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HP News: 125 वर्ष में 41वां सबसे सूखा रहा मानसून, 11 फीसदी कम बारिश के साथ विदाई

हिमाचल प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्तूबर को पूरी तरह विदा हो गया। इस बार मानसून ने प्रदेश को औसत से कम बारिश दी। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला की मानसून रिपोर्ट के अनुसार जून से सितंबर तक प्रदेश में 652.3 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश 734.4 मिलीमीटर रहती है। इस तरह प्रदेश में मानसूनी बारिश 11 फीसदी कम रही। 1901 से 2026 तक के 125 साल के बारिश के आंकड़ों में यह 41वां सबसे कम वर्षा वाला मानसून रहा। 

मौसम विभाग के मानकों के अनुसार बारिश सामान्य श्रेणी में रही, लेकिन जिलों और महीनों में वर्षा का वितरण असमान रहा। इस साल 30 जून को प्रदेश में मानसून पहुंचा था जो सामान्य आगमन तिथि से करीब सात दिन देरी से पहुंचा था। चार महीने के दौरान कहीं मूसलाधार बारिश हुई तो कहीं सूखे जैसी स्थिति रही। सामान्य विदाई तिथि 25 सितंबर के मुकाबले मानसून आठ दिन देर से 3 अक्टूबर को प्रदेश से पूरी तरह रवाना हुआ। 

मानसून की विदाई के साथ ही प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ठंडक बढऩे लगी है। मानसून सीजन की शुरुआत कमजोर रही। जून में प्रदेश में 64.9 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 36 फीसदी कम थी। जुलाई में मानसून ने रफ्तार पकड़ी और 272.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई,, जो सामान्य से छह फीसदी अधिक रही। इसी महीने 10 जुलाई को सिरमौर में अत्यधिक भारी बारिश दर्ज की गई।

इसके बाद अगस्त में फिर बारिश का ग्राफ नीचे आ गया। अगस्त में 212.5 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 17 फीसदी कम थी। सितंबर में मानसून और कमजोर रहा तथा 103.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जो सामान्य से 14 फीसदी कम रही। पूरे मानसून सीजन में प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश के 14 दिन दर्ज किए गए। इनमें जुलाई में आठ, अगस्त में चार और सितंबर में दो दिन शामिल रहे। जिला स्तर पर किन्नौर, ऊना, बिलासपुर, कुल्लू, चंबा, कांगड़ा, मंडी, शिमला, सिरमौर और सोलन में बारिश सामान्य रही। वहीं हमीरपुर में बारिश की कमी रही, जबकि जनजातीय जिला लाहुल-स्पीति में सूखे की स्थिति देखने को मिली।

2025 के रिकॉर्ड मानसून के बाद फिर गिरा बारिश का ग्राफ

पिछले 12 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो हिमाचल में मानसून का मिजाज लगातार उतार-चढ़ाव वाला रहा है। 2025 में रिकॉर्ड 1022.5 मिलीमीटर बारिश हुई थी, जो सामान्य से 39 फीसदी अधिक थी। इसके ठीक एक साल बाद 2026 में बारिश घटकर 652.3 मिलीमीटर रह गई। 

2020 में 567.4 मिलीमीटर बारिश के साथ इस अवधि का सबसे कमजोर मानसून दर्ज हुआ था, जो सामान्य से 26 फीसदी कम था। 2015 में प्रदेश में 638.2 मिलीमीटर बारिश हुई और यह सामान्य से 16 फीसदी कम रही। 2016 में 623.9 मिलीमीटर के साथ 18 फीसदी कमी दर्ज हुई। 2017 में 717.2 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से छह फीसदी कम थी। 2018 में मानसून ने जोर पकड़ा और 927 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 21 फीसदी अधिक थी। 2019 में 686.9 मिलीमीटर बारिश के साथ 10 फीसदी कमी रही।

2020 में मानसून सबसे कमजोर वर्षों में रहा और सिर्फ 567.4 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई। 2021 में 688.6 मिलीमीटर बारिश के साथ 10 फीसदी कमी, जबकि 2022 में 716.2 मिलीमीटर के साथ दो फीसदी की मामूली कमी रही। 2023 में फिर अच्छी बारिश हुई और 886 मिलीमीटर के साथ सामान्य से 21 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई। 2024 में बारिश घटकर 600.8 मिलीमीटर रह गई और 18 फीसदी कमी रही। इसके बाद 2025 में रिकॉर्ड 1022.5 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 39 फीसदी अधिक थी। अब 2026 में बारिश 652.3 मिलीमीटर रही और सामान्य से 11 फीसदी कम दर्ज हुई।

मानसून के आगमन और विदाई में भी दिखा उतार-चढ़ाव

पिछले वर्षों में मानसून के हिमाचल पहुंचने और लौटने की तारीखों में भी काफी अंतर रहा है। 2015 में मानसून 24 जून को पहुंचा और 29 सितंबर को विदा हुआ। 2016 में 21 जून को पहुंचने के बाद 5 अक्टूबर को विदाई हुई। 2017 में एक जुलाई को मानसून पहुंचा और 30 सितंबर को लौट गया। 2018 में 27 जून को आगमन और एक अक्टूबर को विदाई हुई। 

2019 में मानसून दो जुलाई को हिमाचल पहुंचा और सबसे देर से 11 अक्टूबर को विदा हुआ। 2020 में 24 जून को आगमन और 30 सितंबर को विदाई हुई। 2021 में मानसून ने 13 जून को दस्तक दी और 10 अक्टूबर को लौट गया। 2022 में 29 जून को पहुंचने के बाद 3 अक्टूबर को विदाई हुई। 2023 में 24 जून को आगमन और 6 अक्टूबर को विदाई हुई। 2024 में 27 जून को पहुंचा मानसून 2 अक्टूबर को विदा हुआ। 2025 में 20 जून को मानसून ने दस्तक दी और 26 सितंबर को वापसी हुई। इस साल 30 जून को पहुंचे मानसून ने 3 अक्टूबर को प्रदेश से विदाई ली।

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