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Viral Video: 'तुम दुनिया भर की लड़कियों के लिए प्रेरणा हो', एशियन गेम्स में 2 गोल्ड जीतने वाली चिकीथा से बोलीं नीता अंबानी

'तुम दुनिया भर की लड़कियों के लिए प्रेरणा हो', एशियन गेम्स में 2 गोल्ड जीतने वाली चिकीथा से बोलीं नीता अंबानी, VIDEO


मुंबई: जापान में एशियन गेम्स 2026 में भारतीय एथलीट चिकीथा तनिपार्थी ने इतिहास रच दिया है. उन्होंने अपने पहले एशियन गेम्स में दो गोल्ड मेडल जीते हैं. चिकीथा ने महिलाओं के टीम इवेंट और मिक्स्ड टीम इवेंट में टॉप पोजीशन हासिल की है.


वो रिलायंस फाउंडेशन की एथलीट हैं. उनकी इस ऐतिहासिक जीत पर रिलायंस फाउंडेशन की फाउंडर और चेयरपर्सन नीता एम. अंबानी ने उनका हौसला बढ़ाया. नीता अंबानी ने वीडियो कॉल पर एथलीट चिकीथा तनिपार्थी से बात की और उनके शानदार प्रदर्शन की तारीफ की. नीता अंबानी ने चिकीथा को यह भरोसा भी दिया कि रिलायंस फाउंडेशन हमेशा उनके सपोर्ट के लिए तैयार है. चिकीथा ने बताया कि जीत के बाद लगातार आ रहे फोन कॉल्स और मीडिया के कारण उन्हें सेलिब्रेट करने का समय ही नहीं मिला.

नीता अंबानी ने कहा, 'तुमने सभी लड़कियों को बहुत गौरवान्वित किया है. तुम हमारे देश और दुनिया भर की बहुत सारी लड़कियों के लिए एक प्रेरणा बनने जा रही हो.'

नीता अंबानी ने इस खास बातचीत के दौरान चिकीथा के माता-पिता को भी अपनी बधाई दी. जब चिकीथा ने बताया कि उनके पिता एक किसान हैं, तो नीता अंबानी ने कहा, 'किसान हमारे देश का दिल हैं. एक किसान की बेटी के रूप में तुम देश का मान बढ़ा रही हो.' चिकीथा ने आगे भी अपने इस बेहतरीन खेल प्रदर्शन को लगातार बनाए रखने की बात कही. नीता अंबानी ने चिकीथा के भारत लौटने पर जल्द ही उनसे मुलाकात करने का वादा किया.

चिकीथा ने ओलंपिक 2028 के लिए भारत का पहला कोटा भी पक्का कर लिया है.

चिकीथा का बचपन में कराटे से तीरंदाजी तक का सफर कैसा रहा?

चिकीथा तनिपार्थी तेलंगाना के सुल्तानपुर गांव की रहने वाली हैं. उन्होंने बचपन में कराटे से शुरुआत की थी. स्कूल के दिनों में उनके पास कराटे में ब्लैक बेल्ट भी था. लेकिन उनके पिता श्रीनिवास राव उन्हें किसी और स्पोर्ट्स में डालना चाहते थे. दशहरा के दिन चिकीथा के चाचा ने उन्हें एक खिलौना धनुष गिफ्ट किया था. इसके बाद से उनका इंटरेस्ट तीरंदाजी में बढ़ने लगा. पिता ने उनकी प्रतिभा देखी और उन्हें ट्रेनिंग दिलानी शुरू कर दी.

चिकीथा के सपनों को पूरा करने के लिए पिता ने किए बलिदान

तीरंदाजी एक महंगा स्पोर्ट्स है और इसमें अच्छे इक्विपमेंट की जरुरत होती है. चिकीथा के पिता ने अपनी बेटी की ट्रेनिंग के लिए बैंक से लोन लिया. उन्होंने परिवार का राइस हार्वेस्टर भी बेच दिया ताकि महंगे धनुष खरीदे जा सकें. एक बार धोखाधड़ी में उनके 1.5 लाख रुपये डूब गए थे. इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और नया इक्विपमेंट खरीदने के लिए 3.5 लाख रुपये का एक और लोन लिया. पिता की इसी मेहनत ने चिकीथा को एशियन गेम्स तक पहुंचाया. 

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