टैक्सपेयर की मौत के बाद घरवालों को आया टैक्स नोटिस तो कौन भरेगा पैसा? जानें पूरा नियम

किसी व्यक्ति की मौत के साथ उसकी इनकम टैक्स की जिम्मेदारियां हमेशा खत्म नहीं हो जातीं. अगर मृत व्यक्ति का कोई पुराना ITR दाखिल नहीं हुआ है, टैक्स बकाया है या इनकम टैक्स विभाग की कोई कार्रवाई चल रही है, तो उसकी जानकारी और जवाब देने की जिम्मेदारी कानूनी वारिस पर आ सकती है.
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि वारिस को अपनी जेब से मृत व्यक्ति का टैक्स चुकाना होगा. आम तौर पर टैक्स की वसूली मृत व्यक्ति की छोड़ी हुई संपत्ति से की जाती है. ऐसे में परिवार के लिए यह समझना जरूरी है कि नोटिस आने पर क्या कदम उठाने हैं और संपत्ति को लेकर किन बातों का ध्यान रखना है.
मौत के बाद कौन भरेगा ITR और टैक्स?
अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु वित्त वर्ष के बीच में हो जाती है, तो उसकी मौत से पहले तक हुई कमाई का ITR दाखिल करना पड़ सकता है. इसके अलावा अगर पिछले वर्षों का कोई ITR बाकी है, तो उसे भी पूरा करना पड़ सकता है. इसके लिए मृत व्यक्ति की ओर से उसका कानूनी प्रतिनिधि या वारिस इनकम टैक्स से जुड़े काम संभालता है. एक बात ये ध्यान रखें कि व्यक्ति की मौत के बाद होने वाली कमाई को मृत व्यक्ति के ITR में शामिल नहीं किया जाएगा. इसलिए वारिस को पहले बैंक अकाउंट, Form 26AS, AIS, TIS और निवेश से जुड़े रिकॉर्ड देखकर पूरी जानकारी आपके पास होनी चाहिए.
Legal Heir के तौर पर रजिस्ट्रेशन जरूरी
मिंट की रिपोर्ट के अनुसार, इनकम टैक्स विभाग के पोर्टल पर खुद को लीगल हायर (Legal Heir) यानी कानूनी वारिस के तौर पर रजिस्टर करना होता है. इसके लिए मृत व्यक्ति का डेथ सर्टिफिकेट, दोनों के PAN से जुड़े डॉक्यूमेंट्स और वारिस होने का प्रमाण देना पड़ सकता है. इसमें वसीयत, सक्सेशन सर्टिफिकेट या पोर्टल पर स्वीकार किया जाने वाला अन्य प्रमाण शामिल हो सकता है.
रजिस्ट्रेशन की जांच के बाद एसेसिंग ऑफिसर या Centralised Processing Centre से मंजूरी मिलती है. मंजूरी मिलने के बाद कानूनी प्रतिनिधि मृत व्यक्ति का ITR दाखिल और ऑनलाइन वेरिफाई कर सकता है. अगर मृत्यु ITR की आखिरी तारीख के आसपास हुई हो और समय पर रिटर्न दाखिल करना मुश्किल हो, तो उचित कारण बताते हुए अतिरिक्त समय की मांग भी की जा सकती है.
टैक्स नोटिस आए तो वारिस क्या करे?
मृत व्यक्ति की मौत के बाद उसके नाम पर नया नोटिस भेजना सही प्रक्रिया नहीं है. अगर ऐसा नोटिस आता है, तो कानूनी प्रतिनिधि उसे चुनौती दे सकता है. वहीं, जो टैक्स केस व्यक्ति की जिंदगी में शुरू हो चुका था, वह उसकी मौत के बाद भी कानूनी प्रतिनिधि के जरिए आगे चल सकता है. इसलिए नोटिस मिलने पर उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. सबसे पहले यह देखें कि नोटिस किस मामले से जुड़ा है, उसकी तारीख क्या है और जवाब देने की अंतिम तारीख कब है.
वारिस कितना पैसा देगा?
आम तौर पर कानूनी वारिस की जिम्मेदारी मृत व्यक्ति की छोड़ी हुई संपत्ति की कीमत तक सीमित रहती है. यानी अगर मृत व्यक्ति पर ₹5 लाख का टैक्स बकाया है लेकिन उसकी उपलब्ध संपत्ति ₹3 लाख की है, तो सामान्य स्थिति में वारिस की जिम्मेदारी अपनी निजी कमाई से बाकी ₹2 लाख चुकाने की नहीं होती.
हालांकि, टैक्स बकाया रहते हुए मृत व्यक्ति की संपत्ति को जल्दबाजी में बेचने, बांटने या गिरवी रखने से बचना चाहिए. कुछ परिस्थितियों में ऐसा करने पर कानूनी प्रतिनिधि की व्यक्तिगत जिम्मेदारी बन सकती है, हालांकि वह भी संबंधित संपत्ति की कीमत तक सीमित रहती है.
इसलिए सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि पहले मृत व्यक्ति के सभी टैक्स रिकॉर्ड और बकाया की जानकारी जुटाई जाए, लीगल हायर के तौर पर रजिस्ट्रेशन कराया जाए और विभाग के नोटिस का समय पर जवाब दिया जाए। इसके बाद ही संपत्ति के बंटवारे या ट्रांसफर का फैसला लेना बेहतर होता है.
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