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EPFO का बहुत बड़ा फैसला! ₹15,000 से बढ़कर हुई सीमा, अब इन कर्मचारियों की कटेगी मोटी सैलरी.

 

EPFO का बहुत बड़ा फैसला! ₹15,000 से बढ़कर हुई सीमा, अब इन कर्मचारियों की कटेगी मोटी सैलरी


कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने देश के लाखों नौकरीपेशा लोगों के लिए एक बहुत बड़ा बदलाव लागू कर दिया है। सरकार ने EPFO के तहत आने वाली अनिवार्य कवरेज के लिए मासिक वेतन की सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर सीधा 25,000 रुपये कर दिया है।


इस बड़े बदलाव के बाद अब 15,000 रुपये से 25,000 रुपये तक की सैलरी पाने वाले पात्र कर्मचारी भी सामाजिक सुरक्षा के पक्के दायरे में आ जाएंगे। सरकार के अनुमान के मुताबिक, इस कदम से देश के 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारी सीधे तौर पर EPFO से जुड़ जाएंगे।

सबसे खास बात यह है कि यह नया नियम केवल अक्टूबर से नहीं, बल्कि 17 सितंबर 2026 से ही प्रभावी हो चुका है। हालांकि, अक्टूबर की सैलरी और पीएफ (PF) की गणना में इसका असर अब बहुत साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। इस बदलाव के बाद पीएफ, पेंशन और बीमा से जुड़ी सामाजिक सुरक्षा का दायरा काफी बड़ा हो गया है, हालांकि हर कर्मचारी पर नियम एक जैसे लागू नहीं होंगे।

15,000 से बढ़कर हुई 25,000 रुपये की वेतन सीमा

लंबे समय से EPFO की अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन की सीमा 15,000 रुपये प्रति माह तय थी, जिसे अब बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया गया है। इसका सीधा फायदा उन कर्मचारियों को मिलेगा जिनका वेतन पहले 15,000 रुपये से ज्यादा होने की वजह से अनिवार्य पीएफ दायरे से बाहर रह जाता था। अब इस नई सीमा के भीतर आने वाले सभी नए और पात्र कर्मचारी इस मजबूत सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा बन सकेंगे।

51 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को मिलेगा फायदा

सरकार का मानना है कि इस बदलाव से देशभर के 51 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को सीधा लाभ मिलेगा। EPFO के तहत पात्र कर्मचारियों को मुख्य रूप से तीन बड़ी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का फायदा मिलता है-ईपीएफ (EPF), ईपीएस (EPS) और ईडब्लूएलआई या ई़डीएलआई (EDLI)। पीएफ में कर्मचारी और कंपनी दोनों मिलकर योगदान करते हैं, जिस पर मिलने वाला ब्याज रिटायरमेंट के समय एक बड़ा फंड तैयार करता है। वहीं ईपीएस से पेंशन और ई़डीएलआई से कर्मचारियों के परिवारों को बीमा सुरक्षा मिलती है।

जानिए 20,000 और 25,000 रुपये वेतन वालों पर क्या होगा असर

अगर किसी कर्मचारी का पीएफ योग्य वेतन 20,000 रुपये प्रति माह है, तो 12 प्रतिशत की दर से उसका मासिक योगदान 2,400 रुपये होगा। यानी कंपनी और कर्मचारी दोनों की तरफ से 2,400-2,400 रुपये का योगदान होगा। इसका सबसे पहला और सीधा असर आपकी इन-हैंड सैलरी पर पड़ेगा। अगर पहले आपकी सैलरी से पीएफ नहीं कटता था, तो अब हर महीने 2,400 रुपये कटने शुरू हो जाएंगे।

ठीक इसी तरह, यदि किसी का वेतन 25,000 रुपये है, तो 12 प्रतिशत के हिसाब से कर्मचारी के वेतन से 3,000 रुपये तक का योगदान कटेगा और इतना ही योगदान कंपनी की तरफ से भी किया जाएगा। इसमें से एक हिस्सा पेंशन (EPS) में और बाकी हिस्सा पीएफ खाते में जमा होगा।

35,000 रुपये वेतन पाने वालों के लिए क्या हैं नियम?

अब सवाल यह आता है कि जिन लोगों की सैलरी 25,000 रुपये से ज्यादा है, उनका क्या होगा? उदाहरण के लिए, अगर किसी का वेतन 35,000 रुपये है, तो इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि उसकी पूरी राशि का 12 प्रतिशत यानी 4,200 रुपये अनिवार्य रूप से काटा जाएगा। वैधानिक वेतन सीमा लागू होने के कारण पीएफ की गणना 25,000 रुपये की सीमा तक ही की जा सकती है, जिससे कर्मचारी का योगदान 3,000 रुपये तक सीमित रह सकता है। हालांकि, यह पूरी तरह कंपनी की नीतियों और कर्मचारी की पिछली सदस्यता पर निर्भर करता है।

सैलरी स्लिप में इन बातों का रखें खास ध्यान

नई व्यवस्था लागू होने के बाद हर कर्मचारी को अपनी सैलरी स्लिप को बहुत ध्यान से देखना चाहिए। आपको यह जांचना चाहिए कि कंपनी ने आपका बेसिक या पीएफ वेज कितना माना है, आपके हिस्से से कितना पैसा कटा है और कंपनी ने कितना योगदान दिया है। अगर आपकी सैलरी स्लिप और EPFO पासबुक में कोई अंतर दिखाई देता है, तो तुरंत अपनी कंपनी के एचआर (HR) विभाग से संपर्क करें।

तत्काल प्रभाव से आपकी इन-हैंड सैलरी भले ही थोड़ी कम हो जाएगी, लेकिन भविष्य के लिए आपका एक बहुत मजबूत रिटायरमेंट फंड तैयार होना शुरू हो जाएगा।

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