अजीब सी आवाज और... मलबे में दबकर जिंदा बचे बी.कॉम छात्र नितेश ने बताई सत्य निकेतन हादसे की आपबीती

साउथ दिल्ली का सत्य निकेतन, जो दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स के लिए कैफे, चिल-वाइब्स और पीजी का सबसे बड़ा हब माना जाता है रविवार दोपहर अचानक एक भयानक चीख-पुकार में बदल गया. दोपहर के करीब 1:30 बजे जब स्टूडेंट्स अपने वीकेंड का खाना खा रहे थे दशकों पुरानी एक पीजी बिल्डिंग भरभराकर गिर गई. इस हादसे में 7 लोगों की जान चली गई और 12 लोगों को मलबे से निकाला गया.
मलबे के नीचे से सही-सलामत निकले बी.कॉम सेकंड ईयर के स्टूडेंट नितेश चिब ने जो आपबीती बताई उसे सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाएंगे.
लंच टाइम, पानी का शोर और सीढ़ियों की तरफ वो जानलेवा रेस
जम्मू के रहने वाले 19 साल के नितेश चिब हादसे के वक्त अपने रूम में लंच कर रहे थे. तभी अचानक एक ऐसी आवाज आई जिसने उनके होश उड़ा दिए. हादसे को याद करते हुए नितेश ने बताया कि दोपहर के भोजन के दौरान उन्हें नल से तेजी से बहते पानी जैसी एक अजीब आवाज सुनाई दी. खतरे का अहसास होते ही वे तुरंत अपने दोस्त नीरज के कमरे की ओर भागे.
नितेश के भाई ने उनके हवाले से पूरी घटना बयां करते हुए कहा, "उसने अपने दोस्त से उस आवाज के बारे में पूछा, लेकिन आवाज और तेज हो गई. फिर वे तेजी से सीढ़ियों की ओर भागे. इससे पहले कि वे नीचे उतर पाते, इमारत ढह गई." किस्मत अच्छी थी कि नितेश की जान बच गई, लेकिन वे घायल हो गए. तीन महीने का एडवांस किराया दे चुके नितेश के भाई का दर्द छलक पड़ा, "अगर उसे कुछ हो जाता तो उनके परिवार पर क्या गुजरती?"
एक दिन पहले शिफ्ट हुए थे NSUI मेंबर नीरज
हादसे में घायल हुए लोगों में पठानकोट के रहने वाले NSUI सदस्य नीरज बावा भी शामिल हैं. नीरज के दोस्त नकुल ने बताया कि वे चुनाव प्रचार में बिजी रहने के बाद हादसे से ठीक एक दिन पहले ही इस पीजी में रहने आए थे. गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती बावा के दोस्त नकुल ने बेहद इमोशनल होकर कहा, "…अगर हमें जरा भी पता होता कि ऐसा कुछ होने वाला है तो हम उसे कभी वहां नहीं जाने देते."
हादसे के वक्त सिर्फ स्टूडेंट्स ही नहीं बल्कि दिहाड़ी मजदूर भी उस बिल्डिंग में काम कर रहे थे. वेल्डर का काम करने गए परमलाल अनुरागी की पत्नी मलबे के ढेर के पास अपने पति को तलाशती दिखीं. उन्होंने रोते हुए बताया, "वह काम पर जा रहे थे. उन्होंने मुझसे अपना खाना पैक करने के लिए कहा था. वह एक ग्राहक के घर वेल्डिंग का काम करने गए थे." पिछले 24 घंटे से अपने पति का फोन ट्राई कर रहीं पत्नी बदहवास होकर बस यही कह रही थीं, "कल सुबह से ही मैं उन्हें ढूंढ़ नहीं पा रही हूं. मुझे नहीं पता कि उनके साथ क्या हुआ."
"ऐसी घटना के बाद मैं यहां नहीं रह पाऊंगा"
पास के ही एक दूसरे पीजी में रहने वाले राहुल नाम के स्टूडेंट ने अपनी आंखों के सामने इस पूरी इमारत को गिरते देखा. इस भयानक हादसे ने उन्हें पूरी तरह हिलाकर रख दिया है. राहुल ने बताया, "मैंने पूरी घटना देखी और मैं बुरी तरह हिल गया. मैं पास ही एक पीजी में रहता हूं और अब मैं यह देखने की कोशिश कर रहा हूं कि क्या मैं कुछ छात्रों की मदद कर सकता हूं." इस खौफनाक मंजर को देखने के बाद राहुल अब सत्य निकेतन छोड़ने का मन बना चुके हैं. उन्होंने कहा, "ऐसी घटना देखने के बाद मैं यहां नहीं रह पाऊंगा."
हादसे में यूपी के रहने वाले बी.कॉम सेकंड ईयर के छात्र आदित्य कुमार भी गंभीर रूप से घायल हैं. आदित्य के दोस्त अमन ने बताया, "वह घर में सबसे बड़े बेटे हैं और उनकी एक बहन भी है. अगर उन्हें कुछ हो गया, तो उनका परिवार कैसे गुजारा करेगा?" इस दर्दनाक हादसे ने पूरे साउथ कैंपस के पीजी कल्चर और जर्जर इमारतों की मेंटेनेंस पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है.
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