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आईआईटी मंडी के शोध में हुआ बड़ा खुलासा, हमीरपुर-मंडी में मिला यूरेनियम, कुल्लू में रिसर्च टीम के हाथ रहे खाली


परमाणु एनर्जी के लिए जिस यूरेनियम की तलाश पूरा विश्व कर रहा है, वह हमीरपुर और मंडी की जमीन के भीतर पानी के साथ मिला है। परमाणु बम सहित परमाणु बिजली घरों के संचालन में उपयोग होने वाला यूरेनियम हमीरपुर और मंडी जिला के कुछ क्षेत्रों में पाया गया है। यह खुलासा आईआईटी मंडी के शोध में हुआ है और इसकी पूरी जानकारी भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र और परमाणु ऊर्जा विभाग को दी गई है। 

मंडी आईआईटी ने यह शोध कार्य परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन बोर्ड ऑफ रिसर्च इन न्यूक्लियर साइंसेज द्वारा वित्तपोषित प्रोजेक्ट के तहत किया है। मंडी आईआईटी के शोधकर्ताओं ने हमीरपुर और मंडी जिला के भूजल में यूरेनियम की उपस्थिति का विस्तृत अध्ययन किया है। अध्ययन में पाया गया कि दोनों ही जिलों के कुछ क्षेत्रों में यूरेनियम की सांद्रता अपेक्षाकृत अधिक है। 

हमीरपुर और मंडी में किए गए अध्ययन में यूरेनियम की औसत सांद्रता मात्र 2.96 पीपीबी पाई गई, जबकि अधिकतम यूरेनियम 18.93 पीपीबी तक पाया गया है। मंडी और हमीरपुर के तीन-तीन स्थानों में भूजल के साथ यूरेनियम पाया गया है। मंडी जिला में द्रंग, गुम्मा और झटींगरी में यूरेनियम मिला है। कुल्लू जिला में किए गए शोध में कोई यूरेनियम नहीं पाया गया है।

हमीरपुर जिला के सबंध में शोधपत्र प्रकाशित कर दिया गया है, जबकि कुल्लू और मंडी में यूरेनियम मिलने के सबंध में अभी शोध पत्र प्रकाशित नहीं हुए हैं। हमीरपुर के चकमोह, पटलांधर और हमीरपुर शहर के भू जल में यूरेनियम पाया गया है। शोध में एक महत्वपूर्ण बात सामने आई कि जहां यूरेनियम अधिक मिला, वहां नाइट्रेट की मात्रा भी ऊंची पाई गई। 

हमीरपुर, लदरौर और चकमोह वाले क्षेत्र में नाइट्रेट की मात्रा भी अधिक पाई गई है। आईआईटी मंडी के प्रोफेसर डेरिक्स पी शुक्ला के नेतृत्व में हुए इस अध्ययन से स्पष्ट होता है कि हमीरपुर और मंडी के भूजल में यूरेनियम की उपस्थिति प्राकृतिक भूवैज्ञानिक कारणों से है। प्रोफेसर शुक्ला बताते हैं कि शोध के सारे दस्तावेज भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र और परमाणु ऊर्जा विभाग को मुहैया करवा दिए हैं।

46 भूजल नमूनों के विश्लेषण के बाद मिली सफलता

हमीरपुर जिला भर से कुल 46 भूजल नमूनों का विश्लेषण किया गया है। यूरेनियम की सबसे अधिक सांद्रता तीन स्थानों पर दर्ज की गई है। हमीरपुर शहर में 18.93 पीपीबी (माइक्रोग्राम प्रति लीटर), पटलांदर में 15.53 पीपीबी और चकमोह में भी इसी अनुपात में पानी के अंदर यूरेनियम पाया गया है। ये क्षेत्र जिला के मध्य तथा दक्षिण-पूर्वी हिस्से में स्थित हैं। 

यूरेनियम की मुख्य सांद्रता उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व प्रवृत्ति रेखा के साथ पाई गई है। शोध में बताया गया है कि हमीरपुर क्षेत्र में ऊंची सांद्रता अस्तोथा, लोहारियन और सिबल के खनिजीकृत क्षेत्र के निकट होने के कारण है। पूरा जिला शिवालिक समूह की चट्टानों सैंडस्टोन, समूहक, शेल आदि से बना है। यहां से प्राकृतिक रूप से यूरेनियम का रिसाव (लीचिंग) हो रहा है। मंडी के गुम्मा, द्रंग और झटींगरी के भूजल में यूरेनियम पाया गया है।

40 सालों से तलाश रहा भाभा

शिवालिक की पहाडिय़ों में यूरेनियम खनिजीकरण का अन्वेषण लगभग चार दशकों से परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय द्वारा किया जा रहा है। यह भारत सरकार के परमाणु ऊर्जा विभाग के अंतर्गत आता है। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र भी यूरेनियम तथा अन्य रेडियोधर्मी तत्त्वों के अध्ययन और निगरानी से जुड़ा प्रमुख संस्थान है। हमीरपुर में जल नमूनों के विश्लेषण में यूरेनियम मिला।

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