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सत्य निकेतन हादसा: अब ढहाई जाएंगी ये इमारतें भी, प्रशासन की दो टूक- अब न कोई माफी होगी न रियायत!

सत्य निकेतन हादसा: अब ढहाई जाएंगी ये इमारतें भी, प्रशासन की दो टूक- अब न कोई माफी होगी न रियायत!


Satya Niketan Hadsa: सत्य निकेतन में पीजी बिल्डिंग गिरने के हादसे के बाद अब प्रशासन आसपास की जर्जर इमारतों को लेकर भी अलर्ट हो गया है. हादसे वाली इमारत के ठीक पास स्थित एक अन्य जर्जर इमारतों को भी गिराने का फैसला लिया गया है.


जानकारी के मुताबिक, बुधवार से इस इमारत को तोड़ने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है. फिलहाल मंगलवार को इमारत के अंदर मौजूद छात्रों का सामान सुरक्षित बाहर निकालने का काम चल रहा है.

अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को जर्जर इमारतों को गिराने की कार्रवाई शुरू की है. इमारत के अंदर मौजूद सामान को दिल्ली फायर के दमकलकर्मी सुरक्षित तरीके से बाहर निकाल रहे हैं. फिलहाल, सामान निकालने का काम अभी पूरा नहीं हुआ है. सभी सामान बाहर निकालने के बाद इमारत को मैन्युअल तरीके से तोड़ा जाएगा, ताकि आसपास की इमारतों को किसी तरह का नुकसान ना पहुंचे.

बता दें कि दो दिन पहले सत्य निकेतन इलाके में एक पीजी बिल्डिंग गिरने से बड़ा हादसा हुआ था. इस दर्दनाक घटना में सात लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई छात्र घायल हुए थे. हादसे के बाद से इलाके में दहशत का माहौल है. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसे के दौरान आसपास की कुछ इमारतों को भी नुकसान पहुंचा था. इसके बाद इलाके की अन्य पुरानी और जर्जर इमारतों को लेकर सवाल उठने लगे हैं.

सरकार कराएगी घायलों का इलाज
मंगलवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एम्स पहुंचकर हादसे में घायल छात्रों से मुलाकात की. उन्होंने छात्रों के स्वास्थ्य और इलाज की जानकारी ली और उनके परिवारों को हर संभव मदद का भरोसा दिया. मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार हादसे में घायल सभी छात्रों के इलाज का पूरा खर्च उठाएगी.

एमसीडी के अफसरों पर गिरी गाज
इस मामले में सरकार ने जिम्‍मेदारी अधिकारियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है. अवैध निर्माण की जांच और निगरानी से जुड़े पांच नगर निगम अधिकारियों को सस्पेंड किया जा चुका है. वहीं, दिल्ली पुलिस ने पीजी से जुड़े एक परिवार के तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया है और मामले की जांच जारी है. इसी बीच, दिल्ली पुलिस ने उस अफवाह को भी गलत बताया है, जिसमें कहा जा रहा था कि बचाव अभियान के दौरान बातचीत रोकने के लिए घटनास्थल पर मोबाइल फोन जैमर लगाए गए थे.

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