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'मामा तो हम फंदा नहीं लगाते...', कमरे में लटकी मिली छात्रा की लाश, सुसाइड नोट में भाई के लिए कही ये बात

 

'मामा तो हम फंदा नहीं लगाते...', कमरे में लटकी मिली छात्रा की लाश, सुसाइड नोट में भाई के लिए कही ये बात

टा के कोतवाली देहात क्षेत्र के गांव चमकरी में सोमवार की रात में एक छात्रा ने फंदा लगाकर जान दे दी। छात्रा लगभग 8 माह पूर्व ही अपनी ननिहाल से लौटकर घर आई थी। छात्रा ने एक सुसाइड नोट भी लिखकर छोड़ा है। इसमें लिखा है कि मामा मेरे चाचा से कुछ मत कहना, सार्थक (चचेरे भाई) की जिंदगी बर्बाद हो जाएगी।


गांव चमकरी निवासी रवि पाठक ने बताया की भतीजी आकांक्षा (19) बचपन से ही अपनी ननिहाल जिला फतेहपुर में रहती थी। सोमवार की देर रात अपने घर चमकरी में कमरे के अंदर दुपट्टा से फंदा लगा लिया। जब तक हम लोग पहुंचे आकांक्षा की मौत हो चुकी थी।

वहीं, ग्रामीणों का आरोप है कि छात्रा की हत्या उसके घर वालों ने ही की है। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम कराया है। सीओ सिटी अमित कुमार राय ने बताया कि लड़की बचपन से ही ननिहाल में रही है और वहीं जाने के बारे में कह रही थी। जबकि परिजन उसके आधार कार्ड व अन्य दस्तावेजों में यहां का पता दर्ज करा रहे थे।

सीओ ने कहा कि हो सकता है इसी वजह से उसने यह कदम उठाया हो। फिलहाल घटना के प्रत्येक पहलू की गहनता के साथ जांच-पड़ताल की जा रही है जो भी तथ्य निकलकर सामने आएंगे, उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।



कमरे से छात्रा का लिखा हुआ एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। इसमें उसने लिखा है कि मामा मेरे चाचा से कुछ मत कहना, न तुम यहां भेजते न हम फंदा लगाते। अब कुछ मत करना, यही सोचना हम थे ही नहीं। मामा हम तो बर्बाद थे ही हमारे पीछे चचेरे भाई सार्थक की जिंदगी बर्बाद मत करना। हमें आज नहीं तो कल मरना ही था, फंदा लगाकर नहीं मरते तो एक्सीडेंट से मर जाते। यह हमने सोच लिया था।


माता-पिता की भी इसी प्रकार से हुई थी मौत
रवि पाठक ने बताया कि आकांक्षा जब 4 महीने की थी, तभी उसकी मां ने खुद को आग लगाकर खत्म कर लिया। वहीं पिता विशाल पाठक 2019 में फंदे से लटक कर दुनिया छोड़ गए। इसके बाद से आकांक्षा ज्यादातर ननिहाल में ही रहती थी। लगभग 8 माह पूर्व ही वह गांव में आई थी।

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