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UP Chunav 2027: 'भतीजों की छुट्टी, भतीजी को हरी झंडी!' मायावती का बड़ा फैसला, क्या BSP में परिवारवाद पर लगा फुल स्टॉप?.

 

UP Chunav 2027: 'भतीजों की छुट्टी, भतीजी को हरी झंडी!' मायावती का बड़ा फैसला, क्या BSP में परिवारवाद पर लगा फुल स्टॉप?


खनऊ. बीएसपी सुप्रीमो और यूपी की पूर्व सीएम मायावती ने शनिवर को एक ऐसा बड़ा फैसला लिया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है. सोशल मीडिया पर जारी एक लंबे पोस्ट में मायावती ने बीएसपी को परिवारवाद से पूरी तरह मुक्त करने का संकल्प दोहराया है.


मायावती ने अपने छोटे भाई आनंद कुमार के बेटों आकाश आनंद और ईशान आनंद के लिए बसपा के राजनीतिक दरवाजे हमेशा के लिए बंद करने की बात कही है. पहले आकाश आनंद को पार्टी से निकालने के बाद शनवार को मायावती का छोटा भतीजा ईशान आनंद से मोहभंग हो गया. मायावती का प्यार अब आकाश आनंद और ईशान आनंद की छोटी बहन दीपिका आनंद के लिए उमरा है. इस कड़े फैसले के साथ ही मायावती ने पार्टी के भविष्य के नेतृत्व और 2027 के चुनाव की दिशा को लेकर कई चौकाने वाले संकेत भी दिए हैं. हालांकि, उनकी बातों से ऐसा लग रहा है कि वह यूपी चुनाव 2027 को लेकर नया ताना-बाना बुन रही हैं.

मायावती के इस ताजा बयान के सबसे अहम बिंदु पार्टी के भीतर उत्तराधिकार और परिवारवाद के विवाद को खत्म करने से जोड़ कर देखा जा रहा है. मायावती ने स्पष्ट कर दिया कि उनके भाई आनंद कुमार के किसी भी बेटे को बसपा में अब किसी भी छोटे-बड़े पद पर रहकर राजनीति करने का मौका नहीं मिलेगा. उन्होंने इसे अपना अंतिम फैसला और प्रतिज्ञा करार दिया. वहीं, मायावती ने लिखा कि यदि भविष्य में उनके भाई आनंद कुमार को काम में किसी मदद की आवश्यकता पड़ती है, तो वे अपनी इकलौती बेटी कुमारी दीपिका आनंद की सहायता ले सकते हैं. दीपिका इस समय वकालत की पढ़ाई कर रही हैं.

भतीजों की नो-एंटी के बाद भतीजी के लिए खुला रास्ता

मायावती ने संकेत दिया कि दीपिका की वफादारी, ईमानदारी और कार्यक्षमता को परखने के बाद आगे चलकर उन्हें पार्टी में जरूरत के अनुसार जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. मायावती ने यह शर्त भी रखी कि यदि दीपिका तैयार नहीं होती हैं, तो बसपा के किसी अन्य निष्ठावान दलित मिशनरी कार्यकर्ता को अपनी जिम्मेदारी सौंपेंगे, लेकिन आकाश आनंद और ईशान आनंद को किसी सूरत में आगे नहीं लाएंगे.

यूपी चुनाव 2027 से ठीक पहले मायावती एक्शन में क्यों हैं?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2024 के आम चुनाव में बसपा का खाता न खुलने और वोट शेयर में आई गिरावट के बाद मायावती 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए गलतियों को सुधारने के मूड में हैं. बीजेपी, सपा और कांग्रेस लगातार बीएसपी पर आकाश आनंद के उतार-चढ़ाव भरे फैसलों को लेकर निशाना साध रही थीं. कांशीराम की 'परिवारवाद-विरोधी' विरासत का हवाला देकर मायावती ने खुद को अन्य क्षेत्रीय दलों से अलग खड़ा करने की रणनीति अपनाई है.

मायावती का बीएसपी में Gen-Z का 50% फॉर्मूला

मायावती ने अपने पोस्ट में जोर देकर कहा है कि पार्टी संगठन में 'जेन-जी' (Gen-Z) और 'जेन-अल्फा' की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए 50% युवाओं को जगह देने का काम तेजी से जारी है. आगामी 2027 के चुनावों में सर्वसमाज के युवा और कर्मठ चेहरों को ही उम्मीदवार बनाया जाएगा. वहीं, बागी-निष्कासित नेताओं की वापसी को उन्होंने फेक न्यूज करार दिया. मायावती ने उन चर्चाओं पर पूरी तरह विराम लगा दिया जिनमें कहा जा रहा था कि अनुशासनहीनता के आरोप में निकाले गए पुराने नेताओं को वापस लिया जाएगा. उन्होंने साफ कहा कि निष्कासितों की बसपा में कोई जगह नहीं है.

क्या कोई महिला ही संभालेंगी बीएसपी की कमान?

मायावती के इस बयान के बाद यह सवाल मौजूं हो गया है कि क्या भविष्य में बसपा का नेतृत्व किसी महिला के हाथ में ही रहेगा? मायावती खुद मानती हैं कि एक महिला होने के नाते उन्हें सुरक्षा और परिस्थितियों के कारण भाई को साथ रखना पड़ा. ऐसे में वकालत की पढ़ाई कर रही शिक्षित दीपिका आनंद को आगे कर वे एक युवा, पढ़ी-लिखी महिला दलित चेहरा पेश कर सकती हैं. यदि दीपिका राजनीति में रुचि नहीं लेती हैं, तो पार्टी किसी बाहरी समर्पित दलित मिशनरी कार्यकर्ता को नेतृत्व सौंपेगी, जिससे पार्टी में लोकतंत्र का मैसेज जाएगा.

कुलमिलाकर 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले मायावती ने अपने इस मास्टरस्ट्रोक सोशल मीडिया पोस्ट से दो कड़े संदेश दिए हैं. पहला, यह कि बसपा में परिवारवाद नहीं चलेगा और दूसरा, यह कि पार्टी 2027 की लड़ाई के लिए अपने कोर दलित-युवा जनाधार और कानून द्वारा कानून का राज के पुराने मॉडल पर पूरी ताकत से लौटने जा रही है.

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