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मौत के मुंह में लश्कर कमांडर, अस्पताल नसीब हुआ न डॉक्टर, पाकिस्तान से आई स्‍पेशल 'शहद', पढ़ें मूसा का खौफनाक अंत

मौत के मुंह में लश्कर कमांडर, अस्पताल नसीब हुआ न डॉक्टर, पाकिस्तान से आई स्‍पेशल 'शहद', पढ़ें मूसा का खौफनाक अंत


जम्‍मू और कश्‍मीर न्‍यूज. जम्मू-कश्मीर के जंगलों में सुरक्षा बलों से बचकर छिपे लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा के इलाज का हैरान करने वाला तरीका सामने आया है. अधिकारियों के मुताबिक, गोली लगने के बाद मूसा ने अपने घाव पर शुद्ध शहद लगाया था.


सुरक्षा बलों की घेराबंदी के कारण वह किसी अस्पताल या डॉक्टर तक नहीं पहुंच पा रहा था. ऐसे में पाकिस्तान में बैठे उसके हैंडलर्स के निर्देश पर उसके लिए शुद्ध शहद की व्यवस्था की गई थी.

समाचार एजेंसी PTI ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि हाशिम मूसा को 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के प्रमुख साजिशकर्ताओं में से एक माना जाता था. वह जम्मू-कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा का चीफ ऑपरेशनल कमांडर भी बताया गया था. अधिकारियों के अनुसार, मूसा पाकिस्तान सेना के स्‍पेशल सर्विस ग्रुप (एसएसजी) का पूर्व कमांडो भी रह चुका है.

राजौरी के जंगलों में शुरू हुआ था लंबा ऑपरेशन

  • अधिकारियों के मुताबिक, मूसा और उसका साथी यासिर पुंछ-राजौरी के घने जंगलों में छिपे हुए थे. दोनों की तलाश में सुरक्षा बलों ने 'ऑपरेशन शेरुवाली' चलाया.
  • इस ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच राजौरी के डोरीमल-गंभीर मुगला इलाके में मुठभेड़ हुई. इसी मुठभेड़ में मूसा घायल हो गया था.
  • गोली लगने के बाद उसकी मुश्किलें और बढ़ गईं. इलाके में सुरक्षा बलों का ऑपरेशन जारी था और जंगल में लगातार तलाशी चल रही थी. ऐसे में मूसा के लिए बाहर निकलकर अस्पताल या किसी डॉक्टर तक पहुंचना संभव नहीं था.

घायल मूसा ने घाव पर लगाया शहद

अधिकारियों के मुताबिक, मेडिकल मदद नहीं मिलने के कारण मूसा ने अपने गोली के घाव पर शुद्ध शहद लगाया. बताया गया है कि उसके घावों पर शहद लगाए जाने की तस्वीरें भी सामने आई हैं. ये तस्वीरें यासिर के मोबाइल फोन से बरामद हुईं. अधिकारियों के अनुसार, मूसा के मारे जाने के बाद उसके सहयोगी यासिर के फोन की जांच में ये तस्वीरें मिलीं. जांच में यह भी सामने आया कि तस्वीरें पाकिस्तान में मौजूद हैंडलर्स को भेजी गई थीं. इसके बाद वहां से मूसा के इलाज में मदद के लिए शुद्ध शहद की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए थे.

जंगल में छिपकर चल रहा था इलाज

  • सुरक्षा बलों की लगातार मौजूदगी के कारण मूसा को जंगल में ही छिपकर रहना पड़ा. उसके घायल होने के बाद उसकी स्थिति की जानकारी उसके नेटवर्क के जरिए पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स तक पहुंचाई जा रही थी.
  • घावों की तस्वीरें भेजे जाने और फिर शहद की व्यवस्था करने के निर्देश से यह संकेत मिलता है कि सुरक्षा घेरे के बीच भी उसके सहयोगी उसके इलाज और सुरक्षित ठिकाने को लेकर संपर्क में थे.
  • हालांकि, अधिकारियों की ओर से यह नहीं बताया गया है कि शहद लगाने से मूसा के घाव में कितना सुधार हुआ था या उसे इसके अलावा किसी तरह की मेडिकल मदद मिल पाई थी या नहीं.

45 दिन से ज्यादा चला तलाशी अभियान

मूसा और यासिर को पकड़ने के लिए सुरक्षा बलों का ऑपरेशन कई हफ्तों तक चला. अधिकारियों के मुताबिक, पुंछ-राजौरी के जंगलों में दोनों की तलाश 45 दिनों से ज्यादा समय तक जारी रही. घने जंगल, ऊंचाई वाला इलाका और मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियां सुरक्षा बलों के लिए बड़ी चुनौती थीं. इसी दौरान मूसा के घायल होने के बाद भी उसकी तलाश जारी रही. आखिरकार मूसा और उसके सहयोगी यासिर के खिलाफ चल रहा ऑपरेशन यूसमर्ग के इलाके तक पहुंचा. अधिकारियों के अनुसार, इसी हाई-एल्टीट्यूड ऑपरेशन में इस सप्ताह सेना ने मूसा को मार गिराया.

पहलगाम हमले से भी जुड़ा था नाम

अधिकारियों ने हाशिम मूसा को 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के प्रमुख साजिशकर्ताओं में शामिल बताया था. इस हमले के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकी नेटवर्क और उनके मददगारों के खिलाफ कार्रवाई तेज की थी. मूसा को लश्कर-ए-तैयबा का क्षेत्रीय ऑपरेशनल कमांडर बताया गया था. उसके पाकिस्तान सेना के स्‍पेशल सर्विस ग्रुप में कमांडो रहने की बात भी अधिकारियों ने कही है.

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