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AI से 6G तक खुद की टेक्नोलॉजी बनाएगी Jio, दुनिया में एक्‍सपोर्ट करने का प्‍लान.

 

AI से 6G तक खुद की टेक्नोलॉजी बनाएगी Jio, दुनिया में एक्‍सपोर्ट करने का प्‍लान


नई दिल्ली. भारत में सस्ते इंटरनेट डेटा और व्यापक नेटवर्क विस्तार से डिजिटल क्रांति लाने के 10 साल बाद रिलायंस जियो अब अपनी यात्रा के एक बड़े और नए पड़ाव में प्रवेश कर चुकी है. जियो खुद को अब एक टेलीकॉम कंपनी के ही दायरे में नहीं रखना चाहती और अब खुद को एक पूर्ण भारतीय डीप-टेक कंपनी के रूप में स्थापित कर रही है.


कंपनी का लक्ष्य भारत में बौद्धिक संपदा (Intellectual Property), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), एंटरप्राइज प्लेटफॉर्म और कोर नेटवर्क टेक्नोलॉजी विकसित करना और फिर इन्‍हें इंटरनेशनल मार्केट्स में पहुंचाना है. जियो की 10वीं वर्षगांठ पर जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी ने कंपनी की महत्‍वाकांक्षाओं और रणनीतिक बदलाव के बारे में बताया. उन्‍होंने कहा कि जियो अब एक टेलीकॉम कंपनी से कहीं अधिक है.

आकाश अंबानी ने कहा कि जियो के पहले दशक में कंपनी ने भारत के टेलीकॉम बाजार में बड़ा बदलाव किया, मोबाइल इंटरनेट की लागत कम की और डेटा खपत को ऐतिहासिक स्‍तर पर पहुंचा दिया. लेकिन अब जियो की अगली पारी का दायरा कहीं ज्यादा बड़ा और व्‍यापक है. कंपनी अब टेक्‍नोलॉजी को सिर्फ टेलीकॉम नेटवर्क चलाने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, बल्कि खुद एक प्रोडक्ट के रूप में देख रही है. कंपनी अपना नेटवर्क सॉफ्टवेयर, डिजिटल प्लेटफॉर्म, इंजीनियरिंग क्षमताएं और टेक्नोलॉजी स्टैक तैयार कर रही है. वह केवल कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है.

भारतीय तकनीक को वैश्विक स्‍तर पर ले जाने का इरादा

जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी ने कहा, "जियो आज एक टेलीकॉम कंपनी से कहीं अधिक है. हम भारत में कनेक्टिविटी, डिजिटल प्रोडक्ट्स, एंटरप्राइज सॉल्यूशंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में ओरिजिनल टेक्निक डेवलप कर रहे हैं. हमारे सामने अवसर है कि हम बड़े पैमाने पर लोगों तक टेक्नोलॉजी के फायदे पहुंचाते रहें, इन तकनीकों को वैश्विक स्तर पर ले जाएं और दुनिया के लिए टेक्नोलॉजी बनाने वाले देश के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करें."

नेटवर्क चलाने से लेकर नेटवर्क टेक्नोलॉजी बनाने तक

जियो ने 2016 में जब भारतीय बाजार में कदम रखा था, तब भारतीय की ज्‍यादातर टेलीकॉम कंपनियां टेलीकॉम टेक्नोलॉजी को आयात ही करती थी. भारत मुख्‍यत: टेक्नोलॉजी का उपभोक्ता था. नई टेक्नोलॉजी के दौर में वह तब इंट्री लेता था, जब उसके मूल मानक, सिस्टम और इंटेलेक्‍चूअल प्रॉपर्टी पहले ही दूसरे देशों में विकसित हो चुकी होती थी. जियो इस परिपाटी को बदलने का प्रयास कर रही है.

कंपनी ने अपना 5G कोर और OSS/BSS सिस्टम डेवलप किया है. ये ऑपरेशनल सॉफ्टवेयर नेटवर्क संचालित करने, कनेक्शन उपलब्ध कराने से लेकर बिलिंग तक कई महत्वपूर्ण काम को आसानी से संभालते हैं. जियो ने इसे एक एंड-टू-एंड 5G टेक्नोलॉजी स्टैक के रूप में विस्तार दिया, जिसमें स्टैंडअलोन 5G आर्किटेक्चर पर आधारित कोर, रेडियो और ऑपरेशंस सॉफ्टवेयर शामिल हैं. जियो को अपनी तकनीक की टेस्टिंग ऐसे वातावरण में करने का अवसर मिला, जिसे बहुत कम टेक्नोलॉजी कंपनियां दोहरा सकती हैं. इसे ऐसे लाइव नेटवर्क पर परखा गया है जो करोड़ों लोगों को सर्विस प्रोवाइड कराता है.

15 महीनों में पूरे भारत में दिया 5G कवरेज

जियो ने अक्टूबर 2022 में भारत में 5जी लॉन्‍च किया. खास बात यह है कि दिसंबर 2023 तक G लॉन्च के सिर्फ 15 महीनों के भीतर पूरे भारत में कंपनी ने 5G कवरेज हासिल कर ली. मार्च 2026 तक कंपनी के 5G यूजर्स 26.8 करोड से अधिक हो गए. जियो के वायरलेस ट्रैफिक में 5G की हिस्सेदारी करीब 55 फीसदी थी. रिलायंस के वित्त वर्ष 2025-26 के वित्‍तीय परिणाम के अनुसार, जियो का कुल ग्राहक आधार 52.4 करोड से अधिक था.

ये आंकड़े सिर्फ टेलीकॉम के बड़े पैमाने की वजह से महत्वपूर्ण नहीं हैं. इतने बड़े नेटवर्क को वास्तविक दुनिया का एक विशाल टेक्नोलॉजी टेस्टिंग एनवायरमेंट माना जा सकता है. किसी प्रोडक्ट को सिर्फ लैब में विकसित करने और परखने के बजाय अगर उसे करोड़ों यूजर्स के बीच इस्तेमाल करके उसकी निगरानी की जाए तो उसकी कमियां जल्‍द सामने आती हैं और उनमें सुधार भी जल्‍द किया जा सकता है.

1,009 पेटेंट को मिली मंजूरी

जियो के बदलाव का एक और संकेत पेटेंट डेटाबेस में दिखाई देता है. 31 मार्च 2026 तक जियो प्लेटफॉर्म्स और उसकी सहायक कंपनियों ने कुल मिलाकर 6,817 पेटेंट दाखिल किए थे. ये पेटेंट 4G, 5G, 6G, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्लाउड टेक्नोलॉजी से संबंधित हैं. इनमें से 1,009 पेटेंट को दुनियाभर में मंजूरी मिल चुकी है. वैश्विक पेटेंट इकोसिस्टम में भी कंपनी की स्थिति मजबूत हुई है. 2026 में जियो प्लेटफॉर्म्स ने 2025 के लिए वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइजेशन (WIPO) की पेटेंट को-ऑपरेशन ट्रिटी (Patent Cooperation Treaty) रैंकिंग में ग्लोबल टॉप 20 में जगह बनाई. PCT पेटेंट आवेदनों की संख्या बढ़ने के बाद कंपनी टॉप 20 में शामिल होने वाली कंपनियों में 12वें पायदान पर रही.

जियो ने बनाया अलग मॉडल

पारंपरिक मॉडल में वैश्विक टेक्नोलॉजी कंपनियों से मिलने वाले उपकरणों में शामिल इंटेलेक्‍चूअल प्रॉपर्टी को खरीदा जाता था. जियो का उभरता हुआ मॉडल अलग है. खुद बौद्धिक संपदा विकसित करना, उसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करना और आगे चलकर उसे कहीं और लाइसेंस या कमर्शियलाइज करना. जियो की इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी टीम में 11,303 कर्मचारी काम करते हैं, जो उसके कुल कर्मचारियों का करीब 40 फीसदी है.

भारत को ध्‍यान में रखकर टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट

जियो के कई प्रोडक्ट भारत में मौजूद कुछ समस्‍याओं को देखकर ही निकले हैं. होम ब्रॉडबैंड इसका अच्छा उदाहरण है. भारत जैसे विशाल और भौगोलिक रूप से विविध देश के हर घर तक फाइबर कनेक्शन पहुंचाना महंगा तो है ही साथ ही इसमें बहुत समय भी लग सकता है. जियो ने अपनी UBR तकनीक विकसित की. इसका इस्तेमाल उन जगहों पर फाइबर जैसी ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के लिए किया जा रहा है, जहां पारंपरिक फाइबर नेटवर्क बिछाना मुश्किल है. मार्च 2026 तक जियो के फिक्स्ड ब्रॉडबैंड कनेक्शनों की संख्या 2.7 करोड़ से अधिक हो चुकी थी. भारत के फिक्स्ड ब्रॉडबैंड बाजार में कंपनी की हिस्सेदारी इस साल मार्च के अंत तक करीब 43 फीसदी थी.

यही तरीका जियो के टेलीकॉम पोर्टफोलियो के दूसरे हिस्सों में भी दिखाई देता है. इसके रेडियो प्रोडक्ट्स में मैक्रो बेस स्टेशन, आउटडोर और इनडोर स्मॉल सेल, मिलीमीटर-वेव प्रोडक्ट्स और इंटीग्रेटेड 5G-Wi-Fi टेक्नोलॉजी शामिल हैं. कंपनी ने 1 Tbps यूजर-प्लेन फंक्शन और एक कॉम्पैक्ट स्टैंडअलोन प्राइवेट-नेटवर्क समाधान भी विकसित किया है, जिसे "5G-in-a-box" कहा गया है. इन तकनीकों को भारतीय बाजार की वास्तविकताओं को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है. एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के उन बाजारों में भी ये तकनीकें उपयोगी साबित हो सकती हैं, जहां टेलीकॉम ऑपरेटरों को भारत की तरह ही इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.

टेक्नोलॉजी एक्सपोर्टर बनने का इरादा

जियो का मोबाइल कनेक्टिविटी स्टैक, होम ब्रॉडबैंड स्टैक और मैनेज्ड ऑटोनॉमस कनेक्टिविटी स्टैक वैश्विक स्तर पर कमाई के लिए तैयार हैं. यानी कंपनी ने जिन तकनीकों का विकास अपनी नेटवर्क जरूरतों को पूरा करने के लिए किया है, उन्‍हें आगे चलकर दूसरी टेलीकॉम कंपनियों और एंटरप्राइजेज को बेचा जा सकता है. जियो की नेटवर्क टेक्नोलॉजी पहले ही 50 करोड़ से अधिक ग्राहकों वाले नेटवर्क पर काम कर चुकी है. यह वित्त वर्ष 2025-26 में 241 एक्साबाइट का एनुअल डेटा ट्रैफिक संभाल चुकी है. इस इस टेक्‍नोलॉजी का मूल्‍यांकन करने वाला का मूल्यांकन करने वाला कोई वैश्विक टेलीकॉम ऑपरेटर इसे सिर्फ लैब में विकसित एक अनटेस्‍टेड प्रोडक्ट के रूप में नहीं देखेगा.

जियो ही नहीं भारत को भी फायदा

ये सच है कि वैश्विक स्तर पर टेक्नोलॉजी का विस्तार आसान नहीं होगा. लेकिन अगर जियो इसमें सफल होती है तो इसका असर सिर्फ कंपनी तक सीमित नहीं रहेगा. यह वैश्विक टेक्नोलॉजी वैल्यू चेन में भारत की स्थिति में बदलाव का संकेत होगी. दूसरे देशों में विकसित टेलीकॉम टेक्नोलॉजी खरीदने वाला खुद टेक्नोलॉजी विकसित करके सप्लायर के रूप में वैश्विक मार्केट में प्रतिस्‍पर्धा करता नजर आएगा.

एंटरप्राइज, क्लाउड और AI से बढ़ रहा अवसर

जियो की टेक्नोलॉजी महत्वाकांक्षा अब कंज्यूमर कनेक्टिविटी से आगे बढ़ रही है. स्टैंडअलोन 5G फैक्ट्रियों, अस्पतालों और सार्वजनिक नेटवर्क के लिए सुरक्षित नेटवर्क उपलब्ध करा सकता है. वहीं प्राइवेट 5G, एज कंप्यूटिंग, क्लाउड प्लेटफॉर्म और ऑटोनॉमस नेटवर्क मैनेजमेंट एंटरप्राइज क्षेत्र में काफी बड़े अवसर पैदा कर सकते हैं. इसके बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बहुत बड़ा क्षेत्र है. रिलायंस ने " एआई एवरिवेयर, फॉर एवरिवन, (AI Everywhere, For Everyone) का नारा दिया है. इसके तहत कनेक्टिविटी, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल प्लेटफॉर्म को एक साथ लाने की कोशिश की जा रही है.

जियो की हालिया वार्षिक रिपोर्ट में प्रोप्राइटरी टेक्नोलॉजी और डिजिटल सर्विसेज को जियो की रणनीति के केंद्र में रखा गया है. इसमें AI को नेटवर्क, ऑपरेशंस और ग्राहकों के लिए बनाए गए प्लेटफॉर्म्स में तेजी से शामिल किया जा रहा है. इसके पीछे की मूल भावना है, ऐसी टेक्नोलॉजी विकसित करना जो भारतीय स्तर और भारतीय अर्थव्यवस्था के अनुरूप काम करे. उसे बड़ी आबादी तक पहुंचाना और फिर ऐसी ही जरूरतों वाले दूसरे देशों में ले जाना.

6G पर कंपनी की नजर

ऐतिहासिक रूप से भारत नई मोबाइल टेक्नोलॉजी के दौर में अक्सर तब शामिल हुआ, जब उसके मानक और बौद्धिक संपदा दूसरे देशों में विकसित हो चुके थे. जियो चाहती है कि अगला दौर अलग हो. उसके पेटेंट पोर्टफोलियो में पहले से 6G शामिल है और कंपनी भविष्य के वैश्विक मानकों को आकार देने के उद्देश्य से चल रहे प्रयासों में भी भाग ले रही है.

जियो का दूसरा दशक हो सकता है बिल्कुल अलग

जियो के पहले दशक ने दिखाया कि जब डिजिटल कनेक्टिविटी सस्ती और अभूतपूर्व स्तर पर उपलब्ध हो जाती है तो क्या बदलाव आ सकते हैं. अब कंपनी के सामने सवाल है कि क्या भारत के लिए टेक्नोलॉजी बनाने वाली कंपनी भारत को दुनिया के लिए टेक्नोलॉजी का स्रोत बना सकती है? इसके संकेत तेजी से दिखाई दे रहे हैं-स्वदेशी 5G स्टैक, हजारों पेटेंट, करोड़ों यूजर्स से मिलने वाला वास्तविक दुनिया का अनुभव, स्वदेशी ब्रॉडबैंड टेक्नोलॉजी और एंटरप्राइज, क्लाउड, AI तथा 6G तक फैली महत्वाकांक्षाएं.

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