दूसरी जरूरी सुविधाओं तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है. बताया जा रहा है कि गांव की आबादी एक हजार से ज्यादा है, लेकिन सड़क नहीं होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी उस वक्त होती है. जब किसी ग्रामीण की तबीयत बिगड़ जाती है, गांव के एक बुजुर्ग की तबीयत खराब हुई तो एंबुलेंस गांव के अंदर तक नहीं पहुंच सकी.
बुजुर्ग ही नहीं, गर्भवती महिलाएं भी मजबूर
मजबूरी में ग्रामीणों ने डोली-खटोली तैयार की और बुजुर्ग को करीब दो किलोमीटर तक पैदल ले जाकर अस्पताल पहुंचाया. इस पूरी समस्या को गांव की एक लाडली बहन ने अपने मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड किया और बघेली भाषा में वीडियो बनाकर सरकार और प्रशासन से सड़क की मांग उठाई. वीडियो में सिर्फ बुजुर्ग की परेशानी ही नहीं, बल्कि गांव की गर्भवती महिलाओं की मजबूरी भी सामने आई है. ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं होने से गर्भवती महिलाओं को अस्पताल तक ले जाना बेहद मुश्किल हो जाता है. बारिश के दौरान हालात और ज्यादा खराब हो जाते हैं.
ग्रामीणों की समस्या सामने आने के बाद अब सवाल यही है कि आखिर विकास की मुख्यधारा से यह गांव कब जुड़ेगा? सड़क सिर्फ आवागमन का जरिया नहीं, बल्कि अस्पताल, शिक्षा, रोजगार और दूसरी मूलभूत सुविधाओं तक पहुंच की सबसे जरूरी कड़ी है. ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी यह तस्वीर अब जिम्मेदारों तक पहुंचेगी और सड़क निर्माण का रास्ता जल्द साफ होगा. मामले में प्रभारी मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा कि पहले सीधी तक पहुंचने के लिए भी अच्छी सड़क नहीं थी. भाजपा सरकार के आने के बाद सीधी में बेहतर सड़कें बनी हैं. उन्होंने कहा कि जिस गांव में सड़क नहीं है, वहां भी सड़क बनाने के लिए जनप्रतिनिधि और प्रशासन प्रयासरत हैं.
मरीज को एंबुलेंस के बजाय ग्रामीणों के कंधों का सहारा
प्रभारी मंत्री के आश्वासन के बाद अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर है. सवाल यह है कि डोली-खटोली के सहारे अस्पताल पहुंचने की यह मजबूरी आखिर कब खत्म होगी? क्या बारिश और कीचड़ से जूझ रहे छुहिया गांव तक पक्की सड़क पहुंचेगी? क्योंकि जब किसी मरीज को एंबुलेंस के बजाय ग्रामीणों के कंधों का सहारा लेना पड़े, तो यह सिर्फ एक गांव की परेशानी नहीं, बल्कि सड़क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की जमीनी हकीकत पर बड़ा सवाल है. फिलहाल ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की मांग सरकार और प्रशासन के सामने रख दी है. अब देखना होगा कि लाडली बहन के वीडियो से सामने आई छुहिया गांव की यह तस्वीर कब बदलती है और ग्रामीणों को डोली-खटोली के बजाय पक्की सड़क का सहारा कब मिलता है.

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