बच्चे ने खोली पोल, कमाने वाले पिता को कहा 'पल्ला झाड़ने वाले पापा', बताया स्ट्रॉंग बॉन्डिंग की कमी का लूज कनेक्शन

Father Child Bonding: इन दिनों सोशल मीडिया पर एक बच्चे ने वीडियो में पिता के पास समय की कमी को लेकर अपनी भावनाओं को व्यक्त करके सभी का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया है. कई घरों में पिता की जिम्मेदारी कमाने और परिवार की जरूरतें पूरी करने तक सीमित समझ ली जाती है.
सुबह जल्दी काम पर निकलना, देर शाम लौटना और बच्चों की हर जरूरत पूरी करने की कोशिश यही एक अच्छे पिता की तस्वीर बना दी जाती है. लेकिन बच्चे के लिए पिता का साथ सिर्फ फीस भरने या खिलौने दिलाने तक सीमित नहीं होता. उसे अपने दिन की छोटी-बड़ी बातें सुनाने वाला, उसके सवालों पर ठहरने वाला और मुश्किल समय में पास बैठने वाला पिता भी चाहिए.
एक बच्चे की कही बात ने इसी फर्क को बेहद सरल तरीके से सामने रखा. उसने अपने पिता को 'पल्ला झाड़ने वाले पापा' कह दिया. सुनने में यह बात चुभ सकती है, लेकिन इसके पीछे एक ऐसी शिकायत छिपी है, जिसे शायद कई कामकाजी माता-पिता अनजाने में नजरअंदाज कर देते हैं.
पापा कहते हैं- 'मेरे पास समय नहीं है'
आज की भागदौड़ में 'मेरे पास समय नहीं है' सबसे आम जवाब बन गया है. पिता ऑफिस, कारोबार या काम की व्यस्तताओं में उलझे रहते हैं. घर लौटने के बाद भी मोबाइल, ईमेल या दूसरे काम उनका ध्यान बांटते रहते हैं. बच्चा जब अपनी कोई बात बताना चाहता है और उसे बार-बार बाद में सुनने का जवाब मिलता है, तो धीरे-धीरे वह अपनी बातें साझा करना कम कर सकता है. समस्या यह नहीं कि पिता काम करते हैं, बल्कि यह है कि बच्चे को उनके साथ जुड़ने के लिए लगातार इंतजार करना पड़ता है.
हर काम की जिम्मेदारी मां पर होती है
घर में बच्चे की पढ़ाई, स्कूल की तैयारी, होमवर्क, खाना, डॉक्टर की अपॉइंटमेंट और छोटी-छोटी जरूरतों का जिम्मा अक्सर मां संभालती हैं. पिता आर्थिक जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देते हुए मान लेते हैं कि बाकी काम अपने आप हो रहे हैं.
बच्चे की नजर में यह दूरी बन जाती है
बच्चा इन जिम्मेदारियों को अलग-अलग नहीं देखता. उसके लिए जो व्यक्ति रोज उसके साथ बैठता है, उसकी कॉपी देखता है और स्कूल की बातें सुनता है, वही सबसे ज्यादा उपलब्ध नजर आता है. पिता अगर केवल जरूरत के समय दिखाई दें, तो बच्चा उनसे भावनात्मक रूप से उतना खुला महसूस न करे.
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फिर पिता करते हैं शिकायत
दिलचस्प बात यह है कि कुछ पिता बाद में यही शिकायत करते हैं कि बच्चा उनसे अपनी बातें शेयर नहीं करता. वह मां के ज्यादा करीब है या दोस्तों के साथ ज्यादा समय बिताता है. लेकिन मजबूत रिश्ता अचानक नहीं बनता. अगर पिता ने बचपन में बच्चे के साथ बातचीत, खेल और रोजमर्रा के छोटे पलों के लिए समय निकाला है, तो किशोरावस्था में भी बातचीत की गुंजाइश बनी रहती है.
बचपन से बनता है कनेक्शन
पिता और बच्चे की बॉन्डिंग के लिए हर दिन घंटों निकालना जरूरी नहीं. साथ बैठकर खाना खाना, स्कूल से लौटने पर दिन के बारे में पूछना, रात में कुछ मिनट बातचीत करना या सप्ताह में एक छोटा-सा काम साथ करना भी काफी मायने रख सकता है.
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