Kangra: प्रदेश में अब बिना टीका लगाए हो सकेगा बिगड़े टीबी रोग का इलाज

अब टीबी के एमडीआर स्टेज के मरीज (बिगड़ा टीबी रोग) को टीके लगाने से छुटकारा मिलेगा। साथ ही अब एमडीआर स्टेज के मरीजों को उपचार के लिए टांडा और सोलन के धर्मपुर अस्पताल में भी तीन महीने दाखिल नहीं होना पड़ेगा। केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने टीबी के खात्मे के लिए अब बिना टीके से एमडीआर रोगियों के उपचार करने की योजना बनाई है।
अब एमडीआर मरीजों को बिना टीके के छह और 18 महीने दवाई का कोर्स ही करना होगा। अभी तक एमडीआर मरीजों को तीन महीने टांडा या धर्मपुर अस्पताल में एडमिट होना पड़ता था, जहां प्रतिदिन मरीज को टीके का दर्द सहन करना पड़ता था, लेकिन अब नए दिशा-निर्देश पर दवाई प्रतिरोधक में बदलाव किया गया है।
जिला अस्पतालों के अलावा नागरिक अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी एमडीआर मरीजों की जांच का प्रावधान रहेगा। प्रदेश में वर्तमान समय में लगभग 500 एमडीआर स्टेज के मरीज हैं। इन्हें उपचार के लिए टांडा और धर्मपुर अस्पताल जाना पड़ता था।
अब स्वास्थ्य विभाग नए दिशा-निर्देश के अनुसार एक सप्ताह में सीएचसी और जिला के अन्य अस्पतालों में दवाई से इन मरीजों को उपचार शुरू करेगा। स्वास्थ्य विभाग टीबी मरीजों को अस्पताल आने-जाने का बस किराया भी देगा। राज्य क्षय रोग अधिकारी डॉ. गोपाल बेरी ने कहा कि एमडीआर मरीजों को टीके नहीं लगाए जाएंगे। टीके की बजाय दवाई से उपचार किया जाएगा।
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